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Chandigarh News: क्लबों के बाहर बम धमाकों के बाद खुली पुलिस की नींद
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चंडीगढ़। पंचकूला और मोहाली में हुक्का बार और क्लबों के बंद होने का समय रात 12 बजे निर्धारित है, जबकि चंडीगढ़ में क्लब रात 3 बजे तक खुलते हैं। शहर में क्लब संचालकों व युवाओं की ओर से लॉ एंड ऑर्डर की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। पुलिस की आंख बीते 26 नवंबर को सेक्टर-26 के दो क्लबों के बाहर दो बम धमाकों के बाद खुली। इसके बाद कार्रवाई के लिए एक्साइज विभाग को पत्र लिखा गया।
इस साल की शुरुआत में पंचकूला पुलिस व प्रशासन की ओर से शहर में चल रहे हुक्का बारों व क्लबों को बंद करने का समय रात 12 बजे निर्धारित कर दिया गया था। इसमें सख्त निर्देश थे कि अगर रात 12 बजे के बाद कोई क्लब खुलता है तो कानूनी कार्रवाई होगा। इसके बाद मोहाली पुलिस व प्रशासन ने भी क्लबों को बंद करने का समय रात 12 बजे निर्धारित कर दिया था। पंचकूला व मोहाली में रात 12 बजे क्लब बंद होते ही युवक-युवतियों की भीड़ चंडीगढ़ पहुंच जाती है। चंडीगढ़ की एक्साइज विभाग की पॉलिसी के तहत रात 3 बजे तक क्लब खोलने का समय निर्धारित है। क्लब खुले रहने तक शराब भी परोसी जा सकती है लेकिन कई क्लब समय सीमा के बाद खुले रहते हैं और शराब भी परोसी जाती है।
मध्यमार्ग पर सबसे अधिक क्लब और डिस्को
चंडीगढ़ मध्यमार्ग नाइट की लाइफ लाइन माना जाता है। यहीं पर अधिकतर नाइट क्लब, डिस्कोथेक और बीयर बार हैं। मध्य मार्ग पर मौजूद सेक्टर-26, 7, 8 और 9 सेक्टर में करीब 60 से अधिक क्लब, बार और डिस्कोथेक हैं। इनमें कुछ क्लब तो रात को 3 बजते ही बंद हो जाते हैं लेकिन कुछ क्लब तड़के तक खुल रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2022 से पहले चंडीगढ़ में भी रात 12 बजे तक ही क्लब खोलने का समय तय था। दूसरी ओर, औद्योगिक क्षेत्र में क्लब संचालकों पुलिस खूब मेहरबान है। वे भी तय समय से अधिक देरी तक खुल रहे हैं।
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यूटी के क्लबों में मारपीट और गोलियां चलने के सबसे अधिक मामले
चंडीगढ़ के क्लबों में मारपीट व गोलियां चलने के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक इस साल में क्लबों के अंदर मारपीट के छह मामले दर्ज हो चुके हैं। क्लब संचालकों पर गोलियां चलाने के साथ बम धमाके के मामले भी सामने आ चुके हैं। इनमें से चार मामले सेक्टर-26 और एक मामला सेक्टर-8 के क्लब में सामने आया था। तीन महीने पहले क्लब में बाउंसर उपलब्ध करवाने वाले युवक पर गोलियां चली थीं। बीते 26 नवंबर को सेक्टर-26 में दो क्लबाें पर बम फेंककर हमला किया गया। बता दें कि मोहाली निवासी डॉ. अमन चौहान के साथ बीती 12 जून की रात को सेक्टर-26 स्थित प्लेग्राउंड क्लब में डीजे पर एक गाना लगाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसे लेकर लेकर बाउंसरों ने धक्का-मुक्की कर उसकी धुनाई कर दी थी। डाॅक्टर की शिकायत पर पुलिस ने सेक्टर-26 थाने में डिंपल और यश हंस समेत बाउंसरों व अन्य सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बीते मई महीने में सेक्टर-26 स्थित एक क्लब में पिंजौर निवासी दो युवकों के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में कार्रवाई नहीं करने पर दो पुलिस जवानों पर लाइनहाजिर किया गया था।
बम विस्फोट के बाद ही खुली आंखें
दरअसल, एक अप्रैल को हर साल क्लब संचालकों को विभिन्न विभागों से अलग-अलग एनओसी लेने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। लाइसेंस के दौरान पुलिस की ओर से चेक किया जाता है कि जिस क्लब संचालक ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, उसके खिलाफ पहले कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तो नहीं है, लॉ एंड ऑर्डर का ध्यान रखा जाएगा, के अलावा अन्य नियमों के आधार पर पुलिस एनओसी जारी होती है लेकिन सेक्टर-26 व 7 में स्थित हॉस्पिटैलिटी (द वॉल्ट), प्रिस्टीन हॉस्पिटैलिटी (डी''ओरा क्लब), जेएसएम एसपीएल रेस्टोरेंट एलएलपी (हार्ड रॉक कैफे), रिबेल हॉस्पिटैलिटी (काकुना क्लब), रबदित्ता कॉरपोरेट्स (काला घोड़ा), जीबीएस हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (बार्गेन एन बूज), द टाइमलाइनर्स (बुलेवार्ड), सैंस फूड्स (मिनिस्ट्री ऑफ बार एक्सचेंज), जैक्स एंटरप्राइजेज (कल्चर क्लब) संचालकों के खिलाफ पुलिस ने सेक्टर-26 व सेक्टर-तीन थाने में कई कलंदरे काटे हैं लेकिन कोई सख्त कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। अब बीते 26 नवंबर को सेक्टर-26 में दो क्लबों के बाहर बम धमाकों की आवाज ने पुलिस की आंखें खोली। एसएसपी कार्यालय की ओर से 28 नवंबर और 6 दिसंबर को क्लब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक्साइज विभाग के साथ पत्राचार किया गया।
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इस साल की शुरुआत में पंचकूला पुलिस व प्रशासन की ओर से शहर में चल रहे हुक्का बारों व क्लबों को बंद करने का समय रात 12 बजे निर्धारित कर दिया गया था। इसमें सख्त निर्देश थे कि अगर रात 12 बजे के बाद कोई क्लब खुलता है तो कानूनी कार्रवाई होगा। इसके बाद मोहाली पुलिस व प्रशासन ने भी क्लबों को बंद करने का समय रात 12 बजे निर्धारित कर दिया था। पंचकूला व मोहाली में रात 12 बजे क्लब बंद होते ही युवक-युवतियों की भीड़ चंडीगढ़ पहुंच जाती है। चंडीगढ़ की एक्साइज विभाग की पॉलिसी के तहत रात 3 बजे तक क्लब खोलने का समय निर्धारित है। क्लब खुले रहने तक शराब भी परोसी जा सकती है लेकिन कई क्लब समय सीमा के बाद खुले रहते हैं और शराब भी परोसी जाती है।
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मध्यमार्ग पर सबसे अधिक क्लब और डिस्को
चंडीगढ़ मध्यमार्ग नाइट की लाइफ लाइन माना जाता है। यहीं पर अधिकतर नाइट क्लब, डिस्कोथेक और बीयर बार हैं। मध्य मार्ग पर मौजूद सेक्टर-26, 7, 8 और 9 सेक्टर में करीब 60 से अधिक क्लब, बार और डिस्कोथेक हैं। इनमें कुछ क्लब तो रात को 3 बजते ही बंद हो जाते हैं लेकिन कुछ क्लब तड़के तक खुल रहे हैं। बता दें कि वर्ष 2022 से पहले चंडीगढ़ में भी रात 12 बजे तक ही क्लब खोलने का समय तय था। दूसरी ओर, औद्योगिक क्षेत्र में क्लब संचालकों पुलिस खूब मेहरबान है। वे भी तय समय से अधिक देरी तक खुल रहे हैं।
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यूटी के क्लबों में मारपीट और गोलियां चलने के सबसे अधिक मामले
चंडीगढ़ के क्लबों में मारपीट व गोलियां चलने के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक इस साल में क्लबों के अंदर मारपीट के छह मामले दर्ज हो चुके हैं। क्लब संचालकों पर गोलियां चलाने के साथ बम धमाके के मामले भी सामने आ चुके हैं। इनमें से चार मामले सेक्टर-26 और एक मामला सेक्टर-8 के क्लब में सामने आया था। तीन महीने पहले क्लब में बाउंसर उपलब्ध करवाने वाले युवक पर गोलियां चली थीं। बीते 26 नवंबर को सेक्टर-26 में दो क्लबाें पर बम फेंककर हमला किया गया। बता दें कि मोहाली निवासी डॉ. अमन चौहान के साथ बीती 12 जून की रात को सेक्टर-26 स्थित प्लेग्राउंड क्लब में डीजे पर एक गाना लगाने को लेकर कहासुनी हो गई थी। इसे लेकर लेकर बाउंसरों ने धक्का-मुक्की कर उसकी धुनाई कर दी थी। डाॅक्टर की शिकायत पर पुलिस ने सेक्टर-26 थाने में डिंपल और यश हंस समेत बाउंसरों व अन्य सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बीते मई महीने में सेक्टर-26 स्थित एक क्लब में पिंजौर निवासी दो युवकों के साथ मारपीट की गई थी। इस मामले में कार्रवाई नहीं करने पर दो पुलिस जवानों पर लाइनहाजिर किया गया था।
बम विस्फोट के बाद ही खुली आंखें
दरअसल, एक अप्रैल को हर साल क्लब संचालकों को विभिन्न विभागों से अलग-अलग एनओसी लेने के बाद लाइसेंस जारी किया जाता है। लाइसेंस के दौरान पुलिस की ओर से चेक किया जाता है कि जिस क्लब संचालक ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है, उसके खिलाफ पहले कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड तो नहीं है, लॉ एंड ऑर्डर का ध्यान रखा जाएगा, के अलावा अन्य नियमों के आधार पर पुलिस एनओसी जारी होती है लेकिन सेक्टर-26 व 7 में स्थित हॉस्पिटैलिटी (द वॉल्ट), प्रिस्टीन हॉस्पिटैलिटी (डी''ओरा क्लब), जेएसएम एसपीएल रेस्टोरेंट एलएलपी (हार्ड रॉक कैफे), रिबेल हॉस्पिटैलिटी (काकुना क्लब), रबदित्ता कॉरपोरेट्स (काला घोड़ा), जीबीएस हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (बार्गेन एन बूज), द टाइमलाइनर्स (बुलेवार्ड), सैंस फूड्स (मिनिस्ट्री ऑफ बार एक्सचेंज), जैक्स एंटरप्राइजेज (कल्चर क्लब) संचालकों के खिलाफ पुलिस ने सेक्टर-26 व सेक्टर-तीन थाने में कई कलंदरे काटे हैं लेकिन कोई सख्त कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। अब बीते 26 नवंबर को सेक्टर-26 में दो क्लबों के बाहर बम धमाकों की आवाज ने पुलिस की आंखें खोली। एसएसपी कार्यालय की ओर से 28 नवंबर और 6 दिसंबर को क्लब संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक्साइज विभाग के साथ पत्राचार किया गया।