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चंडीगढ़ में 500 में से सिर्फ छह ने किया प्लाज्मा दान... आगे आइए, मरीजों की जिंदगी बचाइए
Tue, 30 Jun 2020 04:57 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2020 04:57 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
प्लाज्मा थैरेपी कई कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज में एक उम्मीद बनकर आया है। इसके शुरुआती नतीजे अच्छे आए हैं। सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्लाज्मा बैंक बनाने की घोषणा की। पीजीआई भी कुछ गंभीर मरीजों को प्लाज्मा थैरेपी से ठीक कर चुका है लेकिन पीजीआई को अब प्लाज्मा डोनर नहीं मिल रहे। ट्राइसिटी में कोरोना के 800 से ज्यादा मरीज हैं। इनमें से 500 से ज्यादा रिकवर हो चुके हैं। इसके बावजूद अब तक सिर्फ छह लोगों ने ही अपना प्लाज्मा डोनेट किया है। इनमें से तीन का इस्तेमाल पीजीआई कर चुका है। बाकी बचे प्लाज्मा को ब्लड बैंक में स्टोर करके रखा गया है।
पीजीआई को इस समय प्लाज्मा डोनर्स की जरूरत है, मगर रिकवर हो चुके कोविड-19 के मरीज आगे नहीं आ रहे। इससे पीजीआई चिंतित है क्योंकि जब तक उसे डोनर नहीं मिलेंगे, तब तक न तो वह शोध कर पाएगा और न ही गंभीर मरीजों पर इसका इस्तेमाल कर पाएगा। हालांकि प्लाज्मा थैरेपी कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए अभी तक मानक इलाज नहीं है लेकिन इसका इस्तेमाल गंभीर मरीजों में किया जा रहा है और इसके बेहतर परिणाम आ रहे हैं और मरीज रिकवर कर रहे हैं। पीजीआई ने कोरोना के मरीजों से अपील की है कि वह आगे आएं और प्लाज्मा डोनेट करें।
क्यों जरूरी है प्लाज्मा का दान
अभी तक कोविड-19 के इलाज के लिए कोई दवा या वैक्सीन नहीं आई है। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के लिए कुछ दवाएं और प्लाज्मा थैरेपी उपलब्ध है। प्लाज्मा थैरेपी से मरीजों को फायदा पहुंचा है। इसके लिए आईसीएमआर करीब 400 मरीजों पर एक शोध कर रही है। शोध से ही साफ होगा कि प्लाज्मा थैरेपी कोविड-19 के मरीजों पर कितना असर डाल रही है और यह तभी सफल होगा, जब चिकित्सा संस्थानों को प्लाज्मा मिलेंगे। ऐसे में ठीक हो चुके कोरोना पेशेंट को प्लाज्मा की अहमियत समझनी होगी और आगे बढ़कर उसे डोनेट करे।
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पीजीआई को इस समय प्लाज्मा डोनर्स की जरूरत है, मगर रिकवर हो चुके कोविड-19 के मरीज आगे नहीं आ रहे। इससे पीजीआई चिंतित है क्योंकि जब तक उसे डोनर नहीं मिलेंगे, तब तक न तो वह शोध कर पाएगा और न ही गंभीर मरीजों पर इसका इस्तेमाल कर पाएगा। हालांकि प्लाज्मा थैरेपी कोविड-19 के मरीजों के इलाज के लिए अभी तक मानक इलाज नहीं है लेकिन इसका इस्तेमाल गंभीर मरीजों में किया जा रहा है और इसके बेहतर परिणाम आ रहे हैं और मरीज रिकवर कर रहे हैं। पीजीआई ने कोरोना के मरीजों से अपील की है कि वह आगे आएं और प्लाज्मा डोनेट करें।
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क्यों जरूरी है प्लाज्मा का दान
अभी तक कोविड-19 के इलाज के लिए कोई दवा या वैक्सीन नहीं आई है। इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के लिए कुछ दवाएं और प्लाज्मा थैरेपी उपलब्ध है। प्लाज्मा थैरेपी से मरीजों को फायदा पहुंचा है। इसके लिए आईसीएमआर करीब 400 मरीजों पर एक शोध कर रही है। शोध से ही साफ होगा कि प्लाज्मा थैरेपी कोविड-19 के मरीजों पर कितना असर डाल रही है और यह तभी सफल होगा, जब चिकित्सा संस्थानों को प्लाज्मा मिलेंगे। ऐसे में ठीक हो चुके कोरोना पेशेंट को प्लाज्मा की अहमियत समझनी होगी और आगे बढ़कर उसे डोनेट करे।
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कौन कर सकता है प्लाज्मा का दान
पीजीआई के मुताबिक, प्लाज्मा को डोनेट करने के लिए आईसीएमआर की ओर से कुछ मानक बनाए गए हैं। उसके मुताबिक, जिनकी उम्र 18-60 साल के बीच हो, कोरोना से ठीक हुए करीब 28 दिन बीत चुके हों, दो बार आरटी-पीसीआर टेस्ट निगेटिव आ चुका हो और हेल्दी हो। ऐसे मरीज पीजीआई के ब्लड बैंक में संपर्क कर सकते हैं। पीजीआई ऐसे मरीज की एंटी बॉडीज टेस्ट करवाएगा। यदि टेस्ट पॉजिटिव आया तो मरीज प्लाज्मा को डोनेट कर सकता है। इसके अलावा जो लोग प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं, वह भी 14 दिन बाद आकर दोबारा से प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं।
पीजीआई एक साल तक रिजर्व रख सकता है प्लाज्मा
भले ही दिल्ली में प्लाज्मा बैंक बन रहा हो मगर पीजीआई के ब्लड बैंक में प्लाज्मा को स्टोर करने की समुचित व्यवस्था है। पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. रतिराम शर्मा ने बताया कि ब्लड बैंक में माइनस 40 डिग्री के तापमान में एक साल तक प्लाज्मा को सुरक्षित रखा जा सकता है। पीजीआई ब्लड बैंक की स्टोरेज क्षमता भी काफी अधिक है। यहां पर हजार से ज्यादा प्लाज्मा को स्टोरेज किया जा सकता है।
प्लाज्मा डोनर आगे आएं, हम प्रोत्साहित करेंगे
समाजसेवी कृष्ण सिंगला का कहना है कि ट्राइसिटी में करीब 800 मरीज हैं। यदि इनमें 50 मरीज भी आगे आकर प्लाज्मा डोनेट करते हैं तो बहुत बड़ा योगदान होगा। मरीजों को आगे बढ़ने की आवश्यकता है। ऐसे लोगों के साथ पूरा शहर साथ में खड़ा होता है। मैं व्यक्तिगत तौर पर कह सकता हूं कि यदि कोई आगे आता है तो उसकी फाइनेंशियल मदद भी की जाएगी।
प्लाज्मा डोनर को करेंगे सम्मानित, मदद भी करेंगे
श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान राकेश संगर का कहना है कि प्लाज्मा डोनर आगे आएं, हम उनकी मदद के लिए तैयार हैं। यह संकट का समय है। उन्हें हम सम्मानित भी करेंगे और उन्हें जिंदगी में कभी भी ब्लड की जरूरत पड़ती है तो संस्था उनकी मदद करेगी।
पीजीआई एक साल तक रिजर्व रख सकता है प्लाज्मा
भले ही दिल्ली में प्लाज्मा बैंक बन रहा हो मगर पीजीआई के ब्लड बैंक में प्लाज्मा को स्टोर करने की समुचित व्यवस्था है। पीजीआई के ट्रांसफ्यूजन डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो. रतिराम शर्मा ने बताया कि ब्लड बैंक में माइनस 40 डिग्री के तापमान में एक साल तक प्लाज्मा को सुरक्षित रखा जा सकता है। पीजीआई ब्लड बैंक की स्टोरेज क्षमता भी काफी अधिक है। यहां पर हजार से ज्यादा प्लाज्मा को स्टोरेज किया जा सकता है।
प्लाज्मा डोनर आगे आएं, हम प्रोत्साहित करेंगे
समाजसेवी कृष्ण सिंगला का कहना है कि ट्राइसिटी में करीब 800 मरीज हैं। यदि इनमें 50 मरीज भी आगे आकर प्लाज्मा डोनेट करते हैं तो बहुत बड़ा योगदान होगा। मरीजों को आगे बढ़ने की आवश्यकता है। ऐसे लोगों के साथ पूरा शहर साथ में खड़ा होता है। मैं व्यक्तिगत तौर पर कह सकता हूं कि यदि कोई आगे आता है तो उसकी फाइनेंशियल मदद भी की जाएगी।
प्लाज्मा डोनर को करेंगे सम्मानित, मदद भी करेंगे
श्री शिव कांवड़ महासंघ चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रधान राकेश संगर का कहना है कि प्लाज्मा डोनर आगे आएं, हम उनकी मदद के लिए तैयार हैं। यह संकट का समय है। उन्हें हम सम्मानित भी करेंगे और उन्हें जिंदगी में कभी भी ब्लड की जरूरत पड़ती है तो संस्था उनकी मदद करेगी।
कोरोना महामारी पर काबू के लिए प्लाज्मा थैरेपी कारगर साबित हो रही है। ऐसे में एक नागरिक होने के नाते फर्ज बनता है कि प्लाज्मा डोनेट कर कोरोना के गंभीर मरीजों की मदद करें।
- फिजा गुप्ता, प्लाज्मा डोनर
प्लाज्मा देने से किसी भी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती। इससे किसी की जान जरूर बच सकती। कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अपील करता हूं कि वे अपने डर को बाहर निकालें और प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं।
- यशपाल शर्मा, प्लाज्मा डोनर
अभी तक सिर्फ छह मरीजों ने प्लाज्मा डोनेट किया है। मरीजों आगे आएंगे तो रिसर्च और इलाज की दिशा में हम आगे बढ़ पाएंगे। इसलिए जरूरी है कि कोरोना मरीज खुद से आगे आएं और प्लाज्मा डोनेट करें।
- प्रो. जीडी पुरी डीन एकेडमिक व हेड आफ डिपार्टमेंट एनेस्थीसिया
- फिजा गुप्ता, प्लाज्मा डोनर
प्लाज्मा देने से किसी भी तरह की कोई कमजोरी नहीं आती। इससे किसी की जान जरूर बच सकती। कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों से अपील करता हूं कि वे अपने डर को बाहर निकालें और प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं।
- यशपाल शर्मा, प्लाज्मा डोनर
अभी तक सिर्फ छह मरीजों ने प्लाज्मा डोनेट किया है। मरीजों आगे आएंगे तो रिसर्च और इलाज की दिशा में हम आगे बढ़ पाएंगे। इसलिए जरूरी है कि कोरोना मरीज खुद से आगे आएं और प्लाज्मा डोनेट करें।
- प्रो. जीडी पुरी डीन एकेडमिक व हेड आफ डिपार्टमेंट एनेस्थीसिया