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Haryana: कुरुक्षेत्र में पूर्वजों को यादकर भावुक हुईं राष्ट्रपति, आंखें हुईं नम, विधि-विधान से की पूजा
Wed, 30 Nov 2022 01:08 AM IST
ajay kumar
सुनील धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
सुनील धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 30 Nov 2022 01:08 AM IST
सार
ब्रह्मसरोवर पूजन के बाद राष्ट्रपति ने श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ के नजदीक चल रहे गीता यज्ञ में भी पूर्णाहुति डाली। राष्ट्रपति पुरुषोत्तमपुरा बाग में करीब 12 मिनट तक रहीं और उसके बाद आगामी कार्यक्रम की ओर बढ़ गईं।
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भावुक हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
पहली बार हरियाणा के कुरुक्षेत्र धर्मनगरी की धरा पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूरी आत्मीयता और श्रद्धा भाव के साथ ब्रह्मसरोवर तीर्थ पूजन किया। इसके उपरांत सीएम मनोहर लाल और पुजारी पंडित बलराम गौतम ने उनको ब्रह्मसरोवर की महत्ता से अवगत कराया। इससे अभिभूत राष्ट्रपति तीर्थ पूजन के दौरान पूर्वजों के मोक्ष की कामना करते हुए सूर्य को अर्घ्य देते समय भावुक हो गईं और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने काफिले के साथ सुबह 11:45 बजे ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग पहुंचीं। यहां पर एक मिनट के बाद ही उन्होंने मंत्रोच्चार के बीच पूरे विधि-विधान से ब्रह्मसरोवर पर पूजन किया। पूजा कराने वाले पंडित बलराम गौतम ने बताया कि जैसे उन्होंने पितृ मोक्ष मंत्र का जाप करते हुए राष्ट्रपति को पूर्वजों का ध्यान करके उनके मोक्ष की कामना के लिए कहा तो उनकी आंखें नम हो गईं, मगर इसके बाद राष्ट्रपति ने खुद को संभाला और चश्मा उतारकर आंखों को साफ किया। फिर ब्रह्मसरोवर की महत्ता जानकर राष्ट्रपति ने तीर्थ को हाथ जोड़कर प्रणाम किया।
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उनके साथ हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय, सीएम मनोहर लाल और स्वामी ज्ञानानंद मौजूद रहे। ब्रह्मसरोवर पूजन के बाद राष्ट्रपति ने श्रीकृष्ण-अर्जुन रथ के नजदीक चल रहे गीता यज्ञ में भी पूर्णाहुति डाली। राष्ट्रपति पुरुषोत्तमपुरा बाग में करीब 12 मिनट तक रहीं और उसके बाद आगामी कार्यक्रम की ओर बढ़ गईं।
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राष्ट्रपति को सीएम ने बताई ब्रह्मसरोवर की महत्ता
सीएम मनोहर लाल ने भी राष्ट्रपति को ब्रह्मसरोवर की महत्ता से अवगत कराया। सीएम ने उनको बताया कि ब्रह्मसरोवर पर सूर्यग्रहण का मेला लगता है, जिसमें विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु भी पहुंचते हैं। वहीं प्रत्येक अमावस पर भी लोग पूजा-अर्चना करने यहां पहुंचते हैं। वहीं पंडित बलराम गौतम ने बताया कि ब्रह्मसरोवर को आदि तीर्थ का दर्जा प्राप्त है।