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Hindi News ›   Chandigarh ›   Padmashri Nekchand's 93rd Birthday Today

पद्मश्री नेकचंद का 93वां जन्मदिवस आज, रॉक गार्डन में होंगे कई कार्यक्रम

Fri, 15 Dec 2017 09:23 AM IST
अंजना चौहान/अमर उजाला, चंडीगढ़
अंजना चौहान/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 15 Dec 2017 09:23 AM IST
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Padmashri Nekchand's 93rd Birthday Today
- फोटो : फाइल फोटो
नेक इंसान बनना है तो नेकचंद जैसा बनो, जिन्होंने जंगल में कबाड़ से एक ऐसी दुनिया बना दी, जिसकी कल्पना शायद ही कोई कर सकता था। रॉक गार्डन, एक ऐसा विश्व विख्यात टूरिस्ट स्पॉट है, जिसे चंडीगढ़ आने वाला हर व्यक्ति देखना चाहता है। इसे बनाने वाला भी एक आम इंसान था, लेकिन उनकी इस रचना ने उन्हें लीजेंड बना दिया। रॉक गार्डन जैसी खूबसूरत कृति देने वाले नेकचंद का शुक्रवार को 93वां जन्मदिवस है, इस मौके पर रॉक गार्डन को सजाया गया है।
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चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन रॉक गार्डन में शाम 4 बजे से होगा। समारोह में नेकचंद का पूरा परिवार, प्रशासन के सभी आला अधिकारी व शहरवासी मौजूद रहेंगे। मशहूर गायक अनूप जलोटा अपने भजन और गजलों से सबका मनोरंजन करेंगेष
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जीवन में कितना क्रिएटिव सोच और कर सकते हैं यहां आकर पता चलता है। पत्थर सिर्फ घायल करने के काम ही नहीं आते, बल्कि खूबसूरती भी दर्शाने के काम आते हैं। यह और जगहों से बेहतरीन है, लेकिन कुछ दिशा निर्देश सही तरह से नही दिए गए है। इन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
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- मिलन सिन्हा, टूरिस्ट, झारखंड

यहां आकर प्रकृति से जुड़ा महसूस करते है। काफी क्रिएटिव वस्तुएं देखने को मिलती हैं। जंगल को जितना क्रिएटिव रूप दिया गया है उससे संतुष्ट है। साफ सफाई का खास ध्यान रखा गया है। चारों तरफ हरियाली, शांत माहौल देखने को मिलता है।
रिशब, स्टूडेंट, चंडीगढ़

रॉक गार्डन के बारे में काफी कुछ सुना था लेकिन जब खुद देखा तो यह सोच से ज्यादा खूबसूरत है। यह कई तरह से अलग है। इस तरह का दूसरा गार्डन बनाना किसी के लिए भी मुश्किल है। यहां महाराष्ट्र के मुकाबले ज्यादा साफ सफाई है।

मुनिरा, टूरिस्ट, महाराष्ट्र

रॉक गार्डन में पता चलता है कि हम जो सामान कबाड़ समझकर फेंक देते हैं वह कितना काम आ सकता है। यहां बेकार सामान से काफी सुंदर कलाकृतियां बनाई गई है। हर कलाकृति कुछ कह रही है। इसे देखकर ही पता लग जाता है कि नेक चंद ने कितनी मेहनत से इन्हें बनाया होगा।
विजय लक्ष्मी पाण्डेय, टूरिस्ट, लखनऊ
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