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हरियाणा में और गहराया बिजली संकट: झज्जर प्लांट की एक यूनिट बंद, बॉयलर में आई तकनीकी खराबी, ठीक होने में लगेंगे तीन दिन

Tue, 03 May 2022 01:39 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 03 May 2022 01:39 AM IST
सार

इनेलो प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है और भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हरियाणा सरकार आज अडाणी के सामने नतमस्तक हो चुकी है और जनता में हाहाकार मचा हुआ है।

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One unit of Jhajjar thermal plant closed due to technical fault
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा में बिजली संकट और गहरा गया है। सोमवार को झज्जर स्थित महात्मा गांधी पावर स्टेशन की यूनिट नंबर दो बॉयलर में तकनीकी खराबी आने से बंद हो गई। इस यूनिट से 660 मेगावाट बिजली मिलती है। थर्मल इंजीनियर का कहना है कि यूनिट को दोबारा से चालू करने में कम से कम दो से तीन दिन लगेंगे। 

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इधर, प्रदेश की मांग बढ़कर 9372 मेगावाट तक पहुंच गई है। स्टॉक में कम होने के चलते 42.47 लाख यूनिट के कट लगाए जा रहे हैं। झज्जर प्लांट की यूनिट बंद होने से आगामी कुछ और दिन उपभोक्ताओं को बिजली के ज्यादा कट झेलने पड़ सकते हैं। हरियाणा में पहले से ही हिसार के गांव खेदड़ स्थित राजीव गांधी पावर प्लांट की 600 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 2 बंद चल रही है। 
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रोटोर खराब होने के कारण यह यूनिट पिछले एक साल से बंद है। रोटोर उपकरण चीन से आना है। सरकार की तरफ से नए रोटोर की खरीद के लिए ऑर्डर दिया जा चुका है लेकिन चीन में दोबारा से कोरोना आने के चलते यह डिलीवरी अटकी हुई है। इसके अलावा, अडाणी से 1424 और टाटा पावर कंपनी से 500 मेगावाट बिजली पहले से ही एक साल से बंद चल रही है। गौर हो कि विभाग की ओर से उद्योगों में रात 8 से 4 बजे बिजली बंद रखी जा रही है। वहीं, शहरों में 6.30 और गांवों में 4 घंटे के घोषित कट लगाए जा रहे हैं, अघोषित कटों की संख्या अलग है। 

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एक माह में बढ़ी 2611 मेगावाट की मांग
गर्मी के कारण प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। अकेले अप्रैल माह में ही 2611 मेगावाट बिजली की मांग बढ़ी। एक अप्रैल को जहां बिजली की मांग 6805 मेगावाट थी, वह बढ़कर 30 अप्रैल तक रिकॉर्ड 9416 मेगावाट तक पहुंच गई। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती गई तो बिजली की खपत भी बढ़ती गई। 20 अप्रैल के बाद से मांग आठ हजार मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई। एक मई को प्रदेश में मांग 9287 मेगावाट मांग रही और 1824 लाख यूनिट की सप्लाई दी।

नई बिजली खरीद में भी फंसा है पेंच
अभी नई बिजली खरीद में भी पेंच फंसा हुआ है। विभाग की ओर से छत्तीसगढ़ से 350 और मध्य प्रदेश से 150 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए तीन साल का करार हो चुका है लेकिन सुनवाई के दौरान एचईआरसी (हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग) ने इस पर आपत्ति जताई। साथ ही हर साल केवल 7-7 माह बिजली लेने की मंजूरी दी है। अब पेंच यहां फंस गया है कि दोनों कंपनी हरियाणा को सात सात माह बिजली देने के लिए तैयार होंगी या नहीं। प्रदेश सरकार इसकी समीक्षा कर रही है। 

उद्योगपति अडाणी के आगे नतमस्तक सरकार: अभय चौटाला
इनेलो प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है और भाजपा सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। हरियाणा सरकार आज अडाणी के सामने नतमस्तक हो चुकी है और जनता में हाहाकार मचा हुआ है। चौटाला ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए थर्मल प्लांट्स की सर्विस ठीक समय पर नहीं की जाती, थर्मल को चलाने के लिए मशीनों के स्पेयर पार्ट्स समय पर बदले नहीं जाते, कोयले की क्वालिटी पर ध्यान नहीं दिया जाता। बिजली संकट का असर सीधे-सीधे प्रदेश की जनता, खेती और उद्योगों पर पड़ रहा है। 

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