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Chandigarh: रेजिस्टेंस सिजोफ्रेनिया के मरीजों का दवा के साइड इफेक्ट के कारण नहीं रुकेगा इलाज, पीजीआई का शोध

Fri, 19 Jan 2024 01:22 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 19 Jan 2024 01:22 PM IST
सार

शोध को करने वाले क्लीनिकल फार्मोकोलॉजी विभाग से डीएम कर रहे डॉ. नवीन ने बताया कि ऐसे मरीजों में क्लोनोपिन दवा के कारण कुछ साइड इफेक्ट होने लगता है, जिस कारण वो न चाहते हुए भी बीच में दवा छोड़ देते हैं। इससे उनकी स्थिति बिगड़ने लगती है।

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Patients with resistant schizophrenia will not stop treatment midway due to side effects of drug
सिजोफ्रेनिया (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

रेजिस्टेंस सिजोफ्रेनिया के मरीजों में अब दवा के साइड इफेक्ट के कारण बीच में इलाज रोकने जैसी स्थिति नहीं उत्पन्न होगी। पीजीआई के विशेषज्ञों ने ऐसी स्थिति से बचाव का उपाय तलाश लिया है। 
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पीजीआई के क्लीनिकल फार्मोकोलॉजी के विशेषज्ञों ने ऐसे मरीजों के जीन पर दवा के प्रभाव का आकलन कर उसकी संतुलित मात्रा तय करने का फार्मूला तैयार किया है। इस शोध के माध्यम से ऐसे मरीजों में असंतुलित दवा की खुराक के कारण होने वाले विभिन्न परेशानियों से बचाव तो होगा ही साथ ही बीच में इलाज बंद करने जैसी स्थिति भी उत्पन्न नहीं होगी। साउथ ईस्ट एशिया में रेजिस्टेंस सिजोफ्रेनिया के मरीज के इलाज पर किया गया यह अब तक का एकमात्र शोध है।
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इस शोध को करने वाले क्लीनिकल फार्मोकोलॉजी विभाग से डीएम कर रहे डॉ. नवीन ने बताया कि ऐसे मरीजों में क्लोनोपिन दवा के कारण कुछ साइड इफेक्ट होने लगता है, जिस कारण वो न चाहते हुए भी बीच में दवा छोड़ देते हैं। इससे उनकी स्थिति बिगड़ने लगती है। इस स्थिति से बचाव के लिए ही यह शोध किया गया, जिसमें उन मरीजों के दो अलग-अलग जीन पर दवा के प्रभाव का आकलन कर उसकी खुराक तय की गई। 
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डॉ. नवीन ने बताया कि जिनके माध्यम से दवा की सही खुराक तय करने की इस प्रक्रिया को ही पर्सनलाइज्ड मेडिसिन का कॉन्सेप्ट कहा जाता है। शोध के माध्यम से यह बात तय हो गई कि ऐसी अन्य गंभीर बीमारियों में भी मरीज के जीन पर दवा के प्रभाव का आकलन कर उनके लिए सही खुराक तय कर इलाज को सही दिशा प्रदान की जा सकती है। इस शोध में क्लीनिकल फार्मोकोलॉजी विभाग के डॉ. अमोल पाटील और मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टर संदीप ग्रोवर ने मार्गदर्शन की भूमिका निभाई।

200 मरीजों के जीन पर किया परीक्षण
इस शोध में इस मर्ज से ग्रस्त 200 मरीज के खून का नमूना लिया गया। जिसमें ABCB1 और DRD3 जीन में क्लोनोपिन की फ्रीक्वेंसी जांची गई। उस फ्रीक्वेंसी के आधार पर उन मरीजों में यह देखा गया कि किस स्थिति में उन पर दवा से साइड इफेक्ट हो रहा है। इसके आधार पर उन मरीजों के जीन के आकलन को माध्यम बनाकर दवा की खुराक तय की गई ताकि उन्हें किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट ना हो सके। इसके साथ ही उन्हें मर्ज के इलाज के लिए आवश्यकता के अनुसार ही दवा की खुराक दी जाए।


दवा की असंतुलित खुराक दे रहा था यह मर्ज
डॉ. नवीन ने बताया कि क्लोन ओपन दवा के कारण और मरीजों में हाइपरसैलिवेशन, टैचीकार्डिया, हाइपोटेंशन, बेहोशी, कब्ज और संक्रमण जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगती थी, जिसके कारण वह बीच में ही दवा छोड़ देते थे।


 
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