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प्रदूषण ने बदली प्रवृत्ति, औद्योगिक क्षेत्र में कम, रिहायशी इलाके में बढ़ रहा

Sun, 05 Jul 2020 01:44 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 05 Jul 2020 01:44 PM IST
सार

  • पीयू व पंजाब की एक स्टडी में दावा, पहली बार प्रदूषण के 25 साल के डाटा का आकलन
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा चंडीगढ़ में बढ़ी, इससे सांस की बीमारी का खतरा ज्यादा

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Pollution increasing in residential area, Less in industrial area
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ में प्रदूषण के स्वरूप में बदलाव देखने को मिला है। चंडीगढ़ के औद्योगिक व व्यवसायिक क्षेत्र में प्रदूषण कम हो रहा है तो रिहायशी व इंस्टीट्यूशनल एरिया में प्रदूषण की मात्रा हर साल बढ़ रही है। यह दावा पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ व पंजाब यूनिवर्सिटी के एनवायरनमेंट स्टडीज ने संयुक्त रूप से प्रदूषण के 25 साल के आंकड़ों का आकलन करके किया है।

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शोधकर्ताओं के मुताबिक औद्योगिक व व्यवसायिक क्षेत्र में क्रमश: 1.3 फीसदी व 0.4 फीसदी की दर से हर साल पीएम-10 की मात्रा कम हो रही है, जबकि रिहायशी, इंस्टीट्यूशनल और ग्रामीण क्षेत्र में पीएम 10 की मात्रा 0.3 फीसदी, 1.3 फीसदी और 1.1 फीसदी की दर से हर साल बढ़ रही है। 
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विशेषज्ञों के मुताबिक रिहायशी इलाकों में पीएम 10 बढ़ने के कई कारण हैं। इनमें प्रमुख रूप से वाहनों की बढ़ती संख्या, एक मौसम में पराली का जलना और खुले में नगर निगम के कूड़े को जलाना है। वाहनों के टायरों के घिसने से निकलने वाले कण की भी पीएम 10 की बढ़ोतरी में अहम भूमिका है।
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वहीं, औद्योगिक व व्यवसायिक क्षेत्रों में कम होने की वजह प्रदूषण नियंत्रण की नीति को सख्ती से लागू करना है। शोधकर्ताओं ने रिहायशी इलाके के लिए सेक्टर-39, औद्योगिक क्षेत्र के लिए फेज वन, व्यवसायिक के लिए सेक्टर-17, इंस्टीट्यूशनल के लिए पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज व ग्रामीण क्षेत्र के लिए कैंबवाला गांव को लिया है।

नाइट्रोजन ऑक्साइड तेजी से बढ़ा, चिंताजनक 

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि चंडीगढ़ में नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) तेजी से बढ़ा है। साल 2000 से देखें तो व्यवसायिक क्षेत्र में 1.1 फीसदी, इंस्टीट्यूशनल में 24.8 फीसदी, औद्योगिक में 27.4 फीसदी, रिहायशी इलाकों में 20.1 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 20.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

नाइट्रोजन ऑक्साइड का बढ़ना चिंताजनक हो सकता है, क्योंकि पीएम 2.5 में इसका काफी हिस्सा होता है। शीतकाल में पराली जलाने से उत्पन्न धुआं नाइट्रोजन उत्सर्जन का महत्वपूर्ण सोर्स माना गया है। इससे बच्चों व बड़ों में सांस की बीमारी बढ़ने की संभावना ज्यादा रहती है।

मानसून के सीजन में प्रदूषण के स्तर में आती है काफी कमी
मानसून सीजन चंडीगढ़ के लिए न सिर्फ गर्मी बल्कि प्रदूषण के लिए भी राहत लेकर आता है। जून से लेकर सितंबर तक पीएम 10 के स्तर में 47-67 फीसदी व नाइट्रोजन आक्साइड में 38 से 57 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बारिश से कण नीचे आते हैं और बह जाते हैं। सबसे अधिक प्रदूषण दिसंबर के महीने में दर्ज किया गया है, क्योंकि इस महीने में वायुमंडलीय सतह नीचे आती है और कण ऊपर जाने के बजाय नीचे रहते हैं।

क्या होता है पीएम 2.5 व पीएम 10

पीएम 2.5 व पीएम 10 हवा में कण के साइज को बताता है। आम तौर पर हमारे शरीर के बाल पीएम 50 के साइज के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पीएम 2.5 कितने बारीक होते होंगे।

सरकार ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम लांच किया है। इसके तहत प्रदूषण के स्तर में 25 से 30 फीसदी की कमी लाना है। यह अध्ययन चंडीगढ़ के प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करेगा। इससे प्रदूषण के प्रवृत्ति का पता चलता है। - रविंद्रा खैवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई

 

लोगों के सहयोग के बिना चंडीगढ़ के प्रदूषण को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। हालांकि, लोगों का पर्यावरण के प्रति झुकाव बढ़ा है। साइकिलिंग और वेस्ट सेग्रिगेशन में लोगों की भूमिका बढ़ी है। - डॉ. सुमन मोर, एसोसिएट प्रोफेसर एनवायरनमेंट स्टडीज पीयू

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