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ये कैसी पाठशाला, गड्ढों से भरे फर्श पर बैठने को मजबूर बच्चे
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
Updated Wed, 18 Jan 2017 01:12 AM IST
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सरकारी स्कूलों में ठंड में बच्चों से अत्याचार
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों में बर्फबारी। मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड। जमाव बिंदु की ओर खिसकता पारा। घना कोहरा और शीत लहर। उस पर स्कूली बच्चों पर कहर। अमर उजाला ने मंगलवार को तीन सरकारी स्कूलों बुढ़नपुर, सेक्टर-15, सेक्टर-12ए रैली गांव, का रिएलिटी चेक किया तो स्कूली बच्चे सिलन युक्त कमरों में फर्श पर बैठे मिले।
वहीं बुढ़नपुर और सेक्टर-12ए के रैली गांव में बच्चों के अनुपात में कमरों की संख्या कम होने के कारण बच्चों को बरामदे में बिठाया गया था। सर्द हवाओं में बच्चे ठिठुर रहे थे। उन्हें इंतजार था कब छुट्टी मिले और घर जाएं।
सवाल ये है कि सीएम के शहर में ठंड के कारण मंगलवार को डीसी स्कूल बंद करने का निर्देश दे सकते हैं तो पंचकूला में क्यों नहीं हुआ। अगर कड़ाके की ठंड में बच्चे बीमार पड़ जाएं तो जिम्मेदार कौन होगा। जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग।
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वहीं बुढ़नपुर और सेक्टर-12ए के रैली गांव में बच्चों के अनुपात में कमरों की संख्या कम होने के कारण बच्चों को बरामदे में बिठाया गया था। सर्द हवाओं में बच्चे ठिठुर रहे थे। उन्हें इंतजार था कब छुट्टी मिले और घर जाएं।
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सवाल ये है कि सीएम के शहर में ठंड के कारण मंगलवार को डीसी स्कूल बंद करने का निर्देश दे सकते हैं तो पंचकूला में क्यों नहीं हुआ। अगर कड़ाके की ठंड में बच्चे बीमार पड़ जाएं तो जिम्मेदार कौन होगा। जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग।
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ठंड में नीचे बिठाया जा रहा बच्चों को
सरकारी स्कूलों में ठंड में बच्चों से अत्याचार
ठंड में नीचे बिठाया जा रहा बच्चों को
ये कैसी पाठशाला है। जहां छोटे-छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड में बैठने के लिए बेंच नहीं टूटा फूटा फर्श मिलता है। फर्श पर दो से ती फुट तक के गड्ढे हैं। ये सच्चाई शब्द नहीं तस्वीरें बयां कर रही हैं। इन बच्चों के शरीर पर ठंड से बचने के लिए स्वेटर तक नहीं थे।
बुढ़नपुर स्कूल के चार कमरे जर्जर
बुढ़नपुर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बच्चों के अनुपात में शिक्षक भी पूरे नहीं हैं। वहीं चार कमरे जर्जर हालत हैं। बरसात के दिनों क्लास रूम में पानी टपकता है। क्लास रूम बैठने के लायक नहीं है। इस स्कूल में 650 बच्चे हैं। बच्चों के अनुपात में नियम के मुताबिक न तो शिक्षक हैं और न ही क्लास रूम।
सेक्टर-12ए रैली गांव के सरकारी स्कूल
इस सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या 446 है। क्लास रूम सिर्फ छह हैं। ऐसी स्थिति में करीब 100 बच्चों को बरामदे में बिठकार कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। रिएलिटी चेक के दौरान दो क्लास रूम ऐसे मिले, जिनमेें बच्चे फर्श पर बैठे दिखे। पतली दरी पर बच्चों को ठंड लग रही थी।
ये कैसी पाठशाला है। जहां छोटे-छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड में बैठने के लिए बेंच नहीं टूटा फूटा फर्श मिलता है। फर्श पर दो से ती फुट तक के गड्ढे हैं। ये सच्चाई शब्द नहीं तस्वीरें बयां कर रही हैं। इन बच्चों के शरीर पर ठंड से बचने के लिए स्वेटर तक नहीं थे।
बुढ़नपुर स्कूल के चार कमरे जर्जर
बुढ़नपुर के राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बच्चों के अनुपात में शिक्षक भी पूरे नहीं हैं। वहीं चार कमरे जर्जर हालत हैं। बरसात के दिनों क्लास रूम में पानी टपकता है। क्लास रूम बैठने के लायक नहीं है। इस स्कूल में 650 बच्चे हैं। बच्चों के अनुपात में नियम के मुताबिक न तो शिक्षक हैं और न ही क्लास रूम।
सेक्टर-12ए रैली गांव के सरकारी स्कूल
इस सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या 446 है। क्लास रूम सिर्फ छह हैं। ऐसी स्थिति में करीब 100 बच्चों को बरामदे में बिठकार कक्षाएं लगानी पड़ती हैं। रिएलिटी चेक के दौरान दो क्लास रूम ऐसे मिले, जिनमेें बच्चे फर्श पर बैठे दिखे। पतली दरी पर बच्चों को ठंड लग रही थी।
अधिकारी जानकर भी अंजान
सरकारी स्कूलों में ठंड में बच्चों से अत्याचार
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारी जानकर भी अंजान
स्कूल की तरफ से कई बार क्लास रूम की जर्जर स्थिति और बच्चों के लिए बेंच के संबंध में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को लिखा जा चुका है, लेकिन अमर उजाला ने जब उनसे पूछा तो उनके पास जवाब था कि उन्हें इसकी सूचना तक नहीं है।
ये जानकारी में नहीं है कि बच्चों को फर्श पर बिठाया जा रहा है। अगर ऐसा है तो तत्काल बच्चों के बैठने का बंदोबस्त किया जाएगा। स्कूली बच्चों से काम कराया जा रहा है तो ये बिल्कुल गलत है। जांच में ऐसा पाया गया तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-सुजाता राणा, डीईईओ पंचकूला।
स्कूल की तरफ से कई बार क्लास रूम की जर्जर स्थिति और बच्चों के लिए बेंच के संबंध में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को लिखा जा चुका है, लेकिन अमर उजाला ने जब उनसे पूछा तो उनके पास जवाब था कि उन्हें इसकी सूचना तक नहीं है।
ये जानकारी में नहीं है कि बच्चों को फर्श पर बिठाया जा रहा है। अगर ऐसा है तो तत्काल बच्चों के बैठने का बंदोबस्त किया जाएगा। स्कूली बच्चों से काम कराया जा रहा है तो ये बिल्कुल गलत है। जांच में ऐसा पाया गया तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
-सुजाता राणा, डीईईओ पंचकूला।