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आलोक वर्मा जल्द ही राफेल डील घोटाले की जांच शुरू कराने वाले थे, इसलिए हटाए गएः प्रशांत भूषण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 28 Oct 2018 03:15 PM IST
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प्रशांत भूषण
- फोटो : फाइल फोटो
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सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को पद से हटाकर जबरन छुट्टी पर भेजना केंद्र सरकार के षड्यंत्र का नतीजा है। उन्होंने कहा कि आलोक वर्मा जल्द ही राफेल डील घोटाले की प्रारंभिक जांच शुरू कराने वाले थे, इसलिए केंद्र सरकार में हड़कंप मचा हुआ था। लिहाजा उन्हें जबरन लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया।
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एडवोकेट प्रशांत भूषण चंडीगढ़ में मीडिया से मुखातिब हुए। उन्होंने बताया कि 4 अक्तूबर को वे और अरुण शौरी सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से मिले थे। उन्होंने 46 दस्तावेज के साथ उन्हें राफेल डील की एक शिकायत सौंपी थी। उनसे मुलाकात के बाद निदेशक आलोक वर्मा ने उन्हें शिकायत पर उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया था। इसके बाद से केंद्र सरकार में जबरदस्त हलचल का माहौल था। इसके बाद आनन-फानन में आधी रात आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजने के आदेश जारी कर दिए गए और एक चहेते अफसर को सीबीआई का कार्यभार सौंप दिया गया।
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प्रशांत भूषण (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल कर दी है और जल्द इस पर सुनवाई की उम्मीद है। उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप जड़ते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के दौरान उन्होंने जो सबूत एकत्रित किए हैं, इससे जाहिर होता है कि किस तरह से केंद्र सरकार में अपने पद का प्रयोग कर लोगों ने राफेल डील में रिलायंस को फायदा पहुंचाने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि अभी तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे इस मामले में ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट के नाम करीबन 21 हजार करोड़ कमीशन का गड़बड़झाला सामने आ रहा है। प्रेसवार्ता में प्रशांत भूषण ने ये बताया कि किस तरह से राफेल डील की शुरुआत से लेकर ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट देने तक गड़बड़ी हुई। प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका में उन्होंने राफेल डील की मांग सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष एसआईटी से करवाने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अभी तक जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे इस मामले में ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट के नाम करीबन 21 हजार करोड़ कमीशन का गड़बड़झाला सामने आ रहा है। प्रेसवार्ता में प्रशांत भूषण ने ये बताया कि किस तरह से राफेल डील की शुरुआत से लेकर ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट देने तक गड़बड़ी हुई। प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका में उन्होंने राफेल डील की मांग सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष एसआईटी से करवाने की मांग की है।