चंडीगढ़ः जिंदा नवजात को भेजा था पोस्टमार्टम के लिए, 13 दिन बाद भी नहीं भेजी जांच रिपोर्ट
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पीजीआई में जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के मामले में 13 दिन गुजरने के बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है जबकि पीजीआई प्रशासन ने मामला संज्ञान में आते ही दो जनवरी को पांच सदस्यीय जांच कमेटी बना दी थी।
डीन एकेडमी प्रो. राजवंशी की निगरानी में बनी इस कमेटी में गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी प्रो. वनीता सूरी, नियोनेटोलॉजी डिपार्टमेंट के डॉ. प्रवीन, फोरेंसिक डिपार्टमेंट के वाइके बंसल और एक सीनियर एडमिनिस्ट्रेशन ऑफिसर को शामिल किया गया है। डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रत्येक पक्ष की जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था लेकिन 13 दिन बाद भी स्थिति जस की तस है।
सूत्रों के अनुसार, जांच कमेटी ने पोस्टमार्टम हाउस के सभी कर्मचारियों का अलग-अलग बयान ले लिया है। इस संबंध में गाइनेकोलॉजी और पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के डॉक्टरों का भी पक्ष लिया जा चुका है। साथ ही नवजात के 26 दिसंबर की सुबह 11 बजे पहली बार पोस्टमार्टम हाउस में जाने और फिर वापस ले जाने का सीसीटीवी फुटेज भी चेक किया गया है। वहीं उसके वार्ड में जाने और फिर वहां लगभग 12 घंटे बाद उसकी मौत होने पर दोबारा पोस्टमार्टम हाउस लाने का भी फुटेज देखा गया है।
ये है मामला
पीजीआई में बीते 26 दिसंबर को हाईकोर्ट के आदेश पर 24 हफ्ते की गर्भवती महिला का गर्भपात किया गया। महिला की सर्जरी कर जब बच्चे को निकाला गया तब वह जिंदा था। बड़ी लापरवाही बरतते हुए डाक्टरों ने जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया।
पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने जिंदा नवजात देखकर उसे वापस वार्ड में भेजे जाने की बात कही लेकिन उनकी बात को दरकिनार कर उन्हें नवजात के मरने तक इंतजार करने को कहा गया। इस पर पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने विरोध कर दिया, उनका विरोध देखकर नवजात को वापस वार्ड में शिफ्ट किया गया। जहां 12 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसे दोबारा पोस्टमार्टम भेजा गया।
मामला गंभीर है, उसमें हर पक्ष की बारीकी से जांच करने के बाद ही रिपोर्ट सौंपी जाएगी इसलिए थोड़ा वक्त लग रहा है। - प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता