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Punjab: अब सरकारी स्कूलों में बोर नहीं करेंगे गुरुजी, सिंगापुर से मिली ट्रेनिंग, बच्चों को होगा बड़ा फायदा
Sun, 12 Feb 2023 12:17 PM IST
निवेदिता वर्मा
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 12 Feb 2023 12:17 PM IST
सार
बैच में शामिल संगरूर से प्रिंसिपल हरजोत कौर ने कहा कि उन्होंने शिविर में दो बातें सीखीं- प्रोफिशिएंसी यानी प्रवीणता और एफिशिएंसी यानी क्षमता। अध्यापकों को पढ़ाते समय इन दोनों बातों का ध्यान रखना होगा।
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विस्तार
पंजाब के सरकारी स्कूलों में अब गुरुजी क्लास में विद्यार्थियों को बोर नहीं करेंगे। पंजाब के 34 प्रधानाचार्य जटिल और लंबे पाठ्यक्रम को आसानी से खेल-खेल में पूरा करने की तकनीक सीखकर सिंगापुर से लौट आए हैं। सूबे में सिंगापुर की पैराडाइम शिक्षण तकनीक को अपनाया जाएगा, जिसके तहत बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते ही शिक्षण के मानक तय किए गए हैं।
शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब के प्रधानाचार्यों ने प्रशिक्षण के दौरान अपने अनुभव साझा किए। एक प्रधानाचार्य ने कहा कि सिंगापुर के स्कूलों में पैराडाइम शिफ्ट तकनीक प्रचलित है। इसके तहत खेल-खेल में ही बच्चों को अकादमिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने बताया कि नई तकनीक के तहत बच्चों को पढ़ाना नहीं बल्कि सिखाने पर फोकस किया जाता है। साथ ही अध्यापक, विद्यार्थी और अभिभावकों के बीच एक भावनात्मक रिश्ता कायम किया जाता है। उन्होंने बताया कि सिंगापुर के शिक्षा निदेशक मानव स्वयं स्कूलों में जाकर अध्यापकों से संवाद करते हैं।
बैच में शामिल संगरूर से प्रिंसिपल हरजोत कौर ने कहा कि उन्होंने शिविर में दो बातें सीखीं- प्रोफिशिएंसी यानी प्रवीणता और एफिशिएंसी यानी क्षमता। अध्यापकों को पढ़ाते समय इन दोनों बातों का ध्यान रखना होगा। एक अन्य प्रधानाचार्य ने बताया कि शिविर में उन्हें ''टीच लेस-लर्न मोर'' यानी पढ़ाओ कम-सीखाओ ज्यादा की तकनीक समझाई गई। इसके अलावा शिक्षण एक ऐसा विषय जिसमें केवल अध्यापक और विद्यार्थी के बीच ही रिश्ता नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें सामाजिक सहभागिता को शामिल करना चाहिए।
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क्या है पैराडाइम तकनीक
पैराडाइम शिफ्ट यानी शिक्षा में प्रतिमान परिवर्तन। इस तकनीक में शिक्षा विद्यार्थी केंद्रित हो जाती है, जिसमें सब्जेक्ट किताबें नहीं बल्कि छात्र होता है। सीखने की क्षमता का सही उपयोग कर औसत विद्यार्थी भी इस तकनीक के सहारे बहुत जल्द पाठ्यक्रम को आत्मसात कर लेता है। इस तकनीक में न केवल विद्यार्थी सीखते हैं, बल्कि अध्यापक की भूमिका भी एक सह-छात्र के रूप में रहती है। इसके शिक्षण पद्धति के आठ सोपान हैं, जिनमें शिक्षार्थी स्वायत्तता, सहकारी शिक्षण, पाठ्यचर्या एकीकरण, अर्थ पर ध्यान केंद्रित करना, विविधता, सोच कौशल, वैकल्पिक मूल्यांकन और सह-शिक्षार्थियों के रूप में शिक्षक शामिल है।
विदेश में पंजाब के प्रिंसिपलों ने यह सीखा
-आनंदपूर्ण अधिगम (ज्वॉयफुल लर्निंग)
-विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच सामन्य समझ
-विषय नहीं शिक्षार्थी पर ध्यान
-बच्चों में राष्ट्रवाद की भावना
-विद्यार्थियों के प्रति दायित्व बोध
-विजन, मिशन एंड गोल
-सामाजिक सहभागिता
-परस्पर ज्ञान का प्रसार
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शनिवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब के प्रधानाचार्यों ने प्रशिक्षण के दौरान अपने अनुभव साझा किए। एक प्रधानाचार्य ने कहा कि सिंगापुर के स्कूलों में पैराडाइम शिफ्ट तकनीक प्रचलित है। इसके तहत खेल-खेल में ही बच्चों को अकादमिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने बताया कि नई तकनीक के तहत बच्चों को पढ़ाना नहीं बल्कि सिखाने पर फोकस किया जाता है। साथ ही अध्यापक, विद्यार्थी और अभिभावकों के बीच एक भावनात्मक रिश्ता कायम किया जाता है। उन्होंने बताया कि सिंगापुर के शिक्षा निदेशक मानव स्वयं स्कूलों में जाकर अध्यापकों से संवाद करते हैं।
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बैच में शामिल संगरूर से प्रिंसिपल हरजोत कौर ने कहा कि उन्होंने शिविर में दो बातें सीखीं- प्रोफिशिएंसी यानी प्रवीणता और एफिशिएंसी यानी क्षमता। अध्यापकों को पढ़ाते समय इन दोनों बातों का ध्यान रखना होगा। एक अन्य प्रधानाचार्य ने बताया कि शिविर में उन्हें ''टीच लेस-लर्न मोर'' यानी पढ़ाओ कम-सीखाओ ज्यादा की तकनीक समझाई गई। इसके अलावा शिक्षण एक ऐसा विषय जिसमें केवल अध्यापक और विद्यार्थी के बीच ही रिश्ता नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें सामाजिक सहभागिता को शामिल करना चाहिए।
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क्या है पैराडाइम तकनीक
पैराडाइम शिफ्ट यानी शिक्षा में प्रतिमान परिवर्तन। इस तकनीक में शिक्षा विद्यार्थी केंद्रित हो जाती है, जिसमें सब्जेक्ट किताबें नहीं बल्कि छात्र होता है। सीखने की क्षमता का सही उपयोग कर औसत विद्यार्थी भी इस तकनीक के सहारे बहुत जल्द पाठ्यक्रम को आत्मसात कर लेता है। इस तकनीक में न केवल विद्यार्थी सीखते हैं, बल्कि अध्यापक की भूमिका भी एक सह-छात्र के रूप में रहती है। इसके शिक्षण पद्धति के आठ सोपान हैं, जिनमें शिक्षार्थी स्वायत्तता, सहकारी शिक्षण, पाठ्यचर्या एकीकरण, अर्थ पर ध्यान केंद्रित करना, विविधता, सोच कौशल, वैकल्पिक मूल्यांकन और सह-शिक्षार्थियों के रूप में शिक्षक शामिल है।
विदेश में पंजाब के प्रिंसिपलों ने यह सीखा
-आनंदपूर्ण अधिगम (ज्वॉयफुल लर्निंग)
-विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच सामन्य समझ
-विषय नहीं शिक्षार्थी पर ध्यान
-बच्चों में राष्ट्रवाद की भावना
-विद्यार्थियों के प्रति दायित्व बोध
-विजन, मिशन एंड गोल
-सामाजिक सहभागिता
-परस्पर ज्ञान का प्रसार
पंजाब में शिक्षकों से नहीं लेंगे चुनावी काम, सिर्फ पढ़ाएंगे : मान
पंजाब में अब शिक्षकों से चुनाव सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्य नहीं करवाए जाएंगे। अध्यापक स्कूलों में केवल पढ़ाएंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को दिल्ली में सिंगापुर से लौटे पंजाब के प्रिंसिपलों के पहले बैच का स्वागत करते हुए यह एलान किया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अकसर अध्यापकों को चुनाव और जनगणना सहित अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है, जिससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यहां तक कि कोरोना काल में भी अध्यापकों को राज्य के बार्डर पर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में अध्यापकों से केवल शैक्षणिक कार्य करवाने के पक्षधर हैं। बहुत जरूरी न हो तो अध्यापकों की ड्यूटी ऐसे कार्यों में नहीं लगाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंजाब के शिक्षक सिंगापुर से शिक्षण के आधुनिक गुर सीख कर आए हैं, जबकि दिल्ली के अध्यापक 2015 से इस प्रणाली को अपना रहे हैं। आने वाले समय में दिल्ली और पंजाब के शिक्षकों के बीच संवाद करवाया जाएगा और शिक्षक आपस में जानकारी साझा कर सकेंगे। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि अगले माह प्रिंसिपलों का दूसरा बैच प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर भेजा जाएगा। इस मौके पर सिंगापुर से लौटे सभी 34 प्रिंसिपलों ने पांच दिवसीय शिविर में सीखी शिक्षा की नई तकनीक को साझा किया और इसे अपने स्कूलों में रूपांतरित करने के लिए अपनी वचनबद्धता को दोहराया। इस अवसर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, शिक्षा मंत्री दिल्ली मनीष सिसोदिया सहित दिल्ली और पंजाब शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
दिल्ली के बाद पंजाब बनेगा शिक्षा में नंबर 1 : केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने स्वास्थ्य और सड़कों में सुधार करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। दिल्ली के सरकारी स्कूल इसका उदाहरण हैं। इसके बाद अब पंजाब शिक्षा में नंबर 1 बनेगा। केजरीवाल ने कहा कि समय आएगा कि विदेशों से शिक्षक दिल्ली और पंजाब में प्रशिक्षण लेने आएंगे। कहा कि कुछ लोग उनकी इस पहल पर आपत्ति उठाते हैं। अगर सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं तो क्या उन स्कूलों के अध्यापकों को श्रेष्ठ प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं? उन्होंने प्रिंसिपलों से आह्वान किया कि कसम खाएं कि बच्चों को ऐसी शिक्षा देंगे कि पंजाब का कोई युवा रोजगार की तलाश में विदेश नहीं जाएगा।
पंजाब में अब शिक्षकों से चुनाव सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्य नहीं करवाए जाएंगे। अध्यापक स्कूलों में केवल पढ़ाएंगे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को दिल्ली में सिंगापुर से लौटे पंजाब के प्रिंसिपलों के पहले बैच का स्वागत करते हुए यह एलान किया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि अकसर अध्यापकों को चुनाव और जनगणना सहित अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है, जिससे स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। यहां तक कि कोरोना काल में भी अध्यापकों को राज्य के बार्डर पर भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि हम पंजाब में अध्यापकों से केवल शैक्षणिक कार्य करवाने के पक्षधर हैं। बहुत जरूरी न हो तो अध्यापकों की ड्यूटी ऐसे कार्यों में नहीं लगाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि पंजाब के शिक्षक सिंगापुर से शिक्षण के आधुनिक गुर सीख कर आए हैं, जबकि दिल्ली के अध्यापक 2015 से इस प्रणाली को अपना रहे हैं। आने वाले समय में दिल्ली और पंजाब के शिक्षकों के बीच संवाद करवाया जाएगा और शिक्षक आपस में जानकारी साझा कर सकेंगे। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने कहा कि अगले माह प्रिंसिपलों का दूसरा बैच प्रशिक्षण के लिए सिंगापुर भेजा जाएगा। इस मौके पर सिंगापुर से लौटे सभी 34 प्रिंसिपलों ने पांच दिवसीय शिविर में सीखी शिक्षा की नई तकनीक को साझा किया और इसे अपने स्कूलों में रूपांतरित करने के लिए अपनी वचनबद्धता को दोहराया। इस अवसर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, शिक्षा मंत्री दिल्ली मनीष सिसोदिया सहित दिल्ली और पंजाब शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
दिल्ली के बाद पंजाब बनेगा शिक्षा में नंबर 1 : केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने स्वास्थ्य और सड़कों में सुधार करने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में काम किया। दिल्ली के सरकारी स्कूल इसका उदाहरण हैं। इसके बाद अब पंजाब शिक्षा में नंबर 1 बनेगा। केजरीवाल ने कहा कि समय आएगा कि विदेशों से शिक्षक दिल्ली और पंजाब में प्रशिक्षण लेने आएंगे। कहा कि कुछ लोग उनकी इस पहल पर आपत्ति उठाते हैं। अगर सरकारी स्कूलों में गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं तो क्या उन स्कूलों के अध्यापकों को श्रेष्ठ प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं? उन्होंने प्रिंसिपलों से आह्वान किया कि कसम खाएं कि बच्चों को ऐसी शिक्षा देंगे कि पंजाब का कोई युवा रोजगार की तलाश में विदेश नहीं जाएगा।