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लाल डोरे से बाहर के निर्माण पर बन रही नीति
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चंडीगढ़। लाल डोरे के बाहर के निर्माण को मंजूरी दिलाने के लिए यूटी प्रशासन पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर एक नीति बना रहा है। इसके लिए शुक्रवार को बंगलूरू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन सेटलमेंट (आईआईएचएस) और प्रशासन के अधिकारियों के बीच एक बैठक हुई। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने जल्द ही नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। पूर्व प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देश के बाद ही आईआईएचएस की टीम का गठन किया गया है, जो विभिन्न गांवों का सर्वे कर रही है।
कई महीने बीत जाने के बाद भी लाल डोरा की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर यूटी प्रशासन ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है। अभी सर्वे का काम ही चल रहा है। हाल ही में आईआईएचएस ने चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि चंडीगढ़ में किस तरह से लाल डोरे के बाहर के निर्माण को मंजूरी दी जा सकती है। इस पर प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें पड़ोसी राज्य पंजाब का मोहाली, हरियाणा का पंचकूला व दिल्ली के कुछ हिस्सों में कैसे लाल डोरे के बाहर के निर्माण को मंजूरी दी गई और उन्हें नियमित किया गया है, इसके बारे में स्टडी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने आईआईएचएस को यह भी कहा है कि अगली बार होने वाली बैठक में अध्ययन कर बताएं कि पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में लाल डोरे के बाहर के निर्माण को नियमित करने के दौरान कौन-कौन सी समस्याएं उत्पन्न हुईं और उससे कैसे सुलझाया गया। साथ ही जल्द ड्राफ्ट नीति तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि इस पर कोई फैसला लिया जा सके।
नगर निगम चुनाव से पहले लाल डोरे का हल मुश्किल
टीम जांच रही है कि लाल डोरे से बाहर फिलहाल कितनी जमीन बाकी है, जिसे चंडीगढ़ के साथ जोड़ा जा सकता है। इन इलाकों का विकास कैसे हो सकता है और अगर घरों को लाल डोरे में शामिल किया जाता है तो प्रशासन पर कितना बोझ पड़ेगा। इन मामलों की रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला होगा। हालांकि, इस काम में प्रशासन की ओर से काफी सुस्त रवैया अपनाया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि लाल डोरे की समस्या नगर निगम चुनाव से पहले हल नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि जबसे शहर में लाल डोरे के बाहर के निर्माण को नियमित करने की बातें शुरू हुई हैं, उसके बाद से लाल डोरे के बाहर अवैध निर्माण काफी बढ़ गया है। यूटी प्रशासन को बीते कई महीनों से लाल डोरे के बाहर हो रहे निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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कई महीने बीत जाने के बाद भी लाल डोरा की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर यूटी प्रशासन ने अभी तक कोई फैसला नहीं किया है। अभी सर्वे का काम ही चल रहा है। हाल ही में आईआईएचएस ने चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया कि चंडीगढ़ में किस तरह से लाल डोरे के बाहर के निर्माण को मंजूरी दी जा सकती है। इस पर प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें पड़ोसी राज्य पंजाब का मोहाली, हरियाणा का पंचकूला व दिल्ली के कुछ हिस्सों में कैसे लाल डोरे के बाहर के निर्माण को मंजूरी दी गई और उन्हें नियमित किया गया है, इसके बारे में स्टडी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के अधिकारियों ने आईआईएचएस को यह भी कहा है कि अगली बार होने वाली बैठक में अध्ययन कर बताएं कि पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में लाल डोरे के बाहर के निर्माण को नियमित करने के दौरान कौन-कौन सी समस्याएं उत्पन्न हुईं और उससे कैसे सुलझाया गया। साथ ही जल्द ड्राफ्ट नीति तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि इस पर कोई फैसला लिया जा सके।
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नगर निगम चुनाव से पहले लाल डोरे का हल मुश्किल
टीम जांच रही है कि लाल डोरे से बाहर फिलहाल कितनी जमीन बाकी है, जिसे चंडीगढ़ के साथ जोड़ा जा सकता है। इन इलाकों का विकास कैसे हो सकता है और अगर घरों को लाल डोरे में शामिल किया जाता है तो प्रशासन पर कितना बोझ पड़ेगा। इन मामलों की रिपोर्ट के आधार पर ही फैसला होगा। हालांकि, इस काम में प्रशासन की ओर से काफी सुस्त रवैया अपनाया जा रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि लाल डोरे की समस्या नगर निगम चुनाव से पहले हल नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि जबसे शहर में लाल डोरे के बाहर के निर्माण को नियमित करने की बातें शुरू हुई हैं, उसके बाद से लाल डोरे के बाहर अवैध निर्माण काफी बढ़ गया है। यूटी प्रशासन को बीते कई महीनों से लाल डोरे के बाहर हो रहे निर्माण की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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