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पीजीआई... चंडीगढ़ की शान और मरीजों के लिए वरदान, संस्थान रिसर्च वर्क में भी रहता है आगे

Mon, 20 Jul 2020 03:15 PM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 20 Jul 2020 03:15 PM IST
सार

  • कोरोना महामारी में कई राज्यों के मरीजों को मिल रहा इलाज,
  • एनआईआरएफ की रैंकिंग में लगातार तीसरे साल दबदबा कायम
  • एमडब्ल्यू वैक्सीन के ट्रायल के लिए देशभर के तीन संस्थानों में शामिल

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PGI Chandigarh Success Story and Working System
पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना महामारी के बीच जहां हर तरफ इस वायरस से बचाव और संक्रमण रोकने की बात हो रही है। वहीं, पीजीआई चंडीगढ़ ने इलाज के साथ रिसर्च वर्क में अपनी सफलता का क्रम जारी रखा है। एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार तीसरे साल पीजीआई ने दूसरे पायदान पर अपना दबदबा कायम रखते यह साबित कर दिया कि बेहतर इलाज और सुविधाओं के मामले में पीजीआई का कोई जवाब नहीं।
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कोरोना महामारी में लोग अस्पतालों की ओपीडी बंद होने से परेशान थे, ऐसे में पीजीआई ने मरीजों के इलाज के लिए टेली कंसल्टेशन सर्विस की सुविधा शुरू कर दी है। इतना ही नहीं कोरोना के इलाज के लिए देश के जिन तीन चिकित्सा संस्थानों को वैक्सीन के ट्रायल के लिए चुना गया है, उसमें भी चंडीगढ़ का पीजीआई शामिल है।
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तीन साल से जारी है सफलता का क्रम
केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में शिक्षण और मेडिकल कॉलेजों की रैंकिंग में पीजीआई अपनी कैटेगरी में लगातार तीसरे साल 2020 में भी देश के दूसरे सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान के रूप में चुना गया है। 2019 में भी पीजीआई मेडिकल के क्षेत्र में ओवरऑल कैटेगिरी में एम्स के बाद दूसरे नंबर पर रहा था।
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पीजीआई का मेडिकल के क्षेत्र में 118 इंस्टीट्यूट्स से मुकाबला था, इनमें पीजीआई ने 80.6 स्कोर के साथ दूसरे स्थान हासिल किया है। वहीं एम्स 90.69 स्कोर के साथ पहले स्थान पर रहा है। पीजीआई को पिछले साल 77.88 स्कोर मिले थे, जबकि इस साल 80.6 स्कोर रहा है। इसके लिए पूरे देश में 118 संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा हुई थी।

पिछले तीन साल कुछ ऐसी रही रैंकिंग

2018 में पीजीआई को मिले अंक (100 में से )
टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्स - 82.5
रिसर्च, प्रोफेशनल प्रैक्टिस एंड कोलैबोरेटिव- 81.76
ग्रेजुएशन आउटकम्स - 83.05
आउटरीच एंड इंक्लूसिविटी- 72.15
परसेप्शन- 56.19

2019 में पीजीआई को मिले अंक (100 में से )
टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्स - 78.60
रिसर्च प्रोफेशनल प्रैक्टिस एंड कोलैबोरेटिव- 84.47
ग्रेजुएशन आउटकम्स - 76.99
आउटरीच एंड इंक्लूसिविटी- 70.74
परसेप्शन- 64.87

2020 में पीजीआई को मिले अंक (100 में से )
टीचिंग लर्निंग एंड रिसोर्स - 81.14
रिसर्च, प्रोफेशनल प्रैक्टिस एंड कोलैबोरेटिव- 82.46
ग्रेजुएशन आउटकम्स - 86.16
आउटरीच एंड इंक्लूसिविटी- 66.08
परसेप्शन- 71.44

पीजीआई में इलाज के लिए देशभर से पहुंचते हैं मरीज

पीजीआई में सिर्फ चंडीगढ़ ही नहीं देश के लगभग सभी शहरों के मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें देश के सात प्रदेशों के मरीज इलाज के लिए बड़ी संख्या में आते हैं। इनमें चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के मरीज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के भी काफी मरीज इलाज के लिए पीजीआई आते हैं।

किस राज्य से कितने मरीज पहुंचते हैं इलाज के लिए
राज्य               मरीज            प्रतिशत
पंजाब              1087420         19.0
चंडीगढ़            546468           37.9
हरियाणा           541764            18.9
हिमाचल प्रदेश     359273           12.5
उत्तर प्रदेश         133554             4.7
जम्मू कश्मीर       74131             1.2
अन्य राज्य         91970               3.2

इलाज के साथ विशेषज्ञ भी करता है तैयार पीजीआई

पीजीआई चंडीगढ़ में एक ओर जहां हर साल लाखों मरीजों का इलाज किया जा रहा है, वहीं हर साल यहां 100 से 150 मेडिकल विशेषज्ञ भी तैयार किए जा रहे हैं। इन विशेषज्ञों के बल पर ही पीजीआई में क्लीनिकल हीमेटोलाजी, ऑंकोलाजी एंड बोनमैरो सेंटर, पीडियाएट्रिक सर्जरी, हीपेटोलॉजी डिपार्टमेंट, रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी, रूमेटोलॉजी जैसे विंग में बेहद गंभीर मरीजों को जीवनदान देने में सफलता हासिल कर रहा है।

कोरोना वैक्सीन पर कर रहा ट्रायल
कोरोना को मात देने के लिए पीजीआई को माइकोबैक्टीरियम वैक्सीन (एमडब्ल्यू) पर ट्रायल करने के लिए भी चुना गया है। इसके लिए देशभर से केवल तीन चिकित्सा संस्थानों को चुना गया है, जिसमें पीजीआई ने अपनी जगह बनाई है। माइकोबैक्टीरियम वैक्सीन (एमडब्ल्यू) पर शुरू किए गए ट्रायल का पहला फेज यानी सुरक्षा ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह वैक्सीन के ट्रायल का प्रथम चरण है। ऐसे कई चरणों से गुजरने के बाद इस वैक्सीन की कोरोना वायरस के इलाज में उपयोगिता सिद्ध हो पाएगी।

पीजीआई चिकित्सा संस्थान होने के नाते रिसर्च पर फोकस करते हुए अपने मरीजों को बेहतर इलाज के लिए नई तकनीक ईजाद करने में जुटा हुआ है। साथ ही हमारा मुख्य फोकस देश के कोने-कोने से आने वाले मरीजों को सही समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराना भी है। इसमें पीजीआई के विशेषज्ञों के साथ ही छोटी सी छोटी कड़ी बेहद महत्वपूर्ण है। कोरोना महामारी के कारण कुछ हद तक कार्य प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद पीजीआई अपने अकादमिक और अस्पताल की सारी गतिविधियों को सुचारु रूप से चलाने का पूरा प्रयास कर रहा है। इसमें काफी हद तक सफल भी हैं।
- प्रो. जगतराम, डायरेक्टर, पीजीआई
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