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चंडीगढ़ः 174 करोड़ में बनी इमारत, शौचालय की फॉल्स सीलिंग गिरने कर्मी घायल, उठे सवाल
Fri, 17 Jan 2020 10:53 AM IST
खुशबू गोयल
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 17 Jan 2020 10:53 AM IST
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शौचालय की छत गिरी
- फोटो : अमर उजाला
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देश में अपनी तरह की खास इमारत का दर्जा प्राप्त कर चुकी पीजीआई के नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक की बिल्डिंग में दूसरे तल पर स्थित शौचालय की फॉल्स सीलिंग (कृत्रिम छत) अचानक गिर गई। इससे एक कर्मचारी चोटिल हो गया। आनन-फानन में कर्मचारी को इलाज के लिए ले जाया गया। इस दौरान वहां तैनात अन्य कर्मचारियों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है, इस तरह की एक-दो घटनाएं यहां पहले भी हो चुकी हैं।
बीते जून माह में आई हल्की आंधी के दौरान यहां ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे के दरवाजे में दरार पड़ गई थी। इसे छुपाने के लिए आनन-फानन में दरवाजे को चौखट समेत निकालकर उसकी जगह दूसरा दरवाजा लगाया गया था। सीपीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई इस बिल्डिंग की गुणवत्ता ऐसी घटनाओं के कारण अब शक के दायरे में आ गई है। वहीं, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि अब तक बिल्डिंग हैंडओवर नहीं की गई है, इसलिए ऐसी किसी घटना के लिए पीजीआई प्रशासन जवाबदेह नहीं है।
अब सवाल यह उठता है कि जब पीजीआई प्रशासन ने बिल्डिंग को अपने हाथ में नहीं लिया है तो यहां बड़ी संख्या में मरीजों को क्यों भर्ती किया गया है। सैकड़ों मरीजों को यहां भर्ती कर उनकी जान क्यों खतरे में डाली गई है। बता दें कि इस बिल्डिंग के उद्घाटन की तिथि कई बार टाली जा चुकी है। बिना उद्घाटन के ही बीते अगस्त माह से इस बिल्डिंग में चार विभागों की ओपीडी के साथ मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।
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बीते जून माह में आई हल्की आंधी के दौरान यहां ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे के दरवाजे में दरार पड़ गई थी। इसे छुपाने के लिए आनन-फानन में दरवाजे को चौखट समेत निकालकर उसकी जगह दूसरा दरवाजा लगाया गया था। सीपीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई इस बिल्डिंग की गुणवत्ता ऐसी घटनाओं के कारण अब शक के दायरे में आ गई है। वहीं, पीजीआई प्रशासन का कहना है कि अब तक बिल्डिंग हैंडओवर नहीं की गई है, इसलिए ऐसी किसी घटना के लिए पीजीआई प्रशासन जवाबदेह नहीं है।
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अब सवाल यह उठता है कि जब पीजीआई प्रशासन ने बिल्डिंग को अपने हाथ में नहीं लिया है तो यहां बड़ी संख्या में मरीजों को क्यों भर्ती किया गया है। सैकड़ों मरीजों को यहां भर्ती कर उनकी जान क्यों खतरे में डाली गई है। बता दें कि इस बिल्डिंग के उद्घाटन की तिथि कई बार टाली जा चुकी है। बिना उद्घाटन के ही बीते अगस्त माह से इस बिल्डिंग में चार विभागों की ओपीडी के साथ मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।
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इस बिल्डिंग में भर्ती हैं करीब 300 मरीज
पीजीआई में पहले कुल 1850 बेड थे, जिसमें नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक के 334 बेड को मिलाने पर उनकी संख्या बढ़कर 2184 हो गई है। 334 बेड वाली नई बिल्डिंग में नेहरू हॉस्पिटल के चार डिपार्टमेंट ईएनटी, रेडियोथैरेपी, हीप्टोलॉजी (लिवर) और एंडोक्राइनोलॉजी को शिफ्ट किया गया है।
मौजूदा समय में इन चारों विभागों के लगभग तीन सौ मरीज यहां भर्ती हैं। यहां 80 प्राइवेट वार्ड हैं जबकि 9 ऑपरेशन थियेटर हैं। इस नई बिल्डिंग के बन जाने से पीजीआई को काफी राहत मिली है लेकिन बिना हैंडओवर के बिल्डिंग में मरीजों को भर्ती कर इलाज करना पीजीआई प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है।
आपत्तियों के चलते 2013 से 17 तक बंद रहा निर्माणकार्य
पीजीआई के इस हॉस्पिटल की स्वीकृति साल 2010 में मिली थी। साल 2013 में कुछ आपत्तियों के कारण इसका निर्माण बंद हो गया था। चार साल तक निर्माण बंद होने से इस प्रोजेक्ट की करीब 90 करोड़ रुपये की कास्ट भी बढ़ी। साल 2017 में इसका निर्माण फिर से शुरू हुआ और हॉस्पिटल के निर्माण के लिए अतिरिक्त ग्रांट और डॉक्टरों की पोस्ट भी स्वीकृत करवाई।
मौजूदा समय में इन चारों विभागों के लगभग तीन सौ मरीज यहां भर्ती हैं। यहां 80 प्राइवेट वार्ड हैं जबकि 9 ऑपरेशन थियेटर हैं। इस नई बिल्डिंग के बन जाने से पीजीआई को काफी राहत मिली है लेकिन बिना हैंडओवर के बिल्डिंग में मरीजों को भर्ती कर इलाज करना पीजीआई प्रशासन के लिए गले की फांस बनता जा रहा है।
आपत्तियों के चलते 2013 से 17 तक बंद रहा निर्माणकार्य
पीजीआई के इस हॉस्पिटल की स्वीकृति साल 2010 में मिली थी। साल 2013 में कुछ आपत्तियों के कारण इसका निर्माण बंद हो गया था। चार साल तक निर्माण बंद होने से इस प्रोजेक्ट की करीब 90 करोड़ रुपये की कास्ट भी बढ़ी। साल 2017 में इसका निर्माण फिर से शुरू हुआ और हॉस्पिटल के निर्माण के लिए अतिरिक्त ग्रांट और डॉक्टरों की पोस्ट भी स्वीकृत करवाई।
कई खूबियां हैं इस बिल्डिंग में
इस हॉस्पिटल को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (सीपीडब्ल्यूडी) ने तैयार किया है। यह भारत का पहला ऐसा सरकारी हॉस्पिटल है, जिसे ग्रीन बिल्डिंग बनाने के लिए प्लेटिनम सर्टिफिकेट मिला है। यह एक ऐसी बिल्डिंग है, जिसमें बिजली बचाने के हाईटेक उपकरण लगे हैं, जो हर साल चार करोड़ रुपये की बिजली और एक हजार लीटर पानी रोजाना बचाएंगे।
यहां ऑटोमेटेड मैटीरियल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया गया है, जिसकी मदद से सैंपल सीधे लैब में मात्र 30 सेकेंड में भेजे जा सकेंगे, जिसे अब तक मरीज या तीमारदार को ले जाना पड़ता था। सेंट्रल एयर क्लीनर एसी की हवा को साफ करके भेजेगा, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। हॉस्पिटल के बाहर बने गार्डन में औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो दूषित हवा को साफ करने का काम करेंगे।
ग्राउंड फ्लोर पर फैकल्टी रूम, एडमिनिस्ट्रेशन, कैफेटेरिया व रेडिएशन थेरेपी विंग है। फर्स्ट फ्लोर पर ईएनटी के 47 वार्ड व माइनर ओटी है। दूसरे फ्लोर पर हीप्टोलाजी विंग व 45 बेड के अतिरिक्त एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के साथ 36 बेड हैं। तीसरे फ्लोर पर 78 प्राइवेट रूम हैं, वहीं चौथे फ्लोर पर 10 ओटी, आईसीयू व सीसीयू बनाए गए हैं।
अभी उस बिल्डिंग में निर्माण कार्य चल रहा है। पीजीआई ने उसे हैंडओवर नहीं लिया है। फॉल्स सीलिंग का गिरना सामान्य बात है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी से इस संबंध में वार्ता की जा चुकी है, ताकि आगे इस तरह की दुर्घटना न हो सके।
- प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
बिल्डिंग में अब भी जगह-जगह काम चल रहा है। पीजीआई प्रशासन अपनी जरूरत के अनुसार उसमें फेरबदल करा रहा है। लगभग हर एरिया में कुछ न कुछ बदलाव किया जा रहा है। सेकेंड फ्लोर के शौचालय में भी कुछ काम चल रहा है। इस कारण ये घटना हो गई।
- राजीव साव, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, सीपीडब्ल्यूडी
यहां ऑटोमेटेड मैटीरियल ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया गया है, जिसकी मदद से सैंपल सीधे लैब में मात्र 30 सेकेंड में भेजे जा सकेंगे, जिसे अब तक मरीज या तीमारदार को ले जाना पड़ता था। सेंट्रल एयर क्लीनर एसी की हवा को साफ करके भेजेगा, जिससे इंफेक्शन का खतरा कम होगा। हॉस्पिटल के बाहर बने गार्डन में औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो दूषित हवा को साफ करने का काम करेंगे।
ग्राउंड फ्लोर पर फैकल्टी रूम, एडमिनिस्ट्रेशन, कैफेटेरिया व रेडिएशन थेरेपी विंग है। फर्स्ट फ्लोर पर ईएनटी के 47 वार्ड व माइनर ओटी है। दूसरे फ्लोर पर हीप्टोलाजी विंग व 45 बेड के अतिरिक्त एंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के साथ 36 बेड हैं। तीसरे फ्लोर पर 78 प्राइवेट रूम हैं, वहीं चौथे फ्लोर पर 10 ओटी, आईसीयू व सीसीयू बनाए गए हैं।
अभी उस बिल्डिंग में निर्माण कार्य चल रहा है। पीजीआई ने उसे हैंडओवर नहीं लिया है। फॉल्स सीलिंग का गिरना सामान्य बात है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी से इस संबंध में वार्ता की जा चुकी है, ताकि आगे इस तरह की दुर्घटना न हो सके।
- प्रो. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता
बिल्डिंग में अब भी जगह-जगह काम चल रहा है। पीजीआई प्रशासन अपनी जरूरत के अनुसार उसमें फेरबदल करा रहा है। लगभग हर एरिया में कुछ न कुछ बदलाव किया जा रहा है। सेकेंड फ्लोर के शौचालय में भी कुछ काम चल रहा है। इस कारण ये घटना हो गई।
- राजीव साव, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, सीपीडब्ल्यूडी