{"_id":"4adad244374c58785575c6680578c80c","slug":"plumbers-well-roof-gandhi-nagar-pathankot-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुएं में डूबा प्लंबर, निकालने में सेना भी नाकाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुएं में डूबा प्लंबर, निकालने में सेना भी नाकाम
पठानकोट ।
Updated Sun, 14 Sep 2014 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहर के गांधी नगर इलाके में रविवार को उस वक्त सनसनी फैल गई, जब कुएं के ऊपर काम करते समय उसकी छत ढहने से एक प्लंबर समेत दो लोग कुएं में ही समा गए। कुएं में गिरने से घायल एक मजदूर को तो किसी प्रकार बाहर निकाल लिया गया, लेकिन पानी में डूबे प्लंबर का पता नहीं चला। सुबह करीब दस बजे हुई इस घटना के बाद सेना और फायर ब्रिगेड के जवानों की मदद से प्लंबर को बाहर निकालने के लिए घंटों मशक्कत र्हुई, लेकिन इस मामले में देर शाम तक कामयाबी नहीं मिली।
रविवार को घटना से संबंधित कुएं में पाइप डालने का काम चल रहा था। कुआं ऊपर से ढाली गई छत से ढका था। बताया जाता है कि इसके ऊपर चढ़कर पेशे से प्लंबर और गांधी नगर निवासी हरबंस लाल (65) काम कर रहा था। इस दौरान हरबंस लाल के साथ उनका बेटा कमल और मजदूर मेहर सिंह भी मौजूद थे। सुबह करीब साढ़े 10 बजे जब तीनों कुएं के लेंटर पर खड़े होकर काम कर रहे थे तभी लेंटर का एक हिस्सा टूट गया। इससे हरबंस लाल और मेहर कुएं में जा गिरे। जबकि कमल किसी प्रकार बच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मेहर सिंह पाइप के सहारे किसी तरह से बाहर निकल गया, लेकिन इस बीच कुएं का दूसरा हिस्सा भी ध्वस्त हो गया और चोट लगने के कारण हरबंस लाल पानी में डूब गया। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। उधर, सूचना पर फायर ब्रिगेड, नगर काउंसिल के वाहन भी मौके पर पहुंचे। पंपों और मोटर वाहनों की मदद से लबालब भरे कुएं से पानी बाहर निकालने का काम शुरू किया गया।
विज्ञापन
फिर भी हरबंस लाल का पता नहीं चल सका। दोपहर तक हुए प्रयास नाकाम होने के बाद मौके पर सेना के जवानों की टीम बुलाई गई। जवानों की टीम ने भी कुएं में डूबे हरबंस को बाहर निकालने के लिए देर शाम तक मशक्कत की, लेकिन उन्हें भी इस मामले में कामयाबी नहीं मिली। इस बीच देर शाम तक जवानों का प्रयास जारी था।
बचाव प्रबंध पर उठे सवाल
पठानकोट । कुएं में गिरे हरबंस लाल को बाहर निकालने के लिए किए गए प्रयास में नाकामी हाथ लगने पर लोगों ने बचाव प्रबंधों पर सवाल उठाया। लोगों का कहना था कि प्रशासन की ओर से आपदा के समय त्वरित राहत या बचाव कार्य के लिए बेहतर प्रबंध के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन रविवार को इसकी असलियत सामने आ गई।
काफी प्रयास के बाद नाकामी हाथ लगने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने आखिरकार सेना की मदद लेना ही मजदूरी समझी। लोगों ने कहा कि यदि जिले में जम्मू-कश्मीर जैसे हालात उत्पन्न होते तो प्रशासन ऐसी स्थिति से भला कैसे निपटता। उधर, विधायक अश्वनी शर्मा समेत जिले के आला अफसरों ने भी मौके पर पहुंच कर घटना का जायजा लिया।
गरीब परिवार पर टूटा पहाड़
पठानकोट । हादसे से हरबंस के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों को जब घटना का पता चला तो वे बदहवाश घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने बताया कि हरबंस लाल का परिवार गरीबी झेल रहा है। कुछ दिन पहले ही हरबंस को कुत्ते ने काटा था। तब से वह काम छोड़ घर पर आराम कर रहा था।
रविवार को उसके बेटे ने काम पर चलने के लिए कह दिया। हरबंस के पुत्र कमल ने बताया कि वह सुबह पिता के साथ काम के लिए निकला था। उन्हें क्या पता था कि जिस काम में पिता की सारी उम्र्र बीत गई, आज वही मौत का कारण बन जाएगा।
विज्ञापन
रविवार को घटना से संबंधित कुएं में पाइप डालने का काम चल रहा था। कुआं ऊपर से ढाली गई छत से ढका था। बताया जाता है कि इसके ऊपर चढ़कर पेशे से प्लंबर और गांधी नगर निवासी हरबंस लाल (65) काम कर रहा था। इस दौरान हरबंस लाल के साथ उनका बेटा कमल और मजदूर मेहर सिंह भी मौजूद थे। सुबह करीब साढ़े 10 बजे जब तीनों कुएं के लेंटर पर खड़े होकर काम कर रहे थे तभी लेंटर का एक हिस्सा टूट गया। इससे हरबंस लाल और मेहर कुएं में जा गिरे। जबकि कमल किसी प्रकार बच गया।
विज्ञापन
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मेहर सिंह पाइप के सहारे किसी तरह से बाहर निकल गया, लेकिन इस बीच कुएं का दूसरा हिस्सा भी ध्वस्त हो गया और चोट लगने के कारण हरबंस लाल पानी में डूब गया। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। उधर, सूचना पर फायर ब्रिगेड, नगर काउंसिल के वाहन भी मौके पर पहुंचे। पंपों और मोटर वाहनों की मदद से लबालब भरे कुएं से पानी बाहर निकालने का काम शुरू किया गया।
विज्ञापन
फिर भी हरबंस लाल का पता नहीं चल सका। दोपहर तक हुए प्रयास नाकाम होने के बाद मौके पर सेना के जवानों की टीम बुलाई गई। जवानों की टीम ने भी कुएं में डूबे हरबंस को बाहर निकालने के लिए देर शाम तक मशक्कत की, लेकिन उन्हें भी इस मामले में कामयाबी नहीं मिली। इस बीच देर शाम तक जवानों का प्रयास जारी था।
बचाव प्रबंध पर उठे सवाल
पठानकोट । कुएं में गिरे हरबंस लाल को बाहर निकालने के लिए किए गए प्रयास में नाकामी हाथ लगने पर लोगों ने बचाव प्रबंधों पर सवाल उठाया। लोगों का कहना था कि प्रशासन की ओर से आपदा के समय त्वरित राहत या बचाव कार्य के लिए बेहतर प्रबंध के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन रविवार को इसकी असलियत सामने आ गई।
काफी प्रयास के बाद नाकामी हाथ लगने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने आखिरकार सेना की मदद लेना ही मजदूरी समझी। लोगों ने कहा कि यदि जिले में जम्मू-कश्मीर जैसे हालात उत्पन्न होते तो प्रशासन ऐसी स्थिति से भला कैसे निपटता। उधर, विधायक अश्वनी शर्मा समेत जिले के आला अफसरों ने भी मौके पर पहुंच कर घटना का जायजा लिया।
गरीब परिवार पर टूटा पहाड़
पठानकोट । हादसे से हरबंस के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों को जब घटना का पता चला तो वे बदहवाश घटना स्थल की ओर दौड़ पड़े। स्थानीय लोगों ने बताया कि हरबंस लाल का परिवार गरीबी झेल रहा है। कुछ दिन पहले ही हरबंस को कुत्ते ने काटा था। तब से वह काम छोड़ घर पर आराम कर रहा था।
रविवार को उसके बेटे ने काम पर चलने के लिए कह दिया। हरबंस के पुत्र कमल ने बताया कि वह सुबह पिता के साथ काम के लिए निकला था। उन्हें क्या पता था कि जिस काम में पिता की सारी उम्र्र बीत गई, आज वही मौत का कारण बन जाएगा।