हरियाणा में सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने को बेताब राजनीतिक दल
हरियाणा में सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने को बेताब सभी दल 2019 की विधानसभा में अपनी भागीदारी का सपना संजो रहे हैं। जींद उपचुनाव और लोकसभा चुनाव में दस सीटें जीतने के बाद उत्साहित भाजपा सियासत के इस रण में 75 पार का नारा बुलंद कर चुकी है। इस जादुई आंकड़े को छूने के लिए पार्टी ने दिन रात एक कर दिया है। प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय नेताओं की रैलियों की झड़ी लगाकर भाजपा हरियाणा की सत्ता पर काबिज होना चाह रही है।
सूबे की मनोहर सरकार इस चुनाव में प्रदेश सरकार के कार्यों के अलावा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर भी जोर दे रही है। भ्रष्टाचार मुक्त हरियाणा और भर्तियों में पारदर्शिता की दुहाई देकर मुख्यमंत्री विधानसभा की दहलीज दोबारा लांघना चाह रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी चुनावी रैलियों में अनुच्छेद 370 और आर्टिकल 35-ए का जिक्त्रस् कर रहे हैं। ऐसे में 75 का आंकड़ा पार करना भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है।
उधर, कांग्रेस में आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बनाए बैठे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अशोक तंवर को किनारा दिखा कर पार्टी के रहनुमा तो बन बैठे हैं, लेकिन सत्ता के संघर्ष में 46 का आंकड़ा पार करना उनके लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
हरियाणा में ताऊ देवीलाल की विरासत को कैश करवाने में जुटे चाचा-भतीजे में से इस बार किसकी लाटरी लगेगी यह कहना मुश्किल है। पिछले चुनाव में परिवार एक था तो अभय चौटाला 19 विधायकों के साथ नेता विपक्ष का पद हथिया चुके थे, लेकिन इस बार भतीजे दुष्यंत की मुखालफत के चलते यह आंकड़ा पार होना मुश्किल मालूम हो रहा है।
हालांकि राह दुष्यंत की भी आसान नहीं है, क्योंकि परिवार और इनेलो से राह जुदा करने के बाद एक दम से सत्ता हथिया पाना कोई आसान काम नहीं है। इस चुनाव में पार्टी को स्थापित कर वे आगे की राह को आसान बनाना चाह रहे हैं। भविष्य की जमीन तैयार कर रहे दुष्यंत ने युवा राजनेता होने के नाते अपनी राजनीति की शुरुआत नए ढंग से की है। जिसमें पिता अजय चौटाला, माता नैना चौटाला और छोटा भाई दिग्विजय उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहे हैं।
भाजपा में बागी तेवर अख्तियार करने के बाद लोकसुरक्षा पार्टी का गठन कर लोकसभा चुनाव लड़ चुके सांसद राजकुमार सैनी अपनी पार्टी का खाता भी नहीं खोल पाए थे। अब विधानसभा चुनाव में उनकी किस्मत कितना साथ देगी यह इस चुनाव में तय हो जाएगा।
खाता खोलना चाह रही आप
इन सभी दलों के अलावा आम आदमी पार्टी अपना खाता खोलना चाह रही है। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि हरियाणा में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद ने अपने दम पर पूरे हरियाणा की कमान संभाल रखी है।
एक सीट पर ही अटका रहा है बसपा का ग्राफ
आम तौर पर हरियाणा में बसपा का एक ही उम्मीदवार जीतता रहा है, लेकिन पार्टी इस बार 90 सीटों पर अपना दम भर रही है। हजकां, इनेलो, लोसुपा और जेजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद पार्टी भले ही यह चुनाव अपने बूते पर लड़ रही है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा की सीधी टक्कर में इस बार बसपा कितनी सीटें लेगी यह मतदान के बाद तय होगा।
सफलता की राह देख रहे रणबीर
रणबीर शर्मा की लोक स्वराज पार्टी मैदान में है। 36 बिरादरी महागठबंधन के नाम से चुनाव मैदान में कूदे हैं। हरियाणा की राजनीति में पहले भी कई ब्यूरोक्रेट अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। जिसमें से कई सफल हुए और कई हाशिए पर चले गए। ऐसे में आईजी पद से रिटायर हुए रणबीर शर्मा भी सफलता की राह देख रहे हैं।
योगेंद्र यादव की पार्टी भी मैदान में
स्वराज इंडिया के जरिए योगेंद्र यादव अपने गृह राज्य से ताल ठोक रहे हैं। पार्टी ने परख कमेटी का गठन कर टिकटें बांटी थीं। पार्टी का कहना है कि 200 से ज्यादा आवेदन 90 सीटों पर आए थे, लेकिन हमने परखने के बाद 28 खरे उतरे प्रत्याशियों को ही टिकट दिया है। पार्टी स्वच्छ राजनीति का झंडा उठा कर चुनाव मैदान में उतरी है।
रोहतक बना सियासत का केंद्र
हरियाणा में रोहतक राजनीति का केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव रैली की शुरूआत यहां से की थी । गृह मंत्री अमित शाह के भी रोहतक दौरे हो चुके हैं। इसके अलावा भाजपा के केंद्रीय नेताओं ने भी रोहतक में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। वजह साफ है कि यहां भाजपा हुड्डा का गढ़ भेद कर जाट लैंड में अपनी मजबूती का संकेत देना चाह रही है।
तंवर की बगावत से उलझ गए समीकरण
कांग्रेस में टिकट बंटवारे से नाराज डा. अशोक तंवर खुल कर बगावत के मूड में आ चुके हैं। वे अपनी पार्टी से इस्तीफा तो दे ही चुके हैं। इस चुनाव में विरोधियों के लिए प्रचार करते नजर आ रहे हैं। उनकी यह मुखालफत सीधे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को लेकर है, ऐसे मे कांग्रेस को नुकसान होता है तो हुड्डा तंवर के सिर पर ठीकरा फोड़ेंगे और फायदे की स्थिति में क्रेडिट खुद लेने का दावा ठोकेंगे।
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अपने गढ़ में भी उलझे दिग्गज
इस बार बड़े-बड़े दिग्गजों की किस्मत दांव पर है। यह दिग्गज अपने गढ़ में कांटे की टक्कर में फंसे हैं। टोहाना में त्रिकोणीय संघर्ष है। यहां से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला मैदान में हैं। नारनौंद में कैप्टन अभिमन्यु और महेंद्रगढ़ में रामबिलास शर्मा, बादली ओम प्रकाश धनखड़, कृष्ण पंवार इसराना, कृष्ण बेदी शाहबाद, कंवर पाल गुर्ज्जर जगाधरी, प्रेमलता उंचाना, बबीता फौगाट दादरी, संदीप सिंह पेहवा, योगेश्वर दत्त बरोदा से कांटे के संघर्ष में फंसे हैं।
इसके अलावा कांग्रेस से आनंद सिंह दांगी महम, रघुबीर कादियान बेरी, गीता भुक्कल झज्जर, करण सिंह दलाल पलवल, कुलदीप शर्मा गन्नौर, प्रदीप चौधरी कालका, अशोक अरोड़ा थानेसर से संघर्ष में हैं। जेजेपी से बाढढ़ा से नैना चौटाला के सामने कांटे की टक्कर है।