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पेपरों की जालसाजी रोकेगी पीयू के असिस्टेंट प्रोफेसर विशाल की ये स्टडी
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 08 Aug 2016 09:31 AM IST
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dr vishal sharma
- फोटो : file photo
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अब दस्तावेजों में हेराफेरी करना आसान नहीं होगा, साथ ही फोरेंसिक केसों के निपटारे में भी मदद मिलेगी। पंजाब यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेसिंक साइंस एंड क्रिमिनोलॉजी में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर विशाल शर्मा ने दस्तावेजों की जालसाजी रोकने का नायाब तरीका खोज निकाला है।
डा. विशाल ने जो तरीका अपनाया है उसमें जांच के बाद रिपोर्ट बताती है कि पेपर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए 99.93 प्रतिशत तक फर्क रहता है। यह अभी तक किसी भी ग्रुप द्वारा की गई स्टडी का सर्वोत्तम परिणाम है।
डा. विशाल ने बताया कि सिडनी की यूनिवर्सिटी ने जो स्टडी की थी उसमें डिस्क्रिप्टिव पॉवर 67.86 प्रतिशत तक थी। जो काफी कम था। डा. विशाल की यह स्टडी इंग्लेंड के मॉलिक्यूलर और बायोमॉलिक्यूलर स्पेक्ट्रोस्कॉपी जनरल में प्रकाशित हुई है।
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पेपरों को मोड़कर पता किया उसका स्पेक्ट्रम
डा. विशाल ने अपनी स्टडी में फॉरेसिंक मामलों में अपनाई जाने वाली पेपर को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली तकनीक का ही इस्तेमाल किया। डा. विशाल ने बताया कि इस मेथड में दस्तावेजों के एक सेट में से किन्हीं दो पेजों को मोड़कर उन पर एटीआर-एफटीआईआर रेडिएशंस डाली। फिर उसको स्पेक्ट्रम दर्ज कर लिया गया। बाद में पूरे सेट के अंदर कोई बदलाव होने पर इसी स्टडी के माध्यम से स्पेक्ट्रम में आया अंतर पता चल जाता है।
जिससे हेराफेरी का तुरंत पता चल जाता है। पेपर सैंपल की विशेषता के लिए कीमोमेट्रिक मेथड का इस्तेमाल किया। डा. विशाल ने बताया कि पेपर का एक छोटा सा हिस्सा फाड़कर भी यह स्टडी की गई लेकिन उसके परिणाम इतने बेहतर नहीं आए। डा. विशाल ने बताया कि उन्होंने इस स्टडी के साथ पेपर के अंदर पाए जाने वाले तत्वों का पता भी लगा लिया है। जिससे आगे रिसर्च में फायदा मिलेगा।
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डा. विशाल ने जो तरीका अपनाया है उसमें जांच के बाद रिपोर्ट बताती है कि पेपर को बिना कोई नुकसान पहुंचाए 99.93 प्रतिशत तक फर्क रहता है। यह अभी तक किसी भी ग्रुप द्वारा की गई स्टडी का सर्वोत्तम परिणाम है।
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डा. विशाल ने बताया कि सिडनी की यूनिवर्सिटी ने जो स्टडी की थी उसमें डिस्क्रिप्टिव पॉवर 67.86 प्रतिशत तक थी। जो काफी कम था। डा. विशाल की यह स्टडी इंग्लेंड के मॉलिक्यूलर और बायोमॉलिक्यूलर स्पेक्ट्रोस्कॉपी जनरल में प्रकाशित हुई है।
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पेपरों को मोड़कर पता किया उसका स्पेक्ट्रम
डा. विशाल ने अपनी स्टडी में फॉरेसिंक मामलों में अपनाई जाने वाली पेपर को नुकसान नहीं पहुंचाने वाली तकनीक का ही इस्तेमाल किया। डा. विशाल ने बताया कि इस मेथड में दस्तावेजों के एक सेट में से किन्हीं दो पेजों को मोड़कर उन पर एटीआर-एफटीआईआर रेडिएशंस डाली। फिर उसको स्पेक्ट्रम दर्ज कर लिया गया। बाद में पूरे सेट के अंदर कोई बदलाव होने पर इसी स्टडी के माध्यम से स्पेक्ट्रम में आया अंतर पता चल जाता है।
जिससे हेराफेरी का तुरंत पता चल जाता है। पेपर सैंपल की विशेषता के लिए कीमोमेट्रिक मेथड का इस्तेमाल किया। डा. विशाल ने बताया कि पेपर का एक छोटा सा हिस्सा फाड़कर भी यह स्टडी की गई लेकिन उसके परिणाम इतने बेहतर नहीं आए। डा. विशाल ने बताया कि उन्होंने इस स्टडी के साथ पेपर के अंदर पाए जाने वाले तत्वों का पता भी लगा लिया है। जिससे आगे रिसर्च में फायदा मिलेगा।