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807 टीचर्स को बड़ा झटका, भर्ती को चुनौती, हाईकोर्ट में याचिका
ब्यूरो, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Jul 2016 10:15 AM IST
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highcourt
- फोटो : फाइल फोटो
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3206 टीचर्स की भर्ती के मामले के बाद अब चौटाला शासन काल में हुई 807 हिन्दी टीचर्स की भर्ती को चुनौती दी गई है। भर्ती को चुनौती देती याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और नियुक्त टीचरों को नोटिस जारी किया है। मामले की सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
भर्ती ओमप्रकाश चौटाला के शासन के दौरान हुई थी। वहीं, जस्टिस तेजिंदर सिंह ढींढसा की बेंच के समक्ष बुधवार को आया, यह मामला वर्ष 2000 से हाईकोर्ट में जारी है। इससे पहले जस्टिस के. कानन ने इसी मामले से संबद्ध याचिका पर फैसला देते हुए नियुक्तियों को खारिज कर दिया था लेकिन आर्डर लागू नहीं होने के बाद इस मामले में जल्द सुनवाई की अपील की गई थी।
बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस ढींढसा ने पहले से जारी आदेशों की बजाए सभी प्रतिवादियों की बात सुनने के बाद फैसला देने की बात कही और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया। याचिकाकर्ता सुनीता रानी व अन्य की ओर से पेश हुए एडवोकेट चंद्रशेखर सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा में उक्त हिंदी टीचरों की भरती किसी तय मानदंड के अनुसार नहीं की गई थी।
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यह नियुक्तियां न तो एसएसएससी के जरिए और न ही किसी अन्य अधिकृत तरीके से की गई थीं। याचिका में उक्त नियुक्तियों को रद करने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच करान की मांग की गई है।
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भर्ती ओमप्रकाश चौटाला के शासन के दौरान हुई थी। वहीं, जस्टिस तेजिंदर सिंह ढींढसा की बेंच के समक्ष बुधवार को आया, यह मामला वर्ष 2000 से हाईकोर्ट में जारी है। इससे पहले जस्टिस के. कानन ने इसी मामले से संबद्ध याचिका पर फैसला देते हुए नियुक्तियों को खारिज कर दिया था लेकिन आर्डर लागू नहीं होने के बाद इस मामले में जल्द सुनवाई की अपील की गई थी।
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बुधवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस ढींढसा ने पहले से जारी आदेशों की बजाए सभी प्रतिवादियों की बात सुनने के बाद फैसला देने की बात कही और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर दिया। याचिकाकर्ता सुनीता रानी व अन्य की ओर से पेश हुए एडवोकेट चंद्रशेखर सिंह ने अदालत को बताया कि हरियाणा में उक्त हिंदी टीचरों की भरती किसी तय मानदंड के अनुसार नहीं की गई थी।
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यह नियुक्तियां न तो एसएसएससी के जरिए और न ही किसी अन्य अधिकृत तरीके से की गई थीं। याचिका में उक्त नियुक्तियों को रद करने और पूरे मामले की सीबीआई से जांच करान की मांग की गई है।