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Chandigarh: करोड़ों के घोटाले में 12 साल बाद भी जांच पूरी नहीं, HC ने कहा-डीजीपी या तो जवाब दें या जुर्माना
Wed, 08 May 2024 11:57 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 08 May 2024 11:57 AM IST
सार
पटियाला निवासी संदीप गोयल ने एडवोकेट सन्नी कुमार सिंगला के माध्यम से अनाज घोटाले की हाईकोर्ट को जानकारी दी। याची ने बताया कि 2012 में एफसीआई की फिजिकल वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ था कि अनाज के 8 ट्रक जिन्हें कागजों में दिखाया गया था वे असल में मौजूद ही नहीं थे।
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के अधिकारियों और प्राइवेट मिलर की मिलीभगत से पनसब को करोड़ों रुपये की चपत के मामले में शिकायत के 12 साल बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। इस पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के डीजीपी को दो टूक कहा है कि अगली सुनवाई पर या जो जवाब लेकर आएं या जुर्माने की राशि।
याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी संदीप गोयल ने एडवोकेट सन्नी कुमार सिंगला के माध्यम से अनाज घोटाले की हाईकोर्ट को जानकारी दी। याची ने बताया कि 2012 में एफसीआई की फिजिकल वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ था कि अनाज के 8 ट्रक जिन्हें कागजों में दिखाया गया था वे असल में मौजूद ही नहीं थे।
बाद में पता चला कि इनके लिए जो प्रमाणपत्र जारी किए गए थे वे भी फर्जी थे। याची ने बताया कि मिलर ने एफसीआई के अधिकारियों के साथ मिलकर यह करोड़ों का घोटाला किया था जिससे पनसब को करोड़ों रुपये का चूना लगा था।
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इस मामले में पनसब ने 2012 में पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखते हुए इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और जांच का निवेदन किया था। सितंबर 2013 में डीजीपी को वित्तीय नुकसान के बारे में भी जानकारी दी गई थी। इस सब के बावजूद अभी तक इस मामले में जांच पूरी नहीं की जा सकी है। याची ने आरटीआई के माध्यम से पंजाब पुलिस से जांच के बारे में जानकारी मांगी तो बताया गया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है।
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याचिका दाखिल करते हुए पटियाला निवासी संदीप गोयल ने एडवोकेट सन्नी कुमार सिंगला के माध्यम से अनाज घोटाले की हाईकोर्ट को जानकारी दी। याची ने बताया कि 2012 में एफसीआई की फिजिकल वेरिफिकेशन में खुलासा हुआ था कि अनाज के 8 ट्रक जिन्हें कागजों में दिखाया गया था वे असल में मौजूद ही नहीं थे।
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बाद में पता चला कि इनके लिए जो प्रमाणपत्र जारी किए गए थे वे भी फर्जी थे। याची ने बताया कि मिलर ने एफसीआई के अधिकारियों के साथ मिलकर यह करोड़ों का घोटाला किया था जिससे पनसब को करोड़ों रुपये का चूना लगा था।
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इस मामले में पनसब ने 2012 में पंजाब के डीजीपी को पत्र लिखते हुए इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और जांच का निवेदन किया था। सितंबर 2013 में डीजीपी को वित्तीय नुकसान के बारे में भी जानकारी दी गई थी। इस सब के बावजूद अभी तक इस मामले में जांच पूरी नहीं की जा सकी है। याची ने आरटीआई के माध्यम से पंजाब पुलिस से जांच के बारे में जानकारी मांगी तो बताया गया कि अभी जांच पूरी नहीं हुई है।