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भारतीय सेना के हुनर को सलाम, तीन घंटे में तैयार कर देती है 300 मीटर लंबा पुल, जानिए कैसे
Mon, 02 Dec 2019 04:35 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 04:35 PM IST
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indian army bridge
- फोटो : अमर उजाला
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तीन घंटे में नदी पर 300 मीटर का पुल तैयार हो जाता है। यह सुनकर थोड़ी हैरानी जरूर होती है, लेकिन यह सच है। ऐसे ही एक पुल का राजिंदरा पार्क में आयोजित मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के दौरान भारतीय सेना ने प्रदर्शन किया। फेस्ट में यह लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध के बाद 1973 में इस पोर्टेबल पीएमएस ब्रिज को भारतीय आर्मी में शामिल किया गया। पुलों की यह खेप रसिया से विशेष विमान के जरिए भारत मंगाई गई थी। आर्मी से मिली जानकारी के अनुसार इस पुल को किसी भी नदी पर बनाने में हुनरमंद सेना के जवानों को सिर्फ 3 घंटे का समय ही लगता है।
300 मीटर लंबे इस पुल की वहन क्षमता भी बेहद चौंकाने वाली है। इस पोटेबल पुल पर 90 टन का भार ढोया जा सकता है। इस पुल के जरिए भारी टैंकों के साथ ही हथियारों की बड़ी खेप भी नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर आसानी से भेजी जा सकती है, जो युद्ध को निर्णायक स्थिति में भी पहुंचा सकती है।
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अब भारत में ही हो रहा पीएमएस ब्रिज का निर्माण
अपनी विशेषता के कारण यह पीएमएस ब्रिज अब भारत में ही बनाया जा रहा है। चेन्नई में इस पोर्टेबल ब्रिज का निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त प्रयागराज (इलाहाबाद) में इस पुल को लाने और ले जाने में प्रयोग होने वाले ट्रक का निर्माण हो रहा है।
परमाणु हमले में अहम भूमिका निभाएगा आईपीई
मिलिट्री फेस्ट में प्रदर्शित किया जाने वाला आईपीई सूट परमाणु हमले में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही कैमिकल और बायोलॉजिकल हमले में भी इस सूट के जरिए भारतीय सेना बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। जवान इस सूट के जरिए सुरक्षित रहते हुए देश की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध के बाद 1973 में इस पोर्टेबल पीएमएस ब्रिज को भारतीय आर्मी में शामिल किया गया। पुलों की यह खेप रसिया से विशेष विमान के जरिए भारत मंगाई गई थी। आर्मी से मिली जानकारी के अनुसार इस पुल को किसी भी नदी पर बनाने में हुनरमंद सेना के जवानों को सिर्फ 3 घंटे का समय ही लगता है।
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300 मीटर लंबे इस पुल की वहन क्षमता भी बेहद चौंकाने वाली है। इस पोटेबल पुल पर 90 टन का भार ढोया जा सकता है। इस पुल के जरिए भारी टैंकों के साथ ही हथियारों की बड़ी खेप भी नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे पर आसानी से भेजी जा सकती है, जो युद्ध को निर्णायक स्थिति में भी पहुंचा सकती है।
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अब भारत में ही हो रहा पीएमएस ब्रिज का निर्माण
अपनी विशेषता के कारण यह पीएमएस ब्रिज अब भारत में ही बनाया जा रहा है। चेन्नई में इस पोर्टेबल ब्रिज का निर्माण हो रहा है। इसके अतिरिक्त प्रयागराज (इलाहाबाद) में इस पुल को लाने और ले जाने में प्रयोग होने वाले ट्रक का निर्माण हो रहा है।
परमाणु हमले में अहम भूमिका निभाएगा आईपीई
मिलिट्री फेस्ट में प्रदर्शित किया जाने वाला आईपीई सूट परमाणु हमले में अहम भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही कैमिकल और बायोलॉजिकल हमले में भी इस सूट के जरिए भारतीय सेना बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। जवान इस सूट के जरिए सुरक्षित रहते हुए देश की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।