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पंजाब में इस बार दिवाली पर प्रदूषण ने पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ा, अमृतसर सबसे ज्यादा प्रदूषित
Mon, 16 Nov 2020 05:18 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 16 Nov 2020 05:18 AM IST
सार
- प्रदूषण के हिसाब से अमृतसर सबसे आगे, लुधियाना दूसरे और पटियाला तीसरे नंबर पर रहा
- तापमान कम होने के कारण धूल के कणों का फैलाव कम होने से प्रदूषण बढ़ा : पीपीसीबी
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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विस्तार
पंजाब सरकार के बड़े-बड़े दावों व प्रतिबंध के बावजूद इस बार दिवाली पर प्रदेश में प्रदूषण पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रहा। महानगर अमृतसर सबसे अधिक प्रदूषित रहा, जबकि लुधियाना दूसरे और पटियाला तीसरे नंबर पर रहा। यह खुलासा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से दिवाली के दिन कराए वायु गुणवत्ता सूचकांक सर्वेक्षण से हुआ है। औद्योगिक शहर मंडी गोबिंदगढ़ में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध के चलते इस बार पिछले साल की तुलना में प्रदूषण कम रहा।
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यह सर्वे दिवाली वाले दिन यानि शनिवार सुबह सात बजे से रविवार सुबह छह बजे तक कराया गया। इसके तहत प्रदेश के प्रमुख शहरों में पार्टीकुलेट मैटर (धूल के कण) 2.5 और 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर को जांचा गया। इस सर्वे के मुताबिक इस बार दिवाली पर अमृतसर सबसे अधिक प्रदूषित रहा।
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अमृतसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 386 रहा, जो पंजाब में सबसे ज्यादा है। वहीं जालंधर में 328, खन्ना में 281, लुधियाना में 376, मंडी गोबिंदगढ़ में 262 और पटियाला में 334 रहा। पिछले साल अमृतसर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 276, जालंधर में 282, खन्ना में 255, लुधियाना में 304, मंडी गोबिंदगढ़ में 311 और पटियाला में 328 रहा था।
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वहीं सर्वे के मुताबिक जहां पिछले साल पीएम 10 की मात्रा 90 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही थी, वहीं पीएम 2.5 की मात्रा 43 रही थी। जबकि इस साल यह दोनों क्रमवार 118 और 90 पाई गई हैं। पिछले साल पंजाब में औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 293 यानी खराब श्रेणी में था, जबकि इस साल यह 328 रहा है, जिसे बहुत खराब माना जाता है।
पीपीसीबी के एक्सईएन सुरिंदर सिंह मठारू ने माना कि प्रदूषण तो इस बार पिछले साल की तुलना में पंजाब में ज्यादा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि इसका कारण दिवाली पर कम तापमान का रहना है। 2019 में दिवाली पर तापमान 23 डिग्री था। इस साल 19 डिग्री रहा। कम तापमान के कारण धूल के कण वातावरण में ऊपर की तरफ नहीं गए। इससे इन कणों का फैलाव कम रहा, जिससे प्रदूषण ज्यादा रहा।