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रिसर्च: पित्त की थैली में पथरी है तो सावधान, हो सकता है कैंसर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 13 Mar 2016 12:19 AM IST
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पित्त की थैली में पथरी है तो सावधान
- फोटो : file
पित्त की थैली में पथरी होने पर उसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। इस लापरवाही से आगे चलकर गॉल ब्लेडर कैंसर में तब्दील होने के चांस बनते हैं। डिपार्टमेंट की प्रोफेसर उषा दत्ता ने बताया कि पित्त की थैली में पथरी होने पर अक्सर लोग आयुर्वेदिक इलाज में जुट जाते हैं, जबकि मरीज को तुरंत स्पेशलिस्ट डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। 69 मरीज, जिनकी पित्त की थैली में पथरी थी, जब उन्हें बारीकी से देखा गया तो पता चला कि उनमें प्रीकैंसरस लीशन (कैंसर से पहले की स्थिति) पाया गया, जो आगे चलकर कैंसर का रिस्क फैक्टर बढ़ाता है। 80-90 प्रतिशत गॉल ब्लेडर कैंसर के मरीजों की पित्त की थैली में पथरी पाई जाती है। इसका मतलब यह है कि जब भी पित्त की थैली में दर्द हो तो उसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
ऐसे लोगों में पित्त की पथरी होने के ज्यादा चांस
प्रोफेसर उषा दत्ता के मुताबिक विदेशी जनरल में प्रकाशित स्टडीज बताती हैं कि जो लोग मोटे होते हैं या जिन्हें डायबिटीज की शिकायत होती है या फिर जो बुजुर्ग होते हैं, उनमें पित्त की थैली में पथरी के चांस ज्यादा होते हैं, लेकिन यहां पर देखा गया है कि जिन लोगों में प्रोटीन की कमी होती है, उनमें पथरी होने की संभावना अधिक होती है। आयरन की कमी वालों में पथरी की शिकायत देखी गई है। कई बार पतले लोगों में पथरी होती है। उसकी वजह खाने में फैट की मात्रा ज्यादा होना है।
पित्त की थैली को सुखाने की दवा भी
पथरी होने पर उसका ऑपरेशन करवा देना चाहिए। ऑपरेशन के बाद थैली का कार्य पित्त की नली संभाल लेती है। उसके बाद शरीर में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती। बाजार में अब पित्त की थैली को सुखाने की दवा भी आ चुकी है, लेकिन यह उन मरीजों को ही दी जाती है, जिनकी थैली काम कर रही होती है। दिक्कत उन मरीजों में ही आती है, जो पथरी होने पर अनदेखी कर जाते हैं।
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ऐसे लोगों में पित्त की पथरी होने के ज्यादा चांस
प्रोफेसर उषा दत्ता के मुताबिक विदेशी जनरल में प्रकाशित स्टडीज बताती हैं कि जो लोग मोटे होते हैं या जिन्हें डायबिटीज की शिकायत होती है या फिर जो बुजुर्ग होते हैं, उनमें पित्त की थैली में पथरी के चांस ज्यादा होते हैं, लेकिन यहां पर देखा गया है कि जिन लोगों में प्रोटीन की कमी होती है, उनमें पथरी होने की संभावना अधिक होती है। आयरन की कमी वालों में पथरी की शिकायत देखी गई है। कई बार पतले लोगों में पथरी होती है। उसकी वजह खाने में फैट की मात्रा ज्यादा होना है।
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पित्त की थैली को सुखाने की दवा भी
पथरी होने पर उसका ऑपरेशन करवा देना चाहिए। ऑपरेशन के बाद थैली का कार्य पित्त की नली संभाल लेती है। उसके बाद शरीर में किसी तरह की दिक्कत नहीं आती। बाजार में अब पित्त की थैली को सुखाने की दवा भी आ चुकी है, लेकिन यह उन मरीजों को ही दी जाती है, जिनकी थैली काम कर रही होती है। दिक्कत उन मरीजों में ही आती है, जो पथरी होने पर अनदेखी कर जाते हैं।
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पथरी से क्या-क्या नुकसान
पीजीआई चंडीगढ़
- फोटो : file
भारत में पांच से दस प्रतिशत लोगों में पथरी की शिकायत पाई जाती है। यदि पथरी होती है तो सबसे पहले वह पित्त की थैली में दर्द करेगा। थैली से पथरी निकलकर कई बार पित्त की नली में फंस जाती है, इससे मरीजों को पीलिया हो जाता है। नीचे आकर वह पेनक्राइटिस कर जाता है। इसलिए मरीजों को पथरी की शिकायत को हलके में नहीं लेना चाहिए।
ये कदम उठाएं, नहीं होगी पथरी
1. खाना समय पर खाएं
2. तला-भुना भोजन कम से कम खाएं
3. रोज एक्सरसाइज करें
4. वजन को कंट्रोल करें
5. भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
6. प्रोटीन से भरपूर चीजें, पनीर, दाल और नॉनवेज भोजन में लें।
प्रोफेसर उषा को मिला अवार्ड
पित्त की थैली में पथरी से प्रीकैंसरस लीशन विकसित होने की खोज करने पर पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर उषा दत्ता को इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी की ओर से बेस्ट प्लीनरी पेपर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।
ये कदम उठाएं, नहीं होगी पथरी
1. खाना समय पर खाएं
2. तला-भुना भोजन कम से कम खाएं
3. रोज एक्सरसाइज करें
4. वजन को कंट्रोल करें
5. भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं
6. प्रोटीन से भरपूर चीजें, पनीर, दाल और नॉनवेज भोजन में लें।
प्रोफेसर उषा को मिला अवार्ड
पित्त की थैली में पथरी से प्रीकैंसरस लीशन विकसित होने की खोज करने पर पीजीआई के गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी डिपार्टमेंट की प्रोफेसर उषा दत्ता को इंडियन सोसायटी ऑफ गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी की ओर से बेस्ट प्लीनरी पेपर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।