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अस्पतालों की दशा, मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ रहा ग्लूकोज व ड्रिप
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 06 Oct 2017 09:12 AM IST
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GMSH 16 Chandigarh
- फोटो : File Photo
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सेक्टर-16 स्थित मल्टीस्पेशियलिटी गवर्नमेंट हास्पिटल की इमरजेंसी में दाखिल मरीजों को ग्लूकोज और ड्रिप बाहर से खरीदने पड़ रहे हैं। जबकि ये सामान हास्पिटल की ओर से मुहैया करवाए जाने चाहिए। इससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मरीज को पहले डाक्टर को दिखाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। जब डॉक्टर देख लेते हैं तो ग्लूकोज व ड्रिप खरीदने के लिए उन्हें प्राइवेट केमिस्ट के काउंटर पर जूझना पड़ता है।
इलाज होने के कारण मरीज कुछ बोल भी नहीं पाते हैं। मगर वीरवार को चंडीगढ़ सोशल वेलफेयर बोर्ड की चेयरपर्सन संतोष शर्मा जब हास्पिटल की इमरजेंसी में पहुंचीं तो वहां के हालात देखकर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डा. राकेश कश्यप से भी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की शिकायत चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी व एडवाइजर से भी करेंगी।
संतोष शर्मा ने बताया कि उनके पड़ोस में राजमिस्त्री का काम करने वाला युवक बीमार पड़ गया था। उसे लगातार उल्टियां आ रही थीं। बुखार भी काफी तेज था। जब उन्हें इस बात की सूचना मिली तो वह युवक को अपने साथ लेकर सेक्टर-16 अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गई। डाक्टर को दिखाने के बाद उनसे कहा गया कि वे ग्लूकोज और ड्रिप बाहर से खरीद कर ले आएं। डाक्टर की बात सुनकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि ये तो बुनियादी सामान हैं। ग्लूकोज व अन्य सामान तो अस्पताल से ही मिलता है। तो उन्हें जवाब मिला कि हास्पिटल में सामान नहीं है। इस पर उन्होंने इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. सतबीर सिंह से बात की तो पता चला कि वे चार दिन से बाहर हैं और उन्हें स्टाक खत्म होने की कोई खबर नहीं है।
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यह बात कहकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। उसके बाद उन्होंने डीएचस डॉ. राकेश कश्यप से बात की, तो वहां से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में वे बाहर से ही सामान खरीदकर लाएं।
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इलाज होने के कारण मरीज कुछ बोल भी नहीं पाते हैं। मगर वीरवार को चंडीगढ़ सोशल वेलफेयर बोर्ड की चेयरपर्सन संतोष शर्मा जब हास्पिटल की इमरजेंसी में पहुंचीं तो वहां के हालात देखकर उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज डा. राकेश कश्यप से भी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि वे इस मामले की शिकायत चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी व एडवाइजर से भी करेंगी।
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संतोष शर्मा ने बताया कि उनके पड़ोस में राजमिस्त्री का काम करने वाला युवक बीमार पड़ गया था। उसे लगातार उल्टियां आ रही थीं। बुखार भी काफी तेज था। जब उन्हें इस बात की सूचना मिली तो वह युवक को अपने साथ लेकर सेक्टर-16 अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गई। डाक्टर को दिखाने के बाद उनसे कहा गया कि वे ग्लूकोज और ड्रिप बाहर से खरीद कर ले आएं। डाक्टर की बात सुनकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने कहा कि ये तो बुनियादी सामान हैं। ग्लूकोज व अन्य सामान तो अस्पताल से ही मिलता है। तो उन्हें जवाब मिला कि हास्पिटल में सामान नहीं है। इस पर उन्होंने इमरजेंसी इंचार्ज डॉ. सतबीर सिंह से बात की तो पता चला कि वे चार दिन से बाहर हैं और उन्हें स्टाक खत्म होने की कोई खबर नहीं है।
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यह बात कहकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। उसके बाद उन्होंने डीएचस डॉ. राकेश कश्यप से बात की, तो वहां से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बाद में वे बाहर से ही सामान खरीदकर लाएं।
रोजाना आ रहे हैं 350-400 से ज्यादा मरीज
सेक्टर-16 स्थित मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल
पिछले चार दिन से स्टॉक नहीं है
संतोष ने दावा किया कि वहां पर अन्य मरीज भी थे, जिन्होंने बताया कि वे पिछले चार दिन से बाहर से ही सामान खरीद रहे हैं। कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
दस हजार की पावर है, फिर भी नहीं करते इस्तेमाल
हास्पिटल से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि हास्पिटल में स्टॉक है, लेकिन इमरजेंसी के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। यदि स्टॉक खत्म भी हो जाए तो इमरजेंसी के इंचार्ज के पास दस हजार रुपये खरीदारी करने का अधिकार है। इसके बावजूद वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसका मतलब साफ है कि अधिकारी इमरजेंसी की स्थिति से बेखबर हैं।
रोजाना आ रहे हैं 350-400 से ज्यादा मरीज
हास्पिटल के सूत्रों ने बताया है कि इस समय डेंगू और बुखार का सीजन चल रहा है। इस कारण रोजाना करीब 350-400 मरीज आ रहे हैं। लगभग सभी मरीजों को बाहर से ही सामान खरीदना पड़ रहा है।
ऐसा नहीं होना चाहिए। कोई कम्युनिकेशन गेप हो सकता है। इमरजेंसी में यदि मरीज को दिक्कत आई तो देखूंगी कि आखिर कहां लापरवाही हुई है।
- डॉ. वंदना गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16।
संतोष ने दावा किया कि वहां पर अन्य मरीज भी थे, जिन्होंने बताया कि वे पिछले चार दिन से बाहर से ही सामान खरीद रहे हैं। कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
दस हजार की पावर है, फिर भी नहीं करते इस्तेमाल
हास्पिटल से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि हास्पिटल में स्टॉक है, लेकिन इमरजेंसी के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। यदि स्टॉक खत्म भी हो जाए तो इमरजेंसी के इंचार्ज के पास दस हजार रुपये खरीदारी करने का अधिकार है। इसके बावजूद वे इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसका मतलब साफ है कि अधिकारी इमरजेंसी की स्थिति से बेखबर हैं।
रोजाना आ रहे हैं 350-400 से ज्यादा मरीज
हास्पिटल के सूत्रों ने बताया है कि इस समय डेंगू और बुखार का सीजन चल रहा है। इस कारण रोजाना करीब 350-400 मरीज आ रहे हैं। लगभग सभी मरीजों को बाहर से ही सामान खरीदना पड़ रहा है।
ऐसा नहीं होना चाहिए। कोई कम्युनिकेशन गेप हो सकता है। इमरजेंसी में यदि मरीज को दिक्कत आई तो देखूंगी कि आखिर कहां लापरवाही हुई है।
- डॉ. वंदना गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट जीएमएसएच-16।