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पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर चावला की बेटी फेल, दामाद पास
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 Jan 2017 01:20 AM IST
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- फोटो : File Photo
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पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर वाइके चावला की बेटी डा. पारूल चावला असिस्टेंट प्रोफेसर के इंटरव्यू में फेल हो गई हैं। उनका इंटरव्यू पिछले साल सितंबर में एम्स की स्टैडिंग सलेक्शन कमेटी ने लिया था। हालांकि डा. चावला के दामाद डा. अंकुर गुप्ता इंटरव्यू में पास हो गए हैं। उनका भी इंटरव्यू एम्स की कमेटी ने लिया था। बुधवार को नई दिल्ली में पीजीआई की गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में दोनों के रिजल्ट खोले गए। इसकी पुष्टि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने की है।
दोनों ही डाक्टरों की नियुक्ति का विवाद काफी चर्चित रहा है। डा. पारुल चावला आई डिपार्टमेंट और डा. अंकुर गुप्ता कार्डियोलाजी में असिस्टेंट प्रोफेसर क तौर पर एडहॉक नियुक्ति हुई थी। साल 2014 में पीजीआई के कई डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर की रेग्युलर पोस्ट निकली। इसमें दोनों ही डाक्टरों ने अप्लाई किया। पीजीआई की स्टैंडिंग सलेक्शन कमेटी ने दोनों के इंटरव्यू लिए।
इस दौरान सवाल उठा कि इंटरव्यू के दौरान पारदर्शिता नहीं बरती गई है। इस बारे में डायरेक्टर वाइके चावला ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भी नहीं बताया। इस इंटरव्यू के बारे में 13 अक्तूबर 2015 को दिल्ली में आयोजित गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में चर्चा की गई। इस मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की थी।
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जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने किसी भी विवाद से बचने के लिए छह नवंबर को मामला एम्स की स्टैडिंग सलेक्शन कमेटी को रेफर कर दिया। साल 2016 में 18 व 19 सितंबर को एम्स की कमेटी ने दोनों के दोबारा से इंटरव्यू लिए। इंटरव्यू के बाद उनके रिजल्ट रोक दिए गए। बुधवार को नई दिल्ली में गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में दोनों के रिजल्ट खोले गए और उसमें डा. अंकुर गुप्ता तो पास हो गए, लेकिन डा. पारुल चावला फेल हो गईं।
अमर उजाला ने उठाया था सबसे पहले सवाल
दोनों की नियुक्ति पर सबसे पहले अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर सवाल उठाया था कि पीजीआई में डायरेक्टर की बेटी-दामाद की नियुक्ति पर पारदर्शिता नहीं बरती गई है। अमर उजाला ने इसको मुद्दा बनाकर पीजीआई में भाई-भतीजावाद नाम से एक सीरीज भी प्रकाशित की, जिसमें बताया गया कि किस तरह से अपनों को तरजीह देने के लिए नियमों को ताक पर रखा जाता है। इस मुद्दे को आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष चंदर ने भी काफी उठाया था। उन्होंने भी इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दी थी।
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दोनों ही डाक्टरों की नियुक्ति का विवाद काफी चर्चित रहा है। डा. पारुल चावला आई डिपार्टमेंट और डा. अंकुर गुप्ता कार्डियोलाजी में असिस्टेंट प्रोफेसर क तौर पर एडहॉक नियुक्ति हुई थी। साल 2014 में पीजीआई के कई डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर की रेग्युलर पोस्ट निकली। इसमें दोनों ही डाक्टरों ने अप्लाई किया। पीजीआई की स्टैंडिंग सलेक्शन कमेटी ने दोनों के इंटरव्यू लिए।
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इस दौरान सवाल उठा कि इंटरव्यू के दौरान पारदर्शिता नहीं बरती गई है। इस बारे में डायरेक्टर वाइके चावला ने स्वास्थ्य मंत्रालय को भी नहीं बताया। इस इंटरव्यू के बारे में 13 अक्तूबर 2015 को दिल्ली में आयोजित गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में चर्चा की गई। इस मीटिंग की अध्यक्षता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने की थी।
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जब उन्हें इस बारे में पता चला तो उन्होंने किसी भी विवाद से बचने के लिए छह नवंबर को मामला एम्स की स्टैडिंग सलेक्शन कमेटी को रेफर कर दिया। साल 2016 में 18 व 19 सितंबर को एम्स की कमेटी ने दोनों के दोबारा से इंटरव्यू लिए। इंटरव्यू के बाद उनके रिजल्ट रोक दिए गए। बुधवार को नई दिल्ली में गवर्निंग बॉडी की मीटिंग में दोनों के रिजल्ट खोले गए और उसमें डा. अंकुर गुप्ता तो पास हो गए, लेकिन डा. पारुल चावला फेल हो गईं।
अमर उजाला ने उठाया था सबसे पहले सवाल
दोनों की नियुक्ति पर सबसे पहले अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर सवाल उठाया था कि पीजीआई में डायरेक्टर की बेटी-दामाद की नियुक्ति पर पारदर्शिता नहीं बरती गई है। अमर उजाला ने इसको मुद्दा बनाकर पीजीआई में भाई-भतीजावाद नाम से एक सीरीज भी प्रकाशित की, जिसमें बताया गया कि किस तरह से अपनों को तरजीह देने के लिए नियमों को ताक पर रखा जाता है। इस मुद्दे को आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष चंदर ने भी काफी उठाया था। उन्होंने भी इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दी थी।