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पंचकूला शटरिंग इंडस्ट्री पर मंदी की मार, शटडाउन की कगार
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Sun, 29 Nov 2015 12:50 PM IST
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प्रॉपर्टी की मंदी और वेट की मार के साथ बिजली के भारी बिलों ने पंचकूला की शटरिंग इंडस्ट्री को शटडाउन करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पंचकूला में जो शटरिंग इंडस्ट्री बची है। वह किसी तरह से गुजारा चला रही हैं। पंचकूला में शटरिंग इंडस्ट्री का हाल ऐसा नहीं था।
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इस इंडस्ट्री के ज्यादा बुरे हालात तब हुए जब एकदम से हरियाणा में बिजली के रेट्स में इजाफा किया गया और उसके साथ पंजाब ने वैट के रेट घटा दिए। पंचकूला में शटरिंग इंडस्ट्री से जुड़े अब सिर्फ पांच प्लेयर्स ही बचे हैं। उद्यमियों के अनुसार बिजली के रेट्स कुछ समय पहले तक ठीक थे। उसके बाद रेट्स एकदम से बढ़ा दिए गए।
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एक उद्यमी ने बिजली के बिल की कॉपी दिखाते हुए कहा कि पहले बिजली का बिल बाइस हजार रुपये आता था और अब यह बिल 47 हजार रुपये तक पहुंच गया है। जबकि खर्च की गई यूनिट्स उतनी ही हैं।
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शटरिंग इंडस्ट्री-एक नजर
कुल यूनिट्स-5
टर्नओवर-आठ करोड़ रुपये
रोजगार-100 व्यक्ति
वैट-सरचार्ज का अतिरिक्त भार
पंचकूला की शटरिंग इंडस्ट्री पर लगाया जाने वाला वैट 12.50 फीसदी है। जबकि उसके ऊपर 5 फीसदी सरचार्ज लगाया जाता है। जिससे खरीदार को कुल 13.125 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। जबकि यही खरीदार अगर पंजाब से शटरिंग लेता है तो उसे सिर्फ 6.059 फीसदी वैट देना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पंचकूला ट्राइसिटी की शटरिंग इंडस्ट्री को टक्कर देने लायक ही नहीं रहा।
बिजली से बढ़ी प्रोडक्शन कॉस्ट
बिजली की वजह से प्रोडक्शन कास्ट में एकदम से इजाफा हो गया है। इससे शटरिंग इंडस्ट्री के उद्यमियों की हालत खराब हो गई है। जिसकी वजह से मुनाफा लगभग खत्म हो चुका है।
प्रॉपर्टी की मंदी का भी प्रभाव
वैट और बिजली की मार झेलने वाली शटरिंग इंडस्ट्री पर प्रॉपर्टी में मंदी की सीधी मार पड़ी है। ज्यादातर शटरिंग बिल्डर, ठेकेदार लेते हैं। प्रॉपर्टी में मंदी होने से इस इंडस्ट्री से जाने वाला थोड़ा बहुत माल भी अब बंद हो चुका है। जो प्रोडक्शन होता है, उद्यमी उसके लिए दूसरे राज्यों में मार्केट तलाश करते हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर भी बना बाधा
पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया का इन्फ्रास्ट्रक्चर बाधा बन गया है। पंचकूला नगर निगम द्वारा इसका सुधार नहीं किया जा रहा है। इस कारण उद्यमियों की परेशानी बढ़ चुकी है। अंदरूनी सड़कें इतनी खराब हैं कि ट्रक और ट्राले यहां से निकल नहीं पाते हैं। जिस कारण माल का ट्रांसपोर्टेशन नहीं हो पाता है।
एक्साइज भी बन गई परेशानी
शटरिंग इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि अब डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की टर्नओवर वाली इंडस्ट्री को एक्साइज का नंबर लेना पड़ता है। जो ठेकेदार और अन्य खरीदार हैं वह एक्साइज का नंबर लेते नहीं हैं। ऐसी स्थिति में एक्साइज ड्यूटी का अतिरिक्त भार उद्यमियों पर ही आ जाता है।
स्माल स्केल इंडस्ट्री के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए। एक्साइज नंबर के लिए टर्नओवर कम से कम तीन करोड़ रुपये तक होना चाहिए और बिजली की दरों को रिवाइज किया जाना चाहिए।
नवदीप शर्मा, फ्रेंड्स स्टील्स इंटरप्राइजेज
एक ओर स्माल स्केल इंडस्ट्री को आगे बढ़ाने की बात की जाती है। दूसरी ओर बिजली के बिल, वैट जैसी बाधाएं लगा दी जाती हैं। ऐसी स्थिति में इंडस्ट्री की हालत तो खराब होनी तय ही है। इसके संबंध में कोई स्पेशल पैकेज या इन्सेटिव की घोषणा की जानी चाहिए।
विशाल गर्ग, उद्यमी
पंचकूला में इस इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों का हाल अच्छा नहीं है। इसका उत्थान करना है तो पंजाब के बराबर वैट और बिजली की दरों में कटौती करनी होगी, तभी इंडस्ट्री का हाल सुधरेगा।
दिनेश गर्ग, विशाल स्टील्स