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कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर भड़के सीएम बादल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 12 Sep 2016 10:14 PM IST
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punjab assembly session
- फोटो : अमर उजाला
पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस पार्टी पर राज्य में विकास, प्रगति और प्रशासन जैसे अहम मामलों से भागने और अविश्वास प्रस्ताव पर बहस को जानबूझकर तूल देने का दोषी ठहराया है। बादल ने कहा कि विपक्ष की ओर से लोकतंत्र का अपमान करने का तरीका अपनाने से उन्हें बहुत दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखदायी दिन था।
ऐसा लगा कि विपक्ष विकास के मामले पर बहस के लिए गंभीर ही नहीं है। लोकतंत्र में विरोधी दल सरकार की कारगुजारी पर बहस के किसी भी मौके को ऐसे नहीं जाने देती। यह इतिहास में पहली बार हुआ, जब सरकार बहस चाहती थी और विरोधी पक्ष इससे भाग रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस कार्यवाही से पूरी तरह हैरान हो गए और विपक्ष द्वारा इस मौके को व्यर्थ गंवाते देखकर अपनी आंखों पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा। सरकार के खिलाफ विपक्ष ने ही अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
बादल ने कहा कि इससे लगता है कि पिछले दस वर्षों के दौरान पंजाब में हुए विकास और प्रगति के मामले पर सत्ताधारी गठबंधन का सामना करने में उन्हें स्वयं पर भरोसा नहीं था। ऐसा लगता है कि उन्होंने केवल राजनीतिक शोहरत पाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा था। उन्हें यकीन नहीं था कि सरकार उनकी इस चुनौती को स्वीकार कर लेगी। अंत में विरोधी पक्ष बहस से भागने के लिए बहाने ढूंढती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली भाजपा गठबंधन के कार्यकाल में पंजाब ने इतना विकास हुआ है कि उसे एक दिन में बयान करना मुश्किल था। उन्हें इसके लिए और समय चाहिए था। कांग्रेस को इस बात का आभास पहले ही हो गया और वह बहस से दौैड़ गई।
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ऐसा लगा कि विपक्ष विकास के मामले पर बहस के लिए गंभीर ही नहीं है। लोकतंत्र में विरोधी दल सरकार की कारगुजारी पर बहस के किसी भी मौके को ऐसे नहीं जाने देती। यह इतिहास में पहली बार हुआ, जब सरकार बहस चाहती थी और विरोधी पक्ष इससे भाग रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस कार्यवाही से पूरी तरह हैरान हो गए और विपक्ष द्वारा इस मौके को व्यर्थ गंवाते देखकर अपनी आंखों पर उन्हें यकीन नहीं हो रहा। सरकार के खिलाफ विपक्ष ने ही अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
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बादल ने कहा कि इससे लगता है कि पिछले दस वर्षों के दौरान पंजाब में हुए विकास और प्रगति के मामले पर सत्ताधारी गठबंधन का सामना करने में उन्हें स्वयं पर भरोसा नहीं था। ऐसा लगता है कि उन्होंने केवल राजनीतिक शोहरत पाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव सदन में रखा था। उन्हें यकीन नहीं था कि सरकार उनकी इस चुनौती को स्वीकार कर लेगी। अंत में विरोधी पक्ष बहस से भागने के लिए बहाने ढूंढती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली भाजपा गठबंधन के कार्यकाल में पंजाब ने इतना विकास हुआ है कि उसे एक दिन में बयान करना मुश्किल था। उन्हें इसके लिए और समय चाहिए था। कांग्रेस को इस बात का आभास पहले ही हो गया और वह बहस से दौैड़ गई।
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