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वर्ल्ड फोटोग्राफी डे: चर्चित फोटोग्राफरों की कहानी, जिनके लिए फोटोग्राफी किसी जुनून से कम नहीं
Wed, 19 Aug 2020 03:58 PM IST
खुशबू गोयल
मोनिका नागर, चंडीगढ़
मोनिका नागर, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 19 Aug 2020 03:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जो पल बीत जाता है, वह कभी लौटकर नहीं आता, लेकिन उन लम्हों को सिर्फ तस्वीरों में कैद किया जा सकता है, ताकि जब भी बीते पल को याद करना हो तो एलबम पलटने पर यादें ताजा हो जाएं। ऐसे में उन तस्वीरों की अहमियत ज्यादा बढ़ जाती हैं, जिन्हें बहुत ही खूबसूरती से खींचा जाता है। ऐसी तस्वीरें हमेशा जिंदा रहती हैं।
इन्हें खींचने वाले किसी हुनरमंद से कम नहीं होते। एक बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए धैर्यवान, संवेदनशील और प्रकृति प्रेमी होना बहुत जरूरी है। बुधवार को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है। आइए, बात करते हैं उन फोटोग्राफरों की, जिनके लिए फोटोग्राफी किसी जुनून से कम नहीं क्योंकि इसके लिए वह किसी भी हद को पार करने के लिए तैयार रहते हैं।
इनकी फोटो प्रधानमंत्री मोदी तक कर चुके हैं ट्विट
अक्षित वैसे तो साइक्लिस्ट हैं लेकिन फोटोग्राफी उनका जुनून है। अक्षित बताते हैं कि उन्होंने पांच साल की उम्र में फोटोग्राफी शुरू कर दी थी। पिता के पास कई तरह के कैमरे थे। वह हमेशा मुझे अच्छी फोटो खींचने के लिए प्रेरित करते थे। एक बार एक शादी समारोह के दौरान मैंने एक फोटो खींची और पिताजी ने उसकी बहुत तारीफ की। उसके बाद फोटोग्राफी को अपना पैशन बना लिया।
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मैं साइक्लिंग के दौरान तरह-तरफ की फोटो खींचता हूं, जिसे देखकर लोग साइक्लिंग के प्रति प्रोत्साहित होते हैं। पिछले साल मैंने चंडीगढ़ के एक लाइट प्वाइंट पर जेब्रा क्रासिंग की फोटो खींची थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विट किया था। फोटोग्राफी के लिए मैं पूरा हिमाचल घूम चुका हूं। आज भी जब मन करता है तो फोटोग्राफी के लिए निकल जाता हूं।
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इन्हें खींचने वाले किसी हुनरमंद से कम नहीं होते। एक बेहतर फोटोग्राफर बनने के लिए धैर्यवान, संवेदनशील और प्रकृति प्रेमी होना बहुत जरूरी है। बुधवार को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे है। आइए, बात करते हैं उन फोटोग्राफरों की, जिनके लिए फोटोग्राफी किसी जुनून से कम नहीं क्योंकि इसके लिए वह किसी भी हद को पार करने के लिए तैयार रहते हैं।
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इनकी फोटो प्रधानमंत्री मोदी तक कर चुके हैं ट्विट
अक्षित वैसे तो साइक्लिस्ट हैं लेकिन फोटोग्राफी उनका जुनून है। अक्षित बताते हैं कि उन्होंने पांच साल की उम्र में फोटोग्राफी शुरू कर दी थी। पिता के पास कई तरह के कैमरे थे। वह हमेशा मुझे अच्छी फोटो खींचने के लिए प्रेरित करते थे। एक बार एक शादी समारोह के दौरान मैंने एक फोटो खींची और पिताजी ने उसकी बहुत तारीफ की। उसके बाद फोटोग्राफी को अपना पैशन बना लिया।
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मैं साइक्लिंग के दौरान तरह-तरफ की फोटो खींचता हूं, जिसे देखकर लोग साइक्लिंग के प्रति प्रोत्साहित होते हैं। पिछले साल मैंने चंडीगढ़ के एक लाइट प्वाइंट पर जेब्रा क्रासिंग की फोटो खींची थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्विट किया था। फोटोग्राफी के लिए मैं पूरा हिमाचल घूम चुका हूं। आज भी जब मन करता है तो फोटोग्राफी के लिए निकल जाता हूं।
संसद हमले मारे गए आतंकियों के पोस्टमार्टम की खींची थी फोटो
पीजीआई के सीनियर फोटोग्राफर अभिजीत सिंह ने बताया कि बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक था। साल 2001 में दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कालेज में फोरेंसिक फोटोग्राफर के पद पर तैनात थे। उसी दौरान संसद में आतंकवादी हमला हुआ था। मारे गए सीआरपीएफ के जवानों और आतंकवादियों के पोस्टमार्टम की फोटो करने के लिए बुलाया गया।
यह केस पूरी दुनिया में छाया हुआ था। फोटो करते वक्त महसूस हुआ कि फोटोग्राफी में भी रोमांच की एक दुनिया है। उसके बाद एक दिलचस्पी पैदा हो गई। पीजीआई में कई गंभीर बीमारियों की फोटो खींचने पड़ते हैं। शोध पेपर में बीमारी की फोटो अब एक अहम हिस्सा बन चुका है। फोटो के आधार पर ही कई गंभीर बीमारियों का पता लगा है। इसके अलावा मैं ट्रेवलिंग की भी फोटो करता हूं।
फोटोग्राफी में जो सुकून, वह कहीं और नहीं
पीजीआई के मनोचिकित्सक डिपार्टमेंट में प्रोफेसर एडिशनल शुभमोहन सिंह ने बताया कि वह बीते 25 वर्षों से फोटोग्राफी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में मैं जब किसी के हाथ में कैमरे को देखता था तो मेरे मन में भी फोटोग्राफी करने की इच्छा पैदा होती थी। कैमरा काफी महंगा आता था। उस वक्त उसे खरीद पाना आसान नहीं होता था। पॉकेट मनी इकट्ठा कर सेकेंड हैंड कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी शुरू कर दी।
जब भी छुट्टी मिलती है, कैमरा लेकर घूमने निकल पड़ता हूं। मुझे वाइल्ड लाइफ, इंडियन रेलवे, ट्रेवलिंग और स्ट्रीट फोटोग्राफी पसंद है। स्ट्रीट फोटोग्राफी के लिए किसी भी अन्य स्थान पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सड़कें हर जगह मिल जातीं हैं। फोटोग्राफी में जो सुकून मिलता है, शायद वह कहीं मिलता हो। फोटोग्राफी में धैर्य और क्रिएटिविटी की काफी जरूरत पड़ती है।
यह केस पूरी दुनिया में छाया हुआ था। फोटो करते वक्त महसूस हुआ कि फोटोग्राफी में भी रोमांच की एक दुनिया है। उसके बाद एक दिलचस्पी पैदा हो गई। पीजीआई में कई गंभीर बीमारियों की फोटो खींचने पड़ते हैं। शोध पेपर में बीमारी की फोटो अब एक अहम हिस्सा बन चुका है। फोटो के आधार पर ही कई गंभीर बीमारियों का पता लगा है। इसके अलावा मैं ट्रेवलिंग की भी फोटो करता हूं।
फोटोग्राफी में जो सुकून, वह कहीं और नहीं
पीजीआई के मनोचिकित्सक डिपार्टमेंट में प्रोफेसर एडिशनल शुभमोहन सिंह ने बताया कि वह बीते 25 वर्षों से फोटोग्राफी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में मैं जब किसी के हाथ में कैमरे को देखता था तो मेरे मन में भी फोटोग्राफी करने की इच्छा पैदा होती थी। कैमरा काफी महंगा आता था। उस वक्त उसे खरीद पाना आसान नहीं होता था। पॉकेट मनी इकट्ठा कर सेकेंड हैंड कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी शुरू कर दी।
जब भी छुट्टी मिलती है, कैमरा लेकर घूमने निकल पड़ता हूं। मुझे वाइल्ड लाइफ, इंडियन रेलवे, ट्रेवलिंग और स्ट्रीट फोटोग्राफी पसंद है। स्ट्रीट फोटोग्राफी के लिए किसी भी अन्य स्थान पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि सड़कें हर जगह मिल जातीं हैं। फोटोग्राफी में जो सुकून मिलता है, शायद वह कहीं मिलता हो। फोटोग्राफी में धैर्य और क्रिएटिविटी की काफी जरूरत पड़ती है।
मेडिटेशन का काम करती है फोटोग्राफी
एफएसएसएआई चंडीगढ़ के डेजिग्नेटिड ऑफिसर सुखविंदर सिंह ने बताया कि वह साल 2008 से फोटोग्राफी कर रहे हैं। उनके पिता को फोटोग्राफी का थोड़ा बहुत शौक था। उनके पास ब्लैक एंड व्हाइट कैमरा था, उस कैमरे को देखने के बाद ही उनमें भी फोटोग्राफी की इच्छा जागी थी, लेकिन उस दौरान वह फोटोग्राफी कर नहीं पाए। उन्होंने बताया कि मुझे आर्ट में दिलचस्पी थी इसलिए जहां भी शहर में प्रदर्शनी लगती, उसे देखने के लिए चला जाता था।
एक दिन लेह-लद्दाख जाने का कार्यक्रम बना। राह चलते कुछ फोटोग्राफी की। उन फोटो को कंपीटीशन में डाली तो कई सारे पुरस्कार व सीनियर की सराहना मिली। उसके बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले सामान्य, फिर बर्ड और अब वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी करता हूं। अब तो फोटोग्राफी मेरे लिए मेडिटेशन का काम करती है। ऊर्जा व क्रिएटिव सोच का संचार होता है। जिसका असर मेरे काम पर भी दिखता है।
एक दिन लेह-लद्दाख जाने का कार्यक्रम बना। राह चलते कुछ फोटोग्राफी की। उन फोटो को कंपीटीशन में डाली तो कई सारे पुरस्कार व सीनियर की सराहना मिली। उसके बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले सामान्य, फिर बर्ड और अब वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी करता हूं। अब तो फोटोग्राफी मेरे लिए मेडिटेशन का काम करती है। ऊर्जा व क्रिएटिव सोच का संचार होता है। जिसका असर मेरे काम पर भी दिखता है।