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पर्ल्स ग्रुप के खिलाफ जंग पहुंची थाने, अलॉटियों ने दी शिकायत
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
Updated Fri, 25 Mar 2016 09:13 AM IST
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रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने कंपनी के मुलाजिमों के खिलाफ थाना सोहाना में शिकायत दी
- फोटो : amarujala
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पर्ल्स के प्रबंधकों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। गमाडा द्वारा शिकंजा कस जाने के बाद अब सेक्टर-100 व 104 की पर्ल्स रेजिडेंशियल कांप्लेक्स के लोग भी संघर्ष की राह पर आ गए हैं। इलाके की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने कंपनी के मुलाजिमों के खिलाफ थाना सोहाना में शिकायत दी है।
अलॉटियों ने आरोप लगाया कि कंपनी का स्टाफ सेक्टर-100 व 104 को विकसित करने के लिए आए सामान को चुपके से बेच रहा है। उन्होंने ऐसा करते हुए स्टाफ को रंगे हाथों काबू किया है। एसोसिएशन ने मांग की है कि कंपनी के मुलाजिमों पर केस दर्ज किया जाए। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के मेंबरों ने बताया कि कंपनी के मुलाजिम व अधिकारी मिलकर सेक्टर-100 व 104 को विकसित करने के लिए जो मैटीरियल आया था। उसे चुपके से बेच रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने पर्ल्स सिटी में करोड़ों की लागत से प्लॉट खरीदें थे।
इसके अलावा कंपनी को दी जाने वाली सुविधाओं के बदले मोटी अदायगी की थी। ऐसे में कंपनी इलाके को विकसित करने के लिए जो सामान आया हो, उसे चुपके से बेच नहीं सकती है। सोहाना थाने के एसएचओ राजीव कुमार ने कहा कि उनके पास शिकायत आई है। मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कंपनी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। जिक्रयोग है कि इससे पहले गमाडा द्वारा कंपनी को 96 सेक्टर में विकास करने पर नोटिस जारी किया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर कंपनी ने पंद्रह दिन में इलाके में विकास नहीं किया तो उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा।
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जब रोकने की कोशिश तो धमकाने लगे
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के लिए 35 हजार रुपये मेंबरशिप फीस दी है। इसमें स्वीमिंग पूल व क्लब हाउस शामिल हैं। लेकिन, जब इस भवन की साइट पर गए तो वहां पर कुछ लोग ट्रकों में सामान भर रहे थे। इसमें अधिकतर कंस्ट्रक्शन मैटीरियरल था। जब उन्होंने उसे रोकने की कोशिश तो कंपनी वाले उन्हें धमकाने लगे।
गमाडा लोगों के हितों को देखे
पर्ल्स रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान कुलबीर सिंह सिद्धू, वाइस प्रेसिडेंट कर्नल इंद्र पाल सिंह व महासचिव जसपाल सिंह ने बताया कि वह काफी परेशानी में चल रहे हैं। क्योंकि अभी तक इलाके का विकास नहीं हो रहा है। दूसरा अगर कंपनी का लाइसेंस कैंसिल हो जाता है तो इलाके का विकास कौन करेगा। उन्होंने मांग की है कि इलाके के विकास की जिम्मेदारी गमाडा खुद उठाए, ताकि लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।
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अलॉटियों ने आरोप लगाया कि कंपनी का स्टाफ सेक्टर-100 व 104 को विकसित करने के लिए आए सामान को चुपके से बेच रहा है। उन्होंने ऐसा करते हुए स्टाफ को रंगे हाथों काबू किया है। एसोसिएशन ने मांग की है कि कंपनी के मुलाजिमों पर केस दर्ज किया जाए। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के मेंबरों ने बताया कि कंपनी के मुलाजिम व अधिकारी मिलकर सेक्टर-100 व 104 को विकसित करने के लिए जो मैटीरियल आया था। उसे चुपके से बेच रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने पर्ल्स सिटी में करोड़ों की लागत से प्लॉट खरीदें थे।
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इसके अलावा कंपनी को दी जाने वाली सुविधाओं के बदले मोटी अदायगी की थी। ऐसे में कंपनी इलाके को विकसित करने के लिए जो सामान आया हो, उसे चुपके से बेच नहीं सकती है। सोहाना थाने के एसएचओ राजीव कुमार ने कहा कि उनके पास शिकायत आई है। मामले की जांच की जा रही है। दोषी पाए जाने पर कंपनी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। जिक्रयोग है कि इससे पहले गमाडा द्वारा कंपनी को 96 सेक्टर में विकास करने पर नोटिस जारी किया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि अगर कंपनी ने पंद्रह दिन में इलाके में विकास नहीं किया तो उसका लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा।
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जब रोकने की कोशिश तो धमकाने लगे
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने कंपनी द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं के लिए 35 हजार रुपये मेंबरशिप फीस दी है। इसमें स्वीमिंग पूल व क्लब हाउस शामिल हैं। लेकिन, जब इस भवन की साइट पर गए तो वहां पर कुछ लोग ट्रकों में सामान भर रहे थे। इसमें अधिकतर कंस्ट्रक्शन मैटीरियरल था। जब उन्होंने उसे रोकने की कोशिश तो कंपनी वाले उन्हें धमकाने लगे।
गमाडा लोगों के हितों को देखे
पर्ल्स रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान कुलबीर सिंह सिद्धू, वाइस प्रेसिडेंट कर्नल इंद्र पाल सिंह व महासचिव जसपाल सिंह ने बताया कि वह काफी परेशानी में चल रहे हैं। क्योंकि अभी तक इलाके का विकास नहीं हो रहा है। दूसरा अगर कंपनी का लाइसेंस कैंसिल हो जाता है तो इलाके का विकास कौन करेगा। उन्होंने मांग की है कि इलाके के विकास की जिम्मेदारी गमाडा खुद उठाए, ताकि लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।