Kurukshetra News: धूमधाम से लोगों ने मनाई दुर्गा अष्टमी, किया कंजक पूजन, महानवमी में भी बना शुभ मुहूर्त
23 अक्तूबर को कन्या पूजन मुहूर्त सुबह छह बजकर 27 मिनट से सुबह सात बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह नौ बज कर 16 मिनट से सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।
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दुर्गा अष्टमी पर्व धर्म नगरी कुरुक्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। रविवार सुबह कंजक पूजन हुआ। सुबह पहले श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जाकर मां दुर्गा की अराधना की। इसके बाद अपने घरों में पहुंच कर कंजकों को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराया। इससे पहले सभी कंजकों के जल से पैर धोकर उनके माथे पर तिलक किया। बाद में सभी कंजकों को हलवा, पूरी का भोजन करवा कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी कंजकों को उपहार दिया गया।
पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि आठवें नवरात्र पर पूजन के बाद व्रत रखने वाले श्रद्धालु़ओं ने आज अपना व्रत खोल लिया। आठ दिनों से नवरात्रों के चलते श्रद्धालुओं ने व्रत रखा था। नवरात्र में पूजा अर्चना करने से मां सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मां दुर्गा के पावन चरणों में पूजा अर्चना करने वाले साधकों को कन्या पूजन के लिए कन्याओं को ढूंढने में भारी मशक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्राचीन काल से मान्यता चली रही है कि जो साधक नवरात्र का व्रत कर अष्टमी के दिन कन्याओं की पूजा कर उन्हें श्रद्धापूर्वक भोजन करवाते हैं, उन पर मां भगवती अपना आशीर्वाद रखती हैं। लोगों ने पूरे विधि विधान पूर्वक 7, 9, 11 कन्याओं के पांव धोए, तिलक लगाया और हाथों में मोली बांधकर हलवे पूरी का प्रसाद खिलाया।
कुछ भक्त नवमी पर भी करेंगे कंजक पूजन
कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं। इस बार नवमी तिथि 23 अक्तूबर को सोमवार के दिन पड़ रही है। इसे महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। नवमी तिथि 22 अक्तूबर को शाम सात बजकर 58 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 23 अक्तूबर को शाम पांच बजकर 44 मिनट पर होगा।
महानवमी पर ये है कन्या पूजन का मुहूर्त
23 अक्तूबर को कन्या पूजन मुहूर्त सुबह छह बजकर 27 मिनट से सुबह सात बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह नौ बज कर 16 मिनट से सुबह 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इस दिन अन्य पूजन मुहूर्त दोपहर एक बजकर 30 मिनट से दोपहर दो बजकर 55 मिनट तक और उसके बाद दोपहर दो बजकर 55 मिनट से शाम चार बजकर 19 मिनट तक होगा।

ऐसे करें कन्या पूजन
विधि शास्त्रों के मुताबिक, नवरात्रि की अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्याओं को उनके घर जाकर निमंत्रण दें। गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नामों के जयकारे लगाएं। अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह पर बिठाएं। सभी के पैरों को दूध से भरे थाल में रखकर अपने हाथों से धोएं। कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छानुसार भोजन कराएं। भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीष लें।