पंजाब: आईजी कुंवर के बयानों के बाद चढ़ा सियासी पारा, एजी का बचाव करने पर कैप्टन पर उठे सवाल
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जहां इस पूरे मामले में एडवोकेट जनरल (एजी) का बचाव करते हुए हाईकोर्ट के एसआईटी संबंधी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रहे हैं, वहीं विपक्ष के साथ-साथ अनेक कांग्रेसी नेताओं ने भी कैप्टन सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है।
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पंजाब के कोटकपूरा और बहिबल कलां फायरिंग मामले में गठित एसआईटी के प्रमुख रहे आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा इस्तीफे के बाद दिए बयानों ने पंजाब का सियासी पारा चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह जहां इस पूरे मामले में एडवोकेट जनरल (एजी) का बचाव करते हुए हाईकोर्ट के एसआईटी संबंधी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कह रहे हैं, वहीं विपक्ष के साथ-साथ अनेक कांग्रेसी नेताओं ने भी कैप्टन सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष ने हाईकोर्ट में हार को कैप्टन-बादल फ्रेंडली मैच बताया है।
इस्तीफे के बाद अपने पहले इंटरव्यू में ही कुंवर विजय प्रताप सिंह ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बारे में हाईकोर्ट के फैसले को लेकर एजी अतुल नंदा पर अंगुली उठा दी है, जिससे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की परेशानी बढ़ गई है। इससे पहले पार्टी के पूर्व प्रदेश प्रधान प्रताप बाजवा, मौजूदा प्रधान सुनील जाखड़ ने भी उक्त केस में एजी की असफल भूमिका पर सवाल उठाए थे, जबकि मुख्यमंत्री लगातार एजी का बचाव कर रहे हैं।
कुंवर विजय ने केवल एजी पर ही नहीं बल्कि कैप्टन सरकार पर भी अंगुली उठाते हुए कहा है कि उनकी तरफ से सरकार को लिखे कई पत्रों के बावजूद उक्त केस के गवाहों को सुरक्षा प्रदान नहीं की गई और राज्य की लीगल टीम बहुत कमजोर थी। कुंवर विजय का कहना है कि जिस दिन हाईकोर्ट ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट को रद्द किया, उस दिन भी एजी मेडिकल छुट्टी पर थे।
बुधवार को प्रताप बाजवा ने एक बार फिर एजी अतुल नंदा पर निशाना साधते हुए कहा है कि पंजाब के पास अपनी लीगल टीम होने के बावजूद एजी द्वारा सरकार के केस लड़ने के लिए बाहरी और अन्य राज्यों के वकीलों की नियुक्ति की जाती है। जबकि एजी की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी सरकार के केसों की खुद पैरवी करे। बाजवा ने इस बार मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर एजी को बर्खास्त करने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट में केस लटकाना चाहते हैं कैप्टन : ढींढसा
दूसरी ओर, विपक्ष के तेवर भी लगातार आक्रामक होते जा रहे हैं। विपक्षी दल प्रदेश के एजी पर नहीं बल्कि सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे हैं और हाईकोर्ट में मिली शिकस्त को कैप्टन-बादल फ्रेंडली मैच का नतीजा करार दे रहे हैं। अकाली नेता परमिंदर सिंह ढींढसा ने तो मुख्यमंत्री द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने संबंधी दिए बयान को भी बादल से मिलीभगत का नतीजा बताते हुए कहा कि इस तरह कैप्टन एसआईटी की जांच को और चार साल तक लटकाना चाहते हैं ताकि बादलों का बचाव हो सके। वहीं, हाईकोर्ट के फैसले ने शिअद में नई जान फूंक दी है। सुखबीर बादल अब सीधे तौर पर कैप्टन पर उनके परिवार को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं।