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दल बदलने वाले 'आप' के चार विधायकों के खिलाफ याचिका पहुंची हाईकोर्ट, कार्रवाई की मांग
Sat, 01 Feb 2020 11:24 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sat, 01 Feb 2020 11:24 AM IST
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सुखपाल खैरा
- फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब विधान सभा चुनाव में आम आदमी पार्टी से विजयी सुखपाल खैरा, बलदेव सिंह, नाजर सिंह मनशाहिया और अमरजीत सिंह संदोआ के खिलाफ दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
पहले हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है लेकिन अब नए सिरे से याचिका पर सुनवाई की हाईकोर्ट से मांग की गई है। चंडीगढ़ के एडवोकेट रविंदर सिंह राणा ने एडवोकेट बलतेज सिंह सिद्धू के जरिए शुक्रवार को याचिका दायर कर चारों विधायकों पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई करने की अपील की थी।
याची ने बताया कि मणिपुर में कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ कर विजयी होने के बाद भाजपा में शामिल होने के वाले विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर विधान सभा के स्पीकर को 4 सप्ताह में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उस आधार पर अब इस मामले की भी सुनवाई करने की हाईकोर्ट से अपील की गई है।
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शुक्रवार को इस अर्जी पर सुनवाई नहीं पाई और इसे अगले शुक्रवार तक स्थगित कर दिया है। दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि पंजाब विधान सभा के 2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी की टिकट से विजयी सुखपाल खैरा, बलदेव सिंह, नजर सिंह मनशाहिया और अमरजीत सिंह संदोआ अब पार्टी छोड़ चुके हैं।
इनमे से सुखपाल खैरा ने पंजाब एकता पार्टी बना ली है, जिसमे बलदेव सिंह शामिल हो चुके हैं तो नाजर सिंह मनशाहिया और अमरजीत सिंह संदोआ कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। चारों विधायकों द्वारा अपनी पार्टी छोड़ने के बावजूद इन सभी को अभी भी विधायकों को मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जा रही है।
दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सभी की विधान सभा सदस्यता रद्द की जानी चाहिए और इन्हे विधायक के तौर पर मिल रहा वेतन और अन्य सुविधाएं भी बंद किए जाने चाहिए।
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पहले हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज कर चुका है लेकिन अब नए सिरे से याचिका पर सुनवाई की हाईकोर्ट से मांग की गई है। चंडीगढ़ के एडवोकेट रविंदर सिंह राणा ने एडवोकेट बलतेज सिंह सिद्धू के जरिए शुक्रवार को याचिका दायर कर चारों विधायकों पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई करने की अपील की थी।
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याची ने बताया कि मणिपुर में कांग्रेस की टिकट से चुनाव लड़ कर विजयी होने के बाद भाजपा में शामिल होने के वाले विधायकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर विधान सभा के स्पीकर को 4 सप्ताह में कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उस आधार पर अब इस मामले की भी सुनवाई करने की हाईकोर्ट से अपील की गई है।
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शुक्रवार को इस अर्जी पर सुनवाई नहीं पाई और इसे अगले शुक्रवार तक स्थगित कर दिया है। दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया है कि पंजाब विधान सभा के 2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी की टिकट से विजयी सुखपाल खैरा, बलदेव सिंह, नजर सिंह मनशाहिया और अमरजीत सिंह संदोआ अब पार्टी छोड़ चुके हैं।
इनमे से सुखपाल खैरा ने पंजाब एकता पार्टी बना ली है, जिसमे बलदेव सिंह शामिल हो चुके हैं तो नाजर सिंह मनशाहिया और अमरजीत सिंह संदोआ कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। चारों विधायकों द्वारा अपनी पार्टी छोड़ने के बावजूद इन सभी को अभी भी विधायकों को मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जा रही है।
दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सभी की विधान सभा सदस्यता रद्द की जानी चाहिए और इन्हे विधायक के तौर पर मिल रहा वेतन और अन्य सुविधाएं भी बंद किए जाने चाहिए।