Punjab Budget 2022: पंजाब में 300 यूनिट मुफ्त बिजली का एलान, पावरकॉम पर पड़ेगा 4000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
बड़ी त्रासदी यह है कि पावरकॉम को चपत लगाने में सरकारी विभाग भी पीछे नहीं हैं। विभिन्न सरकारी विभागों पर पावरकॉम का 2366 करोड़ रुपये का बकाया है। बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद विभागों अपना बिल अदा नहीं कर रहे हैं।
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पंजाब सरकार ने सोमवार को पेश बजट में अपने चुनावी वादे को पूरा किया और उपभोक्ता को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर दी लेकिन यह फैसला पावरकॉम की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा सकता है। पंजाब सरकार पर पहले ही पावरकॉम की 9000 करोड़ रुपये की सब्सिडी लंबित है। वर्तमान में पावरकॉम पर 18000 करोड़ का बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्ज है। ऊपर से हर उपभोक्ता को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने से पावरकॉम पर अतिरिक्त 4000 करोड़ रुपये का सालाना आर्थिक बोझ पड़ेगा। अगर आगे भी सरकार ने समय पर सब्सिडी राशि का भुगतान नहीं किया तो हजारों करोड़ के कर्ज के बोझ में दबे पावरकॉम को तनख्वाह और पेंशन देना मुश्किल हो जाएगा।
सबसे अहम बिजली सिस्टम की संभाल, नवीनीकरण व मरम्मत का काम बड़े स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है। गौरतलब है कि लंबित 9000 करोड़ की सब्सिडी राशि में किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली सुविधा के अलावा उद्योगों को सस्ती बिजली और एससी/बीसी व स्वतंत्रता सैनानियों को मिलने वाली रियायतों का बकाया शामिल है।
सरकारी विभाग भी चपत लगाने में पीछे नहीं, 2366 करोड़ के बिजली बिल लंबित
बड़ी त्रासदी यह है कि पावरकॉम को चपत लगाने में सरकारी विभाग भी पीछे नहीं हैं। विभिन्न सरकारी विभागों पर पावरकॉम का 2366 करोड़ रुपये का बकाया है। बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद विभागों अपना बिल अदा नहीं कर रहे हैं। इनमें जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग एक बड़ा डिफाल्टर है। इस पर 1095 करोड़ का बिजली बिल बकाया है। इसके अलावा स्थानीय निकाय विभाग पर 718 करोड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 264 करोड़, सेहत एवं परिवार कल्याण विभाग पर 100 करोड़, सीवरेज बोर्ड पर 73 करोड़, सिंचाई विभाग पर 34 करोड़ का बकाया है।
इन स्थितियों में पावरकॉम को अपने खर्च पूरा करने के लिए बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं से कर्ज लेना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक पावरकॉम पर इस समय 18000 करोड़ का बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्ज चढ़ा है। इस कर्जे पर पावरकॉम को सालाना 1500 करोड़ का अकेले ब्याज ही अदा करना पड़ रहा है। ऐसे में अब पंजाब सरकार ने बजट में भले ही हरेक खपतकार के लिए 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा करके लोगों को खुश कर दिया हो लेकिन इससे पावरकॉम की आर्थिक मुश्किलें बढ़ेंगी। माहिरों के मुताबिक प्रत्येक खपतकार को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने से पावरकॉम पर सालाना अतिरिक्त 4000 करोड़ का आर्थिक बोझ पड़ेगा।
एडवांस में हो सब्सिडी का भुगतान: इंजीनियर्स एसोसिएशन
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के मुताबिक पावरकॉम को सरकार की तरफ से किसी भी वर्ग को सब्सिडी देने पर कोई एतराज नहीं है। बशर्ते सब्सिडी का भुगतान समय पर हो लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है। सरकार को चाहिए कि पावरकॉम की आर्थिक मुश्किलों को देखते हुए सब्सिडी राशि का एडवांस में भुगतान किया जाए। सरकार लंबित 9000 करोड़ की सब्सिडी का भी भुगतान करे। बजट में इस संबंधी सरकार ने कुछ नहीं कहा और न ही बजट में कोई प्रावधान किया। आगे कहा कि अगर सरकार ने ऐसा न किया तो फिर पावरकॉम को सैलरी दे पाना मुश्किल हो जाएगा।
मालवा की सबसे बड़ी पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी को निराश कर गया बजट
मालवा क्षेत्र की सबसे बड़ी पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी को पंजाब सरकार का बजट निराश कर गया। पीयू के मुलाजिमों, अध्यापकों व यहां के विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि पूर्व चन्नी सरकार की ओर से लिए फैसले के मुताबिक यूनिवर्सिटी की मंथली ग्रांट 20 करोड़ की जाएगी और साथ ही पीयू पर चढ़े 150 करोड़ के कर्जे को सरकार टेकओवर करेगी, लेकिन बजट में इस संबंधी कोई एलान नहीं किया गया। इससे सभी वर्गों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। बजट में सरकार ने पंजाबी यूनिवर्सिटी के लिए 200 करोड़ की ग्रांट का एलान किया है, जो पिछले बजट में घोषित ग्रांट से भी सात करोड़ कम है। इससे आप सरकार के पंजाब में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने के दावों की पोल खुलती है।पंजाबी यूनिवर्सिटी अध्यापक संघ (पुटा) के सचिव सुखजिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार के बजट ने बेहद निराश किया है। बजट में पीयू के लिए केवल 200 करोड़ की ग्रांट का एलान किया गया है। इसमें 12.50 करोड़ की मंथली ग्रांट के हिसाब से 150 करोड़ दिए हैं और 50 करोड़ अन्य देनदारियों के लिए दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में पीयू को 207 करोड़ और 2020-21 के बजट में यूनिवर्सिटी को 214 करोड़ की ग्रांट दी गई थी। इससे पंजाब की आप सरकार के उच्च शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के दावे हवा साबित हो गए हैं। मान सरकार को चाहिए था कि पूर्व की चन्नी सरकार की ओर से लिए फैसलों को लागू करती और पीयू पर चढ़े 150 करोड़ के लोन को टेकओवर किया जाता। साथ ही मंथली ग्रांट साढ़े 9 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ की जाती, लेकिन बजट में इस तरह का कुछ नहीं कहा गया। इससे पंजाबी यूनिवर्सिटी के हरेक वर्ग की बजट को लेकर उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
पुटा के पूर्व प्रधान निशान सिंह दियोल ने कहा कि जरूरत पड़ी, तो जल्द ही बैठक करके सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ने के कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की जाएगी। पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी मालवा क्षेत्र के 10 जिलों के विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करती है। ऐसे में इस यूनिवर्सिटी के अस्तित्व को बचाने के लिए पंजाब की आप सरकार को 300 करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए थी, ऐसा न होने से बहुत निराशा हुई है।
वहीं इस संबंधी पीयू के वीसी प्रोफेसर अरविंद ने कहा कि अगर सरकार ने कुल 200 करोड़ की ही ग्रांट यूनिवर्सिटी के लिए घोषित की है, तो यह बहुत कम है। वीसी ने कहा कि यूनिवर्सिटी की मांग थी कि 20 करोड़ की मंथली ग्रांट मिले और 150 करोड़ के कर्जे से मुक्ति मिले। ऐसा न होने से पीयू की आर्थिक मुश्किलें बनी रहेंगी।