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कला भवन में ‘एक्टर की खिचड़ी’ और ‘राजा के सिर पर सींग’
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 20 May 2014 02:21 PM IST
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बचपन में दादा-दादी द्वारा सुनाई जाने वाली कहानियों का अपना ही मजा है। सोमवार को सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में इसी तरह के नाटक ‘एक्टर की खिचड़ी’ और ‘राजा के सिर पर सींग’ कहानी का मंचन किया गया। इनका निर्देशन रविंद्र कुमार ने किया।
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नाई के पेट में नहीं पची बात:
नाटक ‘राजा के सिर पर सींग’ की कहानी बेहद ही मासूम सोच पर आधारित है। एक राज्य के नाई ने अफवाह सुनी कि उनके राजा के सिर पर सींग है। नाई बहुत कोशिश करता है कि यह बात किसी को न बताएं। लेकिन बात न पचा पाने के लिए मशहूर नाई के पेट में दर्द होने लगता है।
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वह एक पेड़ के पास जाकर कहता है कि राजा के सिर पर सींग है। इसके बाद वह अच्छा महसूस करने लगता है। मुश्किल तब आती है जब उस पेड़ को काट दिया जाता है और उस से एक ढोलक तैयार किया जाता है। जब भी कोई ढोलक बजाता है तो उसमें से यही आवाज आती है कि राजा के सिर पर सींग।
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एक दिन यही ढोलक जब राजा के सामने बजाया जाता है उससे यह आवाज सुन राजा नाराज होता है। अंत में राजा उस लकड़हारे को बुलाते हैं जिसने वह पेड़ काटा था। लकड़हारा नाई का नाम लेता है और नाई राजा के सामने आकर अपनी गलती मान लेता है। राजा अंत मेें हंस कर नाई को माफ कर देता है और कहता है कि वे देखना चाहते थे कि कौन दरबार में चुगलखोरी करता है।
भूल गया खिचड़ी:
दूसरा नाटक ‘एक्टर की खिचड़ी’ भी मजेदार था। नाटक की कहानी एक ऐसे इंसान की है जिसे भूलने की आदत है। उसे खिचड़ी बहुत पसंद है और एक दिन ठान लेता है कि घर में खिचड़ी ही खाएगा।
रास्ते भर वह याद रखने के लिए खिचड़ी बोलता जाता है। रास्ते में उसे कई लोग मिलते हैं जो उसे कहते है कि खिचड़ी भी कोई खाने की चीज है। खाना है तो मिठाई खाओ। इन बातों में वह खिचड़ी का नाम भूल जाता है और अपने घर में कहता है कि उसे कुछ खाना है लेकिन याद नहीं आ रहा।
इसी बीच बहुत सी हंसाने वाली स्थितियां पैदा होती हैं। अंत में उस युवक की मां कहती है कि तेरे खाने के चक्कर में दिमाग की खिचड़ी हो गई। यह सुनते है युवक को याद आता है कि उसे खिचड़ी खानी है। नाटक की कहानी बेशक पुरानी हो लेकिन मंच पर यह बेहद नई लगी। बच्चों की मासूमियत किरदार में जान डालती हुई नजर आई।