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चंडीगढ़ और साल 2017 को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल की समीक्षा, पढ़ें

Sun, 31 Dec 2017 08:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 31 Dec 2017 08:26 PM IST
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pawan bansal reviewing year 2017 for chandigarh
pawan bansal
2017 में चंडीगढ़, विकास से लेकर सुरक्षा के स्तर तक जिस तरह से नीचे गया है, देखकर गहरी निराशा होती है। यह बात पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने कही। साल 2017 में चंडीगढ़ के हालात की समीक्षा के बाद उन्होंने कहा कि साल के शुरू में प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार ने बड़े बड़े वादे किए, लेकिन साल खत्म होने तक वे वादे सिर्फ वादे ही रह गए। प्रशासन ने पूरा साल इन वादों के झूठे प्रचार के अलावा कुछ नहीं किया है। जमीनी स्तर पर विकास के नाम पर कुछ नहीं किया बल्कि शहर की कानून व्यवस्था भी पूरी तरह से चरमरा गई है।
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स्वच्छता: इस साल चंडीगढ़ की स्वच्छता की रैंकिंग हैरानीजनक तौर पर गिरकर 11वें स्थान पर पहुंच गई है, जबकि नगर निगम द्वारा साल की शुरुआत में कई सारी योजनाओं का ऐलान किया गया था, जिनमें ‘कूड़ा अलग-अलग’ करने की योजना भी शामिल थी। यहां तक कि नगर निगम ने शहर निवासियों में बांटने के लिए नीले और हरे रंग के छोटे कूड़ेदान खरीदने पर भी 2 करोड़ रुपये खर्च किए थे,
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लेकिन खराब तरीके से लागू नीति के चलते ये पूरी योजना तरह से एक बड़ा लॉप शो बन कर रह गया। कचरा एकत्र करने की दरों को भी बढ़ाया गया। किसी किसी भी सुविधा में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा, शहर निवासियों के लिए डड्डूमाजरा में लगाया गया कचरा प्रबंधन प्लांट भी अभी तक पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहा है। इसके चलते क्षेत्र के निवासियों को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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pawan bansal reviewing year 2017 for chandigarh
पूर्व रेल मंत्री - फोटो : अमर उजाला
अपराध: वहीं शहर में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, बलात्कार और यौन उत्पीड़न की कई घटनाएं सामने आई और इस साल इन घटनाओं के चलते महिलाओं के खिलाफ अपराध की रैंकिंग में चंडीगढ़ दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर आ गया है। नवंबर में एक 21 साल की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद पूरा शहर गहरे सदमे में था और उससे भी चौंकाने वाला शहर की सांसद का वह बयान था, जिसमें उन्होंने किसी संवेदनशीलता का परिचय नहीं दिया।

कारजैकिंग और चेन स्नेचिंग और लूटपाट की घटनाएं इतनी आम आम हो गईं है कि शहर निवासी आज डर और असुरक्षा की भावना में जी रहे हैं। इस साल स्नेचिंग की दर्ज हुई घटनाओं की संख्या 240 का आंकड़ा छू रही हैं और इनमें काफी अधिक बढ़त दर्ज की गई है। एसएसए की स्थिति जस की तस सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत काम करने वाले शिक्षक इस साल भी नियमित नहीं हुए हैं और इन शिक्षकों के वेतन में महीनों की देरी हो रही है और नियमित शिक्षकों के मुकाबले उनके नौकरी करने के हालात भी काफी अधिक भेदभावपूर्ण है।

स्वास्थ्य: धनास में ई-स्वास्थ्य केंद्र भी अभी तक लोगों को सेवाएं प्रदान नहीं कर रहा है और पंजाब के गवर्नर और यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर द्वारा काफी धूमधाम से इसका उद्घाटन किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद इस पर ताला जड़ दिया गया जो अभी तक ये बंद है। डिस्पेंसरीज और जीएमसी सेक्टर 32 में पर्याप्त स्टाफ की मौजूदगी ना होने के चलते आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधित आपातकालीन सेवाएं प्राप्त करने में काफी मुश्किल हो रही है।

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पवन बंसल - फोटो : अमर उजाला
रेलवे स्टेशन: करीब आठ साल पहले ही चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को उन पांच रेलवे स्टेशन की सूची में शामिल किया गया था, जिनको विकसित कर विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशनों में बदला जाना था। इसमें सभी नवीनतम सुविधाओं को भी प्रदान किया जाना था। अब यह जानना बेहद निराशाजनक है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने इसका विकसित होने वाला एरिया ही आधा कर एक और झटका दे दिया। सीसीटीवी कैमरे खस्ता हालात में हैं और उनमें से आधे काम नहीं कर रहे हैं।

पार्किंग फीस: इससे भी हर कोई हैरान है। क्योंकि शहर भर में पार्किंग फीस को अतिरिक्त सेवाएं प्रदान किए बिना ही बढ़ा दिया गया है। ऐसे में शहर की सभी पार्किंगों में बेतरतीब पार्किंग का सिलसिला अभी तक जारी है।

मेट्रो परियोजना भी त्याग दी गई: मेट्रो रेल परियोजना के अचानक ही अधर में छोड़ दिए जाने से मुझे व्यक्तिगत तौर पर भी काफी निराशा हुई है जोकि सिटी ब्यूटीफुल के लिए बेहद जरूरी है। एक तरफ, लोगों से उम्मीद की जा रही है कि वे व्यापक तौर पर सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का उपयोग करें और इसके लिए रोड टैक्स को भी अत्याधिक बढ़ाया जा रहा है, वहीं मेट्रो परियोजना को पूरी तरह से छोड़ दिया गया। यहां तक कि सीटीयू की बसों की संख्या भी पर्याप्त नहीं हैं।

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Pawan kumar Bansal - फोटो : अमर उजाला
कनवर्जन शुल्कों को बेतहाशा बढ़ाना: तीन सालों तक, यूटी ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं किया और फिर अचानक ही प्रॉपर्टीज को लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड कनवर्जन का शुल्क 55 गुना तक बढ़ा दिया गया। जिस प्रकार से दरों को बढ़ाया गया है, क्या इनको तर्कसंगत कहा जा सकता है और आखिर इस बढ़ोतरी का जिम्मेवार कौन है?

कर्मचारी आवास योजना: चंडीगढ़ की सांसद ने 2014 में अपने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए बयान से पूरी तरह से यू-टर्न ले लिया जिसमें ‘सभी के लिए आवास’ सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। लगभग 4,000 यूटी कर्मचारियों के लिए ये एक झटका था, जिन्होंने नौ साल पहले एक आवास योजना के लिए पैसे का भुगतान किया था। अब उनका कहना है कि वह इस योजना की गारंटी नहीं दे सकती थीं और इसका जिम्मा विपक्ष पर डाल दिया गया।

इस मुद्दे पर नए बयान से भविष्य में कुछ उमीद हो सकती है लेकिन इससे कुछ ठोस निकलेगा, उसको लेकर संशय है। साल 2006 में शुरू की गई स्माल फ्लैट्स स्कीम के तहत बनाए गए 3000 फ्लैट बीते 3 साल से खाली पड़े हैं और कॉलोनी नंबर 4 के लाभपात्रों को बेहद खराब परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है। सरकार की मंशा साफ है कि इसे ठीक चुनावों से पहले इनका आबंटन होगा। ये लैट्स खाली पड़े हैं और उनकी हालत खस्ता हो रही है लेकिन कोई भी घर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नहीं दिया जा रहा है।
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