किसानों के समर्थन में हरियाणा में बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन, पंजाब के कर्मचारी संगठन भी मैदान में
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कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन की एकजुटता में बुधवार को बिजली कर्मचारियों ने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन किए। सब डिवीजन स्तर पर प्रदर्शन में नए कृषि कानूनों के साथ बिजली संशोधन बिल 2020 को वापस लेने की मांग की गई। किसान आंदोलन का तन-मन-धन से समर्थन करने का फैसला बिजली कर्मचारियों ने लिया।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा से संबंधित आल हरियाणा पावर कारपोरेशन वर्कर यूनियन के चेयरमैन देवेंद्र हुड्डा, प्रधान सुरेश राठी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव नरेश कुमार ने बताया कि प्रदर्शनों में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर आंदोलनरत किसानों पर दर्ज मुकदमे और तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की गई। तीन दिसंबर को सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर प्रदेशभर में प्रदर्शन किए जाएंगे, जिसमें बिजली कर्मचारी भी शामिल होंगे।
सकसं के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि देश के किसानों ने बिजली संशोधन बिल 2020 के खतरों को भांपकर तीन कृषि कानूनों के साथ ही इस बिल का विरोध करने का फैसला सराहनीय है। अभी यह बिल संसद में पारित होना है। इससे पहले ही केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ सहित केंद्र शासित प्रदेशों में इसे लागू करना शुरू कर दिया है। बिजली संशोधन बिल 2020 के प्रावधानों के अनुसार किसानों को मिलने वाली सब्सिडी समाप्त हो जाएगी और बिजली वितरण प्रणाली को निजी घरानों को सौंप दिया जाएगा।
किसानों के पक्ष में उतरे पंजाब के कर्मचारी संगठन
पंजाब के सरकारी कर्मचारी संगठनों ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए बुधवार को पंजाब सिविल सचिवालय में दोपहर को एक रैली निकाली। इसमें कर्मचारियों ने किसानों के आंदोलन में हिस्सा लेने का प्रस्ताव पारित किया। इसी कड़ी में पंजाब सिविल सचिवालय निजी स्टाफ एसोसिएशन की ओर से 5000 रुपये, पंजाब सिविल सचिवालय ऑफिसर्स एसोसिएशन की ओर से 5000 रुपये का योगदान देते हुए किसानों के समर्थन का एलान किया गया।
पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन और वित्त एवं योजना भवन के कर्मचारियों के संगठन ने भी 5000-5000 रुपये का योगदान देने का एलान किया। इसके साथ ही कर्मचारियों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि वे दिल्ली में किसानों के संघर्ष में जाकर पानी, दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं किसानों को मुहैया कराएंगे।
कर्मचारी नेताओं ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के किसान आंदोलन को खालिस्तान से जोड़ने संबंधी बयान की कड़ी निंदा की है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन देश के हर किसान और आम नागरिक का है और इसे किसी धर्म से जोड़कर लोगों के दिलों में जहर घोलने की कोशिश न की जाए। इस मौके पर एसोसिएशन के प्रधान सुखचैन सिंह खैरा ने पंजाब सिविल सचिवालय स्टाफ एसोसिएशन का नए सिरे के गठन करने के लिए कर्मचारियों से विकल्प मांगे गए।