पेक पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद: कहा- ज्ञान का नेटवर्क ही देश को विकास की ओर ले जाएगा, इनोवेशन, रिसर्च व डेवलपमेंट जरूरी
मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के शताब्दी समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे। उन्होंने कहा कि पेक के पूर्व छात्र कामयाबी के शिखर पर हैं। यहां के साथ अन्य शिक्षण संस्थानों को आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इनोवेशन, रिसर्च व डेवलपमेंट जरूरी है।
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विद्यार्थियों के ज्ञान का एक नेटवर्क बनाने की आवश्यकता है। यही नेटवर्क देश को विकास की ओर ले जाएगा। यह बात मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में कही। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को आगे ले जाने के लिए इनोवेशन, रिसर्च व डेवलपमेंट जरूरी है। देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपतियों को इसे बढ़ावा देना चाहिए।
पेक ग्राउंड में बने भव्य पंडाल में 15 मिनट के अपने भाषण में महामहिम ने कहा कि पेक के पूर्व छात्र जीवन के अपने चुने हुए क्षेत्रों में बहुत अच्छी तरह स्थापित हैं और उनकी पहुंच दूर-दूर तक है। उनके परामर्श और अनुभव का लाभ यहां के विद्यार्थी भी उठा रहे हैं। इस मेंटरशिप को देश के अन्य विश्वविद्यालयों तक बढ़ाया जाना चाहिए।
कहा कि पिछले सप्ताह राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों का एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें सभी राज्यपाल, उपराज्यपाल और प्रशासक पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के नाते उन्हें नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए और अनुसंधान व विकास को प्रोत्साहित करना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि वह पेक के पूर्व छात्रों से भी इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा करते हैं। उम्मीद है कि वे अन्य शिक्षण संस्थानों को भी आगे ले जाने में मदद करेंगे।
अध्यात्म है, विज्ञान भी, संस्कार है, नवज्ञान भी...
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वह पेक के शताब्दी समारोह में मौजूद हैं। यहां देश के सभी हिस्सों से छात्र आकर पढ़ते हैं, जो इसे विविधता में एकता का एक आदर्श उदाहरण है। यदि कोई संस्थान इतने बड़े स्तर पर छात्रों के लिए एकीकृत हो सकता है तो मुझे यकीन है कि आप सभी का मार्गदर्शन निश्चित रूप से हमारे देश के लिए एकता का कारक बनेगा।
हमने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम के आदर्श का पालन किया है। पूरी दुनिया एक परिवार है। यह जरूरी है कि हमारे देश के विभिन्न संस्थान और विश्वविद्यालय इस सिद्धांत का पालन करें। हमें अपने देश की अधिक प्रगति के लिए एक साथ काम करने और अपने देश के सभी छात्रों के लाभ के लिए एक ज्ञान नेटवर्क बनाने की जरूरत है। अपने शब्दों को कविता के रूप में पेश करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘अध्यात्म है, विज्ञान भी, संस्कार है, नवज्ञान भी, कल्पना है, रचना भी, परिश्रमी है, प्रवीण भी, लक्ष्य है राष्ट्र निर्माण की ओर।’
पंजाब ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
राष्ट्रपति ने कहा, पंजाब ने हमेशा देश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सिंधु घाटी सभ्यता के केंद्र के रूप में हो या वैदिक काल के सप्त सिंधु क्षेत्र के रूप में, पंजाब ने अनादि काल से एक पहचान बनाई है। देश का एक सीमावर्ती राज्य होने के नाते यह बाहरी प्रभावों के कारण सामाजिक-राजनीतिक मंथन को महसूस करने वाले पहले राज्यों में से एक रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का एक प्रमुख प्रतीक रहा है। आध्यात्मिक परंपराएं हों या आधुनिक तकनीक, इस भूमि की उपलब्धियां देश का गौरव हैं।
राष्ट्रपति ने सेंटेनरी हॉल समेत पेक की चार परियोजनाओं का किया उद्घाटन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) के नवनिर्मित सेंटेनरी हॉल समेत चार परियोजनाओं का उद्घाटन शाम साढ़े चार बजे किया। इस दौरान पेक के निदेशक प्रो. बलदेव सेतिया ने हॉल की खासियतें बताईं। महामहिम ने सेंटेनरी हॉल के अलावा सेंटेनरी हॉस्टल ब्लॉक, सेमी कंडक्टर रिसर्च सेंटर और सेंटेनरी गेट का उद्घाटन किया। साथ ही पेक के शताब्दी वर्ष पर विशेष डाक टिकट भी जारी किया।
इससे पूर्व पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित, हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, यूटी प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। हॉल के उद्घाटन के समय से आधे घंटे पहले वीआईपी अतिथियों को छोड़कर अन्य लोगों के लिए गेट नंबर दो बंद कर दिया गया था।
पेक में सबसे पहले वीआईपी अतिथियों में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय पहुंचे। उनके 15 मिनट बाद यूटी के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित और शाम साढ़े चार बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पहुंचे। पूरे कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने पेक की खूब तारीफ की। यहां के अधिकारियों की भी सराहना की। पेक निदेशक प्रो. बलदेव सेतिया से कहा कि वह बेहतरीन कार्य कर संस्थान को और आगे ले जाएं।