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टैगोर थिएटर में ‘दारा’, पाक कलाकारों ने सुनाई औरंगजेब की कहानी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Sat, 23 Jul 2016 09:44 PM IST
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Dara Play at Taigore Theatre
- फोटो : amar ujala
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सत्ता पाने के लिए कई बार इंसान अपनों की हत्या करवा देता है। वहीं, जब उसे सत्ता प्राप्त होती है तो उसे अपने किए का पछतावा भी होता है। यह दिखाया गया नाटक दारा में। इस नाटक को अजोका थिएटर ग्रुप लाहौर (पाकिस्तान) के कलाकारों ने पेश किया।
टैगोर थिएटर में शनिवार से अदाकार मंच मोहाली व पंजाब संगीत नाटक अकादमी की तरफ से थिएटर फॉर पीस फेस्टिवल हमसाया की शुरुआत हुई। पहले दिन दारा नाटक का मंचन कि या गया। इस नाटक में सिंहासन के लिए शाहजहां के बेटों औरंगजेब और दारा के बीच के सत्ता की जंग को दिखाया गया है। औरगंजेब को लगता है कि दारा बादशाह बनना चाहता है। असल में दारा को सत्ता का लालच बिल्कुल नहीं होता।
वह तो बाबा व फकीरों, सूफी-संतों की संगत में होता है। इसके बावजूद औरंगजेब अपने जासूसों को दारा के पीछे लगा देता है। एक दिन वह सोचता है कि पिता ने जब बादशाह बनने के लिए अपनों का कत्ल कर दिया था तो क्यूं न मैं भी ऐसा ही करूं। इसके बाद वह दारा को मारने के लिए चालें चलता है और उसको गलत साबित करवा कर मरवा देता है।
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अंत में जब वह बादशाह बन जाता है तो उसे अपने किए पर बहुत पछतावा होता है। इसके बाद वह अपने बेटे को खत लिखता है। उसमें लिखता है कि बादशाह बनने के लिए मैंने जो तरीका अपनाया, वह ठीक नही था। इसके लिए उसे अफसोस है।
कव्वाली का दौर चला
नाटक की कहानी केदौरान दारा के सेट पर आने पर कव्वाली सुनने को मिली। जिसे खबार कव्वाल ने पेश किया। वहीं नाटक केलिए बेहतरीन मंच भी सजाया गया गया।
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टैगोर थिएटर में शनिवार से अदाकार मंच मोहाली व पंजाब संगीत नाटक अकादमी की तरफ से थिएटर फॉर पीस फेस्टिवल हमसाया की शुरुआत हुई। पहले दिन दारा नाटक का मंचन कि या गया। इस नाटक में सिंहासन के लिए शाहजहां के बेटों औरंगजेब और दारा के बीच के सत्ता की जंग को दिखाया गया है। औरगंजेब को लगता है कि दारा बादशाह बनना चाहता है। असल में दारा को सत्ता का लालच बिल्कुल नहीं होता।
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वह तो बाबा व फकीरों, सूफी-संतों की संगत में होता है। इसके बावजूद औरंगजेब अपने जासूसों को दारा के पीछे लगा देता है। एक दिन वह सोचता है कि पिता ने जब बादशाह बनने के लिए अपनों का कत्ल कर दिया था तो क्यूं न मैं भी ऐसा ही करूं। इसके बाद वह दारा को मारने के लिए चालें चलता है और उसको गलत साबित करवा कर मरवा देता है।
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अंत में जब वह बादशाह बन जाता है तो उसे अपने किए पर बहुत पछतावा होता है। इसके बाद वह अपने बेटे को खत लिखता है। उसमें लिखता है कि बादशाह बनने के लिए मैंने जो तरीका अपनाया, वह ठीक नही था। इसके लिए उसे अफसोस है।
कव्वाली का दौर चला
नाटक की कहानी केदौरान दारा के सेट पर आने पर कव्वाली सुनने को मिली। जिसे खबार कव्वाल ने पेश किया। वहीं नाटक केलिए बेहतरीन मंच भी सजाया गया गया।