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देखिए यहां 350 रुपये में मिलते हैं केजरीवाल, नरेंद्र मोदी और अमित शाह
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Thu, 02 Feb 2017 03:00 PM IST
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पंजाब विधानसभा चुनाव
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पंजाब में एक ऐसा जगह का पता चला है, जहां मात्र 350 रुपये में अरविंद केजरीवाल मिल जाते हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी आप ले सकते हैं। दरअसल, पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में हर पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए पूरा जोर लगा रही है।
कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हमशक्ल लाए जाते हैं तो कहीं आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल का मुखौटा पहने लोग झाड़ू वाला झंडा उठाकर फहराते दिखते हैं। केजरीवाल का मुखौटा पहने लोग आप के वालंटियर नहीं हैं। यह सभी दिहाड़ी पर लाए गए मजदूर हैं।
सड़कों पर आम आदमी पार्टी का प्रचार करते इन मजदूरों को 300-350 रुपये की दिहाड़ी पर लाया जाता है। पैसे के साथ इनको एक समय का खाना और एक समय की चाय भी दी जाती है। ये सुबह आठ बजे आ जाते हैं और शाम छह बजे छुट्टी करके चले जाते हैं।
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कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हमशक्ल लाए जाते हैं तो कहीं आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल का मुखौटा पहने लोग झाड़ू वाला झंडा उठाकर फहराते दिखते हैं। केजरीवाल का मुखौटा पहने लोग आप के वालंटियर नहीं हैं। यह सभी दिहाड़ी पर लाए गए मजदूर हैं।
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सड़कों पर आम आदमी पार्टी का प्रचार करते इन मजदूरों को 300-350 रुपये की दिहाड़ी पर लाया जाता है। पैसे के साथ इनको एक समय का खाना और एक समय की चाय भी दी जाती है। ये सुबह आठ बजे आ जाते हैं और शाम छह बजे छुट्टी करके चले जाते हैं।
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किसी भी पार्टी के लिए कर लेते हैं प्रचार
विधानसभा चुनाव में गुम हुई उपचुनाव की गूंज
- फोटो : File Photo
इन मजदूरों का कहना था कि वो आम आदमी पार्टी के लिए ही नहीं बल्कि किसी भी पार्टी के लिए प्रचार करने को तैयार हैं, लेकिन उनको मजदूरी 350 रुपये ही चाहिए।
मजदूरी से तो आराम वाला है यह काम
केजरीवाल का मुखौटा पहने खड़े यह लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। इस चुनाव तक उन्होंने मजदूरी छोड़ रखी है। इन मजदूरों में से एक ने कहा कि उनके पास लोग मजदूरी करवाने के लिए भी आते हैं लेकिन मजदूरी करने से यह काम करना ज्यादा आराम वाला है। जब तक चुनाव हैं, तब तक हमने मजदूरी छोड़कर केजरीवाल बनना बेहतर समझा है।
मजदूरी से तो आराम वाला है यह काम
केजरीवाल का मुखौटा पहने खड़े यह लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। इस चुनाव तक उन्होंने मजदूरी छोड़ रखी है। इन मजदूरों में से एक ने कहा कि उनके पास लोग मजदूरी करवाने के लिए भी आते हैं लेकिन मजदूरी करने से यह काम करना ज्यादा आराम वाला है। जब तक चुनाव हैं, तब तक हमने मजदूरी छोड़कर केजरीवाल बनना बेहतर समझा है।