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विश्व आईवीएफ दिवस: संतान की चाह वाले दंपती तीन महीने से कर रहे इंतजार, सेरोगेसी एक्ट से जटिल हुई प्रक्रिया
Mon, 25 Jul 2022 10:57 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 25 Jul 2022 10:57 AM IST
सार
कॉमर्शियल सेरोगेसी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ऐसे में ऐसी महिला का मिलना मुश्किल है, जो अपनी इच्छा से दूसरे की संतान को बिना किसी लाभ के अपने कोख में नौ महीने तक पाले।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
चंडीगढ़ के आईवीएफ सेंटर में पिछले तीन महीने से लगभग 75 दंपतियों के अंडे सेरोगेट मदर के इंतजार में सुरक्षित किए जा चुके हैं। स्थिति यह है कि दंपतियों के साथ उन सेंटर संचालकों की चिंता भी बढ़ती जा रही है क्योंकि अगर समय रहते उनके अंडों को सेरोगेट मां की कोख न मिली तो जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह प्रक्रिया शुरू की गई थी वह अधूरा ही रह जाएगा।
इंडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव के चंडीगढ़ चैप्टर की अध्यक्ष डॉ. निर्मल भसीन ने बताया कि 25 जनवरी 2022 को सेरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 लागू कर दिया गया है। इसके बाद से फिर प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। इसे लेकर सेंटर संचालक भी असमंजस की स्थिति में है। इस एक्ट के लागू हो जाने से किराए की कोख का व्यवसायीकरण बंद कर दिया गया है। इसके अनुसार अब रिश्तेदार ही सेरोगेट मां बन सकेगी। यह किस तरह होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे सेरोगेसी की प्रक्रिया पूरी तरह बंद है।
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इंडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव के चंडीगढ़ चैप्टर की अध्यक्ष डॉ. निर्मल भसीन ने बताया कि 25 जनवरी 2022 को सेरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021 लागू कर दिया गया है। इसके बाद से फिर प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। इसे लेकर सेंटर संचालक भी असमंजस की स्थिति में है। इस एक्ट के लागू हो जाने से किराए की कोख का व्यवसायीकरण बंद कर दिया गया है। इसके अनुसार अब रिश्तेदार ही सेरोगेट मां बन सकेगी। यह किस तरह होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं किया गया है। इससे सेरोगेसी की प्रक्रिया पूरी तरह बंद है।
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मां बनने में न करें देरी
इंडियन सोसायटी ऑफ असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव के चंडीगढ़ चैप्टर की सोसाइटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत कौर का कहना है कि सरोगेसी की प्रक्रिया में किए गए कानूनी बदलाव स्वागत योग्य हैं लेकिन अभी इसमें व्यापक स्तर पर भ्रम की स्थिति है इसलिए करिअर की चाह में या फिगर की चिंता में मां बनने में देरी जैसी गलती कतई न करें। सरोगेसी आईवीएफ के अंतर्गत ही आने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। ऐसा न हो कि आने वाले समय में अन्य प्रक्रियाएं भी जटिल हो जाएं। डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि कॉमर्शियल सेरोगेसी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। ऐसे में ऐसी महिला का मिलना मुश्किल है, जो अपनी इच्छा से दूसरे की संतान को बिना किसी लाभ के अपने कोख में नौ महीने तक पाले।प्रदूषण, तनाव और अनियमित दिनचर्या बन रही कारण
डॉ. गुरप्रीत कौर का कहना है कि बांझपन की बढ़ती समस्या के लिए प्रदूषण और तनाव का बढ़ता स्तर काफी हद तक जिम्मेदार है। इसके साथ ही भागदौड़ भरी जिंदगी में अव्यवस्थित दिनचर्या भी इसे बढ़ावा दे रही है। महिलाओं की तरह पुरुषों में भी विभिन्न प्रकार के संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है, जो गर्भधारण करने में रुकावट का कारण बन रहा है।इन्हें पड़ती है सेरोगेट की जरूरत
- गर्भाशय न होने पर।
- टीबी की बीमारी से गर्भाशय की समस्या होने पर।
- कैंसर, गुर्दा, अस्थमा, उच्च रक्तचाव सहित अन्य बीमारियां, जिसमें गर्भधारण करना महिला के लिए जोखिम भरा होता है।
अब ये होगी प्रक्रिया
- रिश्तेदार ही सरोगेट मदर बन सकती हैं, उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं दी जानी है।
- शादीशुदा महिला वह भी एक बार ही सरोगेट मदर बन सकेगी।
- महिलाएं एक बार ही एग डोनेट कर सकेंगी।
- पुरुष दो बार ही स्पर्म डोनेट कर सकेंगे।
ये है हाल
- देश में आइवीएफ सेंटर 100000 से अधिक।
- एक फीसदी मामलों में सेरोगेसी।
- ट्राइसिटी में आइवीएफ सेंटर 22 हैं।
- यहां हर महीने कृत्रिम गर्भाधान 20 से 25 तक होता है।
इसका रखें ध्यान
- 25 साल के अंदर शादी करने का निर्णय लें
- शादी के एक से डेढ़ साल के दौरान गर्भधारण हो जाना चाहिए
- उस दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर इंतजार करने के बजाय तत्काल विशेषज्ञ की राय लें
- गर्भधारण में विलंब होने पर पति-पत्नी दोनों ही अपना चेकअप कराएं
- प्रतिदिन 25 से 30 मिनट योग, व्यायाम या आसन जरूर करें
- तनाव प्रबंधन के लिए मेडिटेशन बेहतर माध्यम हो सकता है
- शादी से पहले यौन संबंधों को लेकर सावधान रहें
- खानपान में पोषक तत्व युक्त आहार शामिल करें
तेजी से बढ़ रहे बांझपन के मामले
वर्ष कुल ओपीडी बांझपन के मामले2017-18 37115 12386
2018-19 39761 13550
2019-20 37908 13118
दांव पर लग रहे रिश्ते
केस- 1: पंजाब निवासी सिमरनजीत कौर (बदला हुआ नाम) ने तलाक लेने के बाद दूसरा विवाह कर लिया है। पहले पति से उन्हें एक बेटा है लेकिन दूसरे पति की इच्छा है कि उन्हें एक और संतान हो। सिमरनजीत कौर की शारीरिक स्थिति ठीक न होने से पीजीआई के डॉक्टरों ने उन्हें दोबारा मां बनने से मना कर दिया है। ऐसे में सिमरनजीत का रिश्ता दांव पर लगा हुआ है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने तीन महीने पहले सेरोगेट मदर की प्रक्रिया शुरू की थी। उनके अंडे आईवीएफ सेंटर में सुरक्षित कर दिए गए हैं लेकिन सेरोगेट एक्ट में किए गए बदलाव के कारण प्रक्रिया लंबित है जिससे वे बेहद तनाव में हैं।केस- 2: हिमाचल निवासी संजना (बदला हुआ नाम) के विवाह को 10 वर्ष हो गए हैं लेकिन वह संतान सुख प्राप्त नहीं कर सकी है। तमाम जगह इलाज कराने के बाद संजना और उसके पति ने सेरोगेट मदर से संतान प्राप्त करने का निर्णय लिया है लेकिन वह भी पिछले 3 महीने से आईवीएफ सेंटरों के धक्के खा रहे हैं। सभी जगह से उन्हें यह जवाब मिल रहा है कि एक्ट में किए गए बदलाव के कारण फिलहाल यह प्रक्रिया बंद है। वहीं यह प्रक्रिया कब शुरू होगी उसके बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता।