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किसान आंदोलनः ...सियासत तेज, विरोधियों के निशाने पर सरकार, कर्मचारियों का खुला समर्थन

Sun, 29 Nov 2020 02:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 29 Nov 2020 02:19 AM IST
सार

  • कांग्रेस ने किसानों के आंदोलन के लिए सरकार को ठहराया जिम्मेदार, तुरंत किसानों को बातचीत के लिए बुलाने की मांग
  • किसानों के समर्थन में उतरे हरियाणा के सर्व कर्मचारी संगठनों ने भी किया प्रदर्शन

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Political mercury increasing in haryana on the farmer movement
kisan bill, protest, farmer - फोटो : amar ujala

विस्तार

किसान आंदोलन पर सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है। विरोधी जहां लगातार सरकार को निशाने पर लिए हुए हैं, वहीं सीएम मनोहर लाल ने भी उन्हें जवाब देते हुए किसानों के मुद्दे पर सियासी रोटियां सेंकने से परहेज करने की सलाह दी है। साथ ही विरोधी नेताओं ने सरकार से मांग की है कि वे 3 दिसंबर का इंतजार न करें, बल्कि तुरंत किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाएं। उधर, हरियाणा का कर्मचारी संगठन भी किसानों के समर्थन में उतर आया है। कर्मचारियों ने इस दौरान किसानों के समर्थन में प्रदर्शन भी किया।

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मनोहर को आलाकमान का डर, इसलिए नहीं उठा रहे हरियाणा के किसानों की आवाज : सैलजा
 चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल में इतनी हिम्मत नहीं है कि वह हरियाणा प्रदेश के किसानों का दुख दर्द जानें, उनकी बात उठाएं। वे केंद्र सरकार के सामने  न तो किसानों की पीड़ा व्यक्त कर सकते हैं और न ही उनकी मांगे रख सकते हैं, क्योंकि उन्हें अपने आलाकमान का डर है। इसी कारण मुख्यमंत्री यह बयान दे रहे हैं कि किसान आंदोलन में हरियाणा के किसान शामिल नहीं हैं। सैलजा ने कहा कि केंद्र की किसान आंदोलन पर अभी तक चुप्पी कई सवाल खड़े कर रहे हैं।
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दरअसल, केंद्र को सिर्फ पूंजीपतियों की चिंता है, किसानों की नहीं। आज जब किसान अपने हकों के लिए आंदोलन करना चाहते हैं, तो कोरोना का बहाना लगाकर उनके आंदोलन को कुचलने की साजिश की जा रही है। सैलजा ने कहा कि सरकार द्वारा किसानों से बातचीत में इतना समय क्यों लिया जा रहा है? तीन दिसंबर के बजाय केंद्र तुरंत किसानों को बातचीत के लिए बुलाए और इन काले कानूनों को वापस ले। सैलजा ने कहा कि हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार द्वारा किसानों पर की गई दमनकारी कार्रवाई को पूरे देश ने देखा है।
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जायज मांग लेकर आए हैं किसान, सरकार सुनें : दीपेंद्र
 चंडीगढ़। राज्य सभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने किसानों को समर्थन देते हुए कहा कि  किसान अपनी जायज मांग के साथ लोकतंत्र और संविधान के दायरे में शांतिप्रिय तरीके से केंद्र सरकार के द्वार पर आया है। अगर सरकार किसानों से अभी नहीं मिलना चाहती और सर्दी में 3 तारीख तक बैठाए रखना चाहती है, तो वह आंदोलन में शामिल सभी किसानों के लिए आवास, भोजन और चिकित्सा का सम्पूर्ण प्रबंध करे। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार कह रही है कोरोना काल में लोगों को इकठ्ठा नहीं होना चाहिए, जबकि दूसरी तरफ किसानों को 3 तारीख तक बैठाए रखना चाहती है। सरकार खुद कोरोना को बढ़ावा देने का काम कर रही है।

दीपेंद्र ने कहा कि किसानों का धरना जितना लंबा चलेगा उससे किसान ही नहीं, बल्कि दिल्ली की जनता भी परेशान होगी और कोरोना महामारी के औरी बढ़ने की संभावना भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि आज  हर वर्ग किसानों की मांगों और उनके आंदोलन का समर्थन कर रहा है। लेकिन हरियाणा की भाजपा-जजपा सररकार किसानों का विरोध ही नहीं, बल्कि उनके अधिकार छीनने, उनकी आवाज कुचलने के लिए हर जुल्म, ज्यादती भी कर रही। उन्होंने कहा कि जब किसानों की मांगें नहीं मानी जाती, तब तक उनका समर्थन किसानों के साथ रहेगा।

कर्मचारियों का किसानों के समर्थन में प्रदर्शन
 हरियाणा में सर्व कर्मचारी संघ ने किसानों के समर्थन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी, सीटू की प्रधान सुरेखा व महासचिव जयभगवान,  रिटायर्ड कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष आरसी जग्गा, महासचिव राजेंद्र अहलावत ने  कहा कि कर्मचारी पूरी तरह से किसानों के साथ हैं।  उनके अनुसार सभी तबकों के लोगों में कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली कूच कर रहे किसानों के साथ सरकार द्वारा किए जा रहे व्यवहार से भारी नाराजगी है।


उनके अनुसार शनिवार को  किसानों के समर्थन में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया था। जिसमें काफी संख्या में कर्मचारियों, मजदूरों, पेंशनर्स व किसानों ने भाग लिया। उनके अनुसार किसान आंदोलन अब जन आंदोलन बन गया है। उन्होंने बताया कि किसान संगठनों का कहना है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य व मंडी व्यवस्था दोनों खत्म हो जाएगी। जिससे किसान बर्बाद हो जाएगा,अगर ऐसा नहीं है तो सरकार इसकी लिखित में गारंटी देने में संकोच क्यों कर रही है ?

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