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Chandigarh News: 85 हजार रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश
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मोहाली। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर फीस लेकर सेवा पूरी न करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग मोहाली ने इमिग्रेशन कंपनी डब्ल्यूडब्ल्यूआईसीएस ग्लोबल लॉ ऑफिसिज प्राइवेट लिमिटेड को कडी फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता से ली गई 85 हजार रुपये की राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 25 हजार रुपये मानसिक तनाव और मुकदमे के खर्च के रूप में अदा करने को कहा गया है।
आयोग के अध्यक्ष एस.के. अग्रवाल तथा सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाठ की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी की ओर से सेवा में कमी साबित होती है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी 30 दिनों के भीतर भुगतान करे, अन्यथा देरी होने पर 12 प्रतिशत ब्याज लागू होगा।
शिकायतकर्ता अछर कुमार ने आयोग को बताया कि उसने मार्च 2020 में पोलैंड के लिए वर्क वीजा प्राप्त करने हेतु कंपनी से संपर्क किया था। कंपनी ने उसे भरोसा दिलाया कि उनकी सेवाओं के माध्यम से आसानी से जॉब ऑफर और वर्क परमिट मिल जाएगा। इस पर उसने आवश्यक दस्तावेज जमा कराए और अलग-अलग चरणों में कुल 85 हजार रुपये फीस अदा की।
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अप्रैल 2022 में कानूनी नोटिस भेजा, कंपनी ने नहीं दिया जवाब
हालांकि, कोविड-19 महामारी का हवाला देकर कंपनी ने प्रक्रिया में देरी की। हालात सामान्य होने के बाद भी न तो वीजा दिलाया गया और न ही रकम वापस की गई। बार-बार संपर्क करने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मजबूर होकर शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2022 में कानूनी नोटिस भेजा लेकिन कंपनी ने उसका भी जवाब नहीं दिया। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि कोविड के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई और शिकायतकर्ता ने जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं दिए। आयोग ने बैंक रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान को सही माना और कहा कि इतनी राशि देने के बाद दस्तावेज न देना तर्कसंगत नहीं है। करीब छह साल बीतने के बावजूद सेवा पूरी न होना आयोग ने गंभीर लापरवाही माना और उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
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आयोग के अध्यक्ष एस.के. अग्रवाल तथा सदस्य परमजीत कौर और लेफ्टिनेंट कर्नल जसबीर सिंह बाठ की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी की ओर से सेवा में कमी साबित होती है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी 30 दिनों के भीतर भुगतान करे, अन्यथा देरी होने पर 12 प्रतिशत ब्याज लागू होगा।
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शिकायतकर्ता अछर कुमार ने आयोग को बताया कि उसने मार्च 2020 में पोलैंड के लिए वर्क वीजा प्राप्त करने हेतु कंपनी से संपर्क किया था। कंपनी ने उसे भरोसा दिलाया कि उनकी सेवाओं के माध्यम से आसानी से जॉब ऑफर और वर्क परमिट मिल जाएगा। इस पर उसने आवश्यक दस्तावेज जमा कराए और अलग-अलग चरणों में कुल 85 हजार रुपये फीस अदा की।
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अप्रैल 2022 में कानूनी नोटिस भेजा, कंपनी ने नहीं दिया जवाब
हालांकि, कोविड-19 महामारी का हवाला देकर कंपनी ने प्रक्रिया में देरी की। हालात सामान्य होने के बाद भी न तो वीजा दिलाया गया और न ही रकम वापस की गई। बार-बार संपर्क करने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मजबूर होकर शिकायतकर्ता ने अप्रैल 2022 में कानूनी नोटिस भेजा लेकिन कंपनी ने उसका भी जवाब नहीं दिया। कंपनी ने अपनी सफाई में कहा कि कोविड के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई और शिकायतकर्ता ने जरूरी दस्तावेज पूरे नहीं दिए। आयोग ने बैंक रिकॉर्ड के आधार पर भुगतान को सही माना और कहा कि इतनी राशि देने के बाद दस्तावेज न देना तर्कसंगत नहीं है। करीब छह साल बीतने के बावजूद सेवा पूरी न होना आयोग ने गंभीर लापरवाही माना और उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।