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पीजीआई अपने ही कर्मचारियों को नहीं दे रहा कोविड की रिपोर्ट
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चंडीगढ़। महामारी के इस दौर में पीजीआई चंडीगढ़ के अलावा दूसरे प्रदेशों से आने वाले मरीजों की जांच व इलाज करने में अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन, वह अपने कर्मचारियों के लिए लापरवाह रवैया अपनाए हुए है। स्थिति यह है कि पीजीआई के किसी भी कर्मचारी के संक्रमित होने पर उसे इसकी रिपोर्ट नहीं दे रहा है। रिपोर्ट के नाम पर कम्युनिटी मेडिसिन से उसके पास महज एक कॉल आती है।
इसके अलावा संक्रमित होने के दौरान उसे क्या सावधानी बरतनी है यह बताने वाला भी कोई नहीं है। इतना ही नहीं पीजीआई का संक्रमित कर्मचारी कोरोना की चपेट में आने के बाद मास्क, बुखार की दवा और अन्य ऐसी ही चीजों के लिए परेशान हो रहा है। इस संबंध में पीजीआई के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने कोवा सीएचडी एप का हवाला देते हुए यह कहा कि यह समस्या कुछ दिनों में दूर हो जाएगी। लेकिन, किसी ने यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर वे अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं।
केस- 1
नया गांव निवासी पीजीआई की एक नर्सिंग स्टाफ ने लक्षण दिखने पर कोरोना जांच के लिए अपना नमूना सीडी वार्ड में दिया। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कम्युनिटी मेडिसिन से बस एक कॉल आई कि वह संक्रमित है। लेकिन, उसे संक्रमण के दौरान क्या सावधानी बरतनी है इसकी कोई भी जानकारी नहीं दी गई और ना ही कोई किट उपलब्ध कराया गया।
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केस- 2
नया गांव निवासी पीजीआई की दूसरी नर्सिंग स्टाफ ने अपना जांच नमूना मरीजों के नमूनों के साथ ही सीडी वार्ड में भेजा। पंजाब का पता लिखा होने के कारण व मरीजों के साथ ही उसका भी नमूना आने से उसे मोबाइल पर संक्रमित होने का मैसेज आया। वहीं पंजाब सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग ने उसके घर पर जाकर उसे थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर, मास्क व जरूरी दवाओं का किट भी उपलब्ध कराया।
बॉक्स
देखभाल के नाम पर खानापूर्ति
पीजीआई के कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें केवल एक डॉक्टर का नंबर दे दिया जाता है और कहा जाता है कि सिर्फ सांस संबंधी परेशानी होने पर ही इस नंबर पर कॉल करें। स्थिति गंभीर होने पर नेहरू एक्सटेंशन कोविड-19 अस्पताल में जाकर भर्ती हो जाएं। इसके अलावा अगर संक्रमित को बुखार, खांसी और गले में खराश या फिर कोई अन्य परेशानी होती है तो उसे क्या करना है यह बताने वाला कोई भी नहीं है।
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इसके अलावा संक्रमित होने के दौरान उसे क्या सावधानी बरतनी है यह बताने वाला भी कोई नहीं है। इतना ही नहीं पीजीआई का संक्रमित कर्मचारी कोरोना की चपेट में आने के बाद मास्क, बुखार की दवा और अन्य ऐसी ही चीजों के लिए परेशान हो रहा है। इस संबंध में पीजीआई के जिम्मेदार अधिकारियों से बात करने पर उन्होंने कोवा सीएचडी एप का हवाला देते हुए यह कहा कि यह समस्या कुछ दिनों में दूर हो जाएगी। लेकिन, किसी ने यह बताने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर वे अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं।
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केस- 1
नया गांव निवासी पीजीआई की एक नर्सिंग स्टाफ ने लक्षण दिखने पर कोरोना जांच के लिए अपना नमूना सीडी वार्ड में दिया। उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कम्युनिटी मेडिसिन से बस एक कॉल आई कि वह संक्रमित है। लेकिन, उसे संक्रमण के दौरान क्या सावधानी बरतनी है इसकी कोई भी जानकारी नहीं दी गई और ना ही कोई किट उपलब्ध कराया गया।
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केस- 2
नया गांव निवासी पीजीआई की दूसरी नर्सिंग स्टाफ ने अपना जांच नमूना मरीजों के नमूनों के साथ ही सीडी वार्ड में भेजा। पंजाब का पता लिखा होने के कारण व मरीजों के साथ ही उसका भी नमूना आने से उसे मोबाइल पर संक्रमित होने का मैसेज आया। वहीं पंजाब सरकार की तरफ से स्वास्थ्य विभाग ने उसके घर पर जाकर उसे थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर, मास्क व जरूरी दवाओं का किट भी उपलब्ध कराया।
बॉक्स
देखभाल के नाम पर खानापूर्ति
पीजीआई के कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें केवल एक डॉक्टर का नंबर दे दिया जाता है और कहा जाता है कि सिर्फ सांस संबंधी परेशानी होने पर ही इस नंबर पर कॉल करें। स्थिति गंभीर होने पर नेहरू एक्सटेंशन कोविड-19 अस्पताल में जाकर भर्ती हो जाएं। इसके अलावा अगर संक्रमित को बुखार, खांसी और गले में खराश या फिर कोई अन्य परेशानी होती है तो उसे क्या करना है यह बताने वाला कोई भी नहीं है।