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श्रवण की पितृ भक्ति और सीता स्वयंवर सीन का मंचन
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चंडीगढ़। श्रवण भक्ति से लेकर सीता स्वयंवर तक के दृश्य का एक ही रात में मंचन किया गया। राजा दशरथ के शब्दभेदी बाण लगने से श्रवण कुमार की मृत्यु के बाद शिव वरदान का दृश्य दिखाया गया। राम जन्म और सीता स्वयंवर के दृश्य से सभी दर्शक खुशी और उल्लास में दिखे। वहीं, श्रवण की पितृ भक्ति और मृत्यु के दृश्य ने भावुक कर दिया। यह सारे दृश्य मंगलवार को सेक्टर-17 के रामलीला कमेटी परेड ग्राउंड के मंच पर दिखाए गए।
सेक्टर-17 स्थित रामलीला कमेटी के मंच पर मंगलवार से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। कोविड के कारण रामलीला मंचन की अनुमति मिलने में देरी हुई। कमेटी के वरिष्ठ सहायक निर्देशक सुनील शर्मा ने बताया कि श्रवण लीला में माता-पिता के प्रति बेटे की भक्ति दिखाई गई कि किस प्रकार पुत्र अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए निकला है। उनकी सेवा में प्राणों का त्याग करता है। शिव वरदान में रावण भगवान शिव की तपस्या करता है। भगवान शिव प्रसन्न होकर वरदान मांगने के लिए कहते हैं तो वह अमरत्व का वरदान मांगता है। राम जन्म से दशरथ के महल में खुशी का माहौल होता है। इसके बाद सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। सुनील शर्मा ने बताया कि हर साल नवरात्र के पहले दिन से ही रामलीला शुरू होती थी, लेकिन इस बार चार दिन देरी से शुरू हुई है। उन्होंने बताया कि चूंकि दशहरा नहीं होगा, इसलिए दशहरे के दिन रावण वध मंच पर ही दिखाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोहित दत्ता ने श्रवण कुमार, अश्वनी सभ्रवाल ने श्रवण के पिता और अनिल दहिया ने श्रवण के माता की भूमिका निभाई। राजेश चौहान ने दशरथ, सुनील शर्मा ने रावण, कमल ने सीता, गौरव बग्गा ने राम की भूमिका निभाई।
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सेक्टर-17 स्थित रामलीला कमेटी के मंच पर मंगलवार से रामलीला का मंचन शुरू हुआ। कोविड के कारण रामलीला मंचन की अनुमति मिलने में देरी हुई। कमेटी के वरिष्ठ सहायक निर्देशक सुनील शर्मा ने बताया कि श्रवण लीला में माता-पिता के प्रति बेटे की भक्ति दिखाई गई कि किस प्रकार पुत्र अपने माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए निकला है। उनकी सेवा में प्राणों का त्याग करता है। शिव वरदान में रावण भगवान शिव की तपस्या करता है। भगवान शिव प्रसन्न होकर वरदान मांगने के लिए कहते हैं तो वह अमरत्व का वरदान मांगता है। राम जन्म से दशरथ के महल में खुशी का माहौल होता है। इसके बाद सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। सुनील शर्मा ने बताया कि हर साल नवरात्र के पहले दिन से ही रामलीला शुरू होती थी, लेकिन इस बार चार दिन देरी से शुरू हुई है। उन्होंने बताया कि चूंकि दशहरा नहीं होगा, इसलिए दशहरे के दिन रावण वध मंच पर ही दिखाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मोहित दत्ता ने श्रवण कुमार, अश्वनी सभ्रवाल ने श्रवण के पिता और अनिल दहिया ने श्रवण के माता की भूमिका निभाई। राजेश चौहान ने दशरथ, सुनील शर्मा ने रावण, कमल ने सीता, गौरव बग्गा ने राम की भूमिका निभाई।
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