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5 माह बाद दूसरा आतंकी हमला, पुलिस की बड़ी चूक

Sat, 02 Jan 2016 04:20 PM IST
टीम डिजिटल/चंडीगढ़
टीम डिजिटल/चंडीगढ़ Updated Sat, 02 Jan 2016 04:20 PM IST
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pathankot airforce station terror attack big loose point of punjab police

लंबे समय तक सिख आतंकवाद की आग में जलने वाले पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के करीब 20 साल बाद 5 महीने में पंजाब में ये दूसरा आतंकी हमला है। 5 महीने पहले गुरदासपुर में आतंकी हमला हुआ था।

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पहले गुरदासपुर के दीनानगर में आतंकी हमला हुआ था, जहां जुलाई 2015 में तीन आतंकियों ने एक के एक कई हमले किए जिसमें एक एसपी बलजीत सिंह और होमगार्ड के तीन जवान शहीद हो गए जबकि तीन आम नागरिकों की मौत हुई थी।
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इसके अलावा 15 लोग घायल हुए थे। करीब 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया था। वहीं पठानकोट-अमृतसर रेल ट्रैक पर पांच बम मिले, जिन्हें समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया था।
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इससे पहले 31 अगस्त, 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की कार को खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने निशाना बनाया था। इस हमले में सीएम सहित 15 लोगों की मौत हो गई थी।

सामने आई सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस की चूक

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पठानकोट में हुए आतंकी हमले में सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस की भारी चूक सामने आई है। सूत्र बताते हैं कि आतंकी 31 दिसंबर को ही इस क्षेत्र में घुस चुके थे। 31 दिसंबर को एसपी का अपहरण करने वाली वही थे।

अपहृत एसपी के गायब हुए फोन से सोमवार दोपहर पाकिस्तान में बातचीत हुई थी। फोन को अगर सर्विलांस पर लगाया होता तो इस घटना के बारे में पहले ही पता लग सकता था।

वहीं, 30 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने भी पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार को सर्कुलर भेजकर ऐसी घटना की आशंका जताई थी। इसके बावजूद पंजाब पुलिस गश्त व अलर्ट के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही थी। आतंकवादियों ने घटनास्थल तक पहुंचने के लिए गांव नौसरा के रास्ते का इस्तेमाल किया।

ग्रामीणों का दावा है कि यह लिंक रोड़ है इस पर आमतौर पर पुलिस की गश्त नहीं होती है। बीती रात भी इस रास्ते पर पुलिस की कोई नाकेबंदी नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर आतंकी एयरबेस तक पहुंचने में कामयाब रहे।

गृह मंत्रालय इस हमले को सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ी चूक मान रहा है। अभी नए साल के मौके पर आतंकी हमले की आशंका के मद्देनजर अलर्ट भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद सीमा पार से घुसपैठ हुई और हमला हुआ।

गृह मंत्रालय की मानें तो आतंकवादियों का मक़सद एयरफोर्स बेस को ज़्यादा से ज़्यादा नुक़सान पहुंचाना था, हालांकि वे इसमें कामयाब नहीं हो सके और वायुसेना के सारे विमान सुरक्षित है।

तीन साल पहले भी हुई थी घुसपैठ

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बमियाल का बार्डर काफी संवेदनशील है। दीनानगर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बमियाल बार्डर पर ही तीन साल पहले घुसपैठ कर आतंकवादी पठानकोट में घुसे थे और पहाड़ियों में जाकर छिप गए थे। उस दौरान भी दो पुलिस मुलाजिमों की मौत हो गई थी।

दरअसल बमियाल, नरोट, फतेहाबाद, तारागढ़, गालड़ी, झब्करा मराड़ा इलाके पाकिस्तान बार्डर से सटे हुए हैं। इलाके से रावी दरिया निकलता है। इस वजह से कंटीली तार का लगना नामुमकिन है।

इसी का इस्तेमाल कर आतंकवादी आसानी से पंजाब में घुस आ सकते हैं। जानकारों की माने तो यह इलाका आतंकवादियों के लिए काफी सुरक्षित है, क्योंकि बारिश के दिनों में पानी अधिक होने लगता है और सुरक्षा कम हो जाती है।

आईबी के मुताबिक, दीनानगर में मारे गए सभी आतंकी पाकिस्तान के नरोवाल के रहने वाले थे। पंजाब के काउंटर-इंटेलिजेंस आईजी ने बताया कि ये सभी लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठनों से संबंधित थे।

हैंड ग्रेनेड, एके-47 मिले
मारे गए आतंकी आधुनिक हथियारों से लैस थे। उनके पास से चीन निर्मित हैंड ग्रेनेड, तीन एके-47 और जीपीएस सिस्टम बरामद किए गए हैं।

पांचवां आतंकी आत्मघाती हो सकता है

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पंजाब के पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकी हमले को लेकर कई बड़ी बातें सामने आई हैं। पंजाब पुलिस को अंदर घुसने नहीं दिया जा रहा। एक आतंकी के एयरफोर्स स्टेशन के अंदर होने के कारण ग्रेनेड फेंके जा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, अब तक इस हमले में 4 आतंकी मारे गए है, जबकि पांचवें आतंकी की तलाश जारी है। पांचवां आतंकी आत्मघाती हो सकता है, बताया जा रहा है कि 5वां आतंकी फिदायीन है।

वहीं, पठानकोट एयरबेस पर 2 धमाकों की आवाज सुनाई दी गई है, जहां सर्च ऑपरेशन के दौरान फायरिंग जारी है। सूत्रों के मुताबिक यह दोनों धमाके 5वें आतंकवादी की खोज के दौरान हुए।

बताया जा रहा है कि आतंकी सेना के आधिकारिक वाहन में आये थे। उनकी वायु सेना अड्डे के तकनीकी क्षेत्र में घुसने की मंशा थी। खबर है कि जिन आतंकियों ने इस वारदात को अंजाम दिया है, वे पाकिस्तान के बहावलपुर से सीमा पार करते हुए जम्मू-कश्मीर और फिर पंजाब में घुसे थे।

जिस तरह आतंकियों ने एयरफोर्स बेस में प्रवेश किया उस देखकर यह लगता है कि उन्होंने यहां हमला करने से पहले पूरे क्षेत्र की अच्छी तरह छानबीन की थी। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर हमले का शक जताया जा रहा है, क्योंकि बरामद गाड़ी से जैश का पर्चा मिला है। पुलिस की कोशिश है कि कम से कम एक आतंकी को जिंदा पकड़ा जाए।

इससे पहले खबर आई थी कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मौलाना मसूद अजहर ने इस हमले की साजिश रची है। मसूद अजहर जैश का वो आतंकी है जिसे 17 साल पहले 1999 में कांधार हाईजैक मामले में भारत ने रिहा किया था।

क्या कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ?

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- रिटायर्ड एयरमार्शल एके सिंह ने टीवी चैनल से कहा, 'आतंकी कभी एयरबेस के अंदर नहीं पहुंच सकते। इस बार भी उन्हें फर्स्ट लेयर में घेर लिया गया। आतंकियों का मकसद केवल चैनल की सुर्खियों में आना है। जहां एयरफोर्स के फाइटर जेट्स और चॉपर होते हैं, वहां तक पहुंचने के लिए पांच लेयर की सिक्योरिटी पार करनी होती है, वहां तक पहुंचना नामुमकिन है। आतंकियों का मकसद केवल यह बताना है कि वे आज भी ताकतवर हैं।'

- डिफैंस एक्सपर्ट सुशांत सरीन ने कहा, 'मोदी जी ने बोल्ड स्टेप लिया और वह पाकिस्तान गए। आतंकी इससे बौखला गए हैं। वे अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेंगे, इसका शक तो पहले से था और दोनों देशों की सरकारें भी इसे जानती थीं। इसे हालिया जासूसी केस से जोड़ना गलत होगा। बाहर के लोग तो जासूसी कर नहीं कर सकते, यह काम सेना के लोग ही कर सकते हैं। बहुत छोटे लेवल पर ही जासूसी की जा सकती है।'

- रिटायर्ड मेजर जनरल प्रफुल्ल बख्शी ने कहा, 'आतंकी कभी भी टेक्निकल एरिया तक नहीं पहुंच सकते। हमारे सिस्टम में कमियां हैं। सिविल एडमिनिस्ट्रेशन को मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ मीटिंग करनी चाहिए थी। एसपी के किडनैपिंग के बाद प्रधानमंत्री और बाकी लोगों को वेकअप कॉल लेनी चाहिए थी। 1965 में भी इस इलाके में हमला हुआ था।'

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