{"_id":"5fe9d2ac176c50517b4c586f","slug":"om-prakash-chautala-wrote-letter-to-pm-modi-over-farm-laws","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा के पूर्व सीएम ओपी चौटाला ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा के पूर्व सीएम ओपी चौटाला ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की
Mon, 28 Dec 2020 06:12 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 28 Dec 2020 06:12 PM IST
विज्ञापन
OP Chautala
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देशहित और किसान हित में कृषि कानूनों को वापस लेने की अपील की। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि किसान इस भीषण ठंड में एक महीने से भी ज्यादा समय से आंदोलनरत हैं लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन
यह दुखद स्थिति है। किसान किसी आंदोलन में भाग नहीं लेते हैं और आज ऐसा हो रहा है तो उसे संवेदनात्मक दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। उन्होंने लिखा कि संभवत: सरकार द्वारा कृषि कानूनों के संबंध में किसानों से संवाद स्थापित करने में चूक हुई है, जिसकी वजह से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है।
विज्ञापन
इनेलो सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री को याद दिलाते हुए लिखा कि हमारे देश में स्वतंत्रता आंदोलन में इसी प्रकार चार बड़े आंदोलन हुए थे, जिनका नेतृत्व महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे नेताओं ने किया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि किसानों को तीनों कृषि कानून मंजूर नहीं हैं, इसलिए हठधर्मिता छोड़कर किसानों की मांग को मान लेना चाहिए। उन्होंने बिहार के किसानों का उदाहरण देते हुए लिखा कि उनकी हालत से आप भलीभांति परिचित हैं, जो जमीनों के मालिक होते हुए भी हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में मजदूरी करने पर मजबूर हैं।
विज्ञापन
उन्होंने प्रधानमंत्री से निवेदन करते हुए लिखा कि इन कृषि कानूनों को लागू करने में जल्दबाजी न की जाए और न ही इसे अहं का विषय बनाया जाए क्योंकि किसान को जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी अपनी जान से ज्यादा प्यारा होता है। इनेलो सुप्रीमो ने आशंका व्यक्त करते हुए लिखा कि किसानों का आंदोलन अभी तक शांतिप्रिय चल रहा है अगर किन्ही कारणों से उग्र हुआ तो इसके दूरगामी परिणाम देशहित में नहीं होंगे।
उन्होंने अब तक शहीद हुए लगभग 50 किसानों की मौत पर गहरा दुख प्रकट किया और लिखा कि इससे ज्यादा विडंबना क्या होगी कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसान का विशेष स्थान है लेकिन फिर भी अपने अधिकार के लिए सड़क पर आंदोलन करने पर मजबूर है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री पूरे देश का होता है, इसलिए उनकी लिखी बातों को ध्यान में रखते हुए इन कृषि कानूनों को या तो वापस लिया जाए या उन्हें तब तक के लिए निलंबित कर दिया जाए, जब तक किसान संगठनों के साथ मिलकर सहमति नहीं बन जाती।