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जाट आरक्षणः गजब है, हाईकोर्ट के जजों की जाति पर ही उठा दिए सवाल
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 25 Jan 2017 04:13 PM IST
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हरियाणा जाट आरक्षण केस की सुनवाई
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हरियाणा जाट आरक्षण केस की सुनवाई के दौरान उस समय सभी हैरान रह गए, जब हाईकोर्ट के जजों की जाति पर ही सवाल उठा दिए गए। यह सवाल याची पक्ष की ओर से अर्जी के जरिये उठाया गया। याची ने संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि बेंच के दोनों जज जट सिख हैं, न्याय देने में एक पक्ष से उनकी हमदर्दी हो सकती है। याची ने बेंच के दोनों जजों से इस केस से हटने की अपील की।
बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केस को सुनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जिस तरह से यह अर्जी दाखिल की गई है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। याची ने कहा कि दोनों जज जट सिख हैं। ऐसे में कहीं न कहीं जाट समुदाय से भावनात्मक लगाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान याची की ओर से दाखिल अर्जी में यह भी कहा गया कि बेंच के एक जज के रिश्तेदार हरियाणा सरकार के करीबी हैं, जो सुनवाई प्रभावित होने का कारण बन सकते हैं।
इस पर बेंच ने सवाल किया कि इसका मतलब यह है कि मामले की सुनवाई गैर जाट जज को दी जानी चाहिए। बेंच लंबे समय से इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ऐसे में अब यह दलील समझ से परे है। बेंच आरक्षण के लाभ पर रोक हटाए जाने की हरियाणा सरकार की मांग पर सुनवाई कर रहा है।
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बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केस को सुनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन जिस तरह से यह अर्जी दाखिल की गई है वह दुर्भाग्यपूर्ण है। याची ने कहा कि दोनों जज जट सिख हैं। ऐसे में कहीं न कहीं जाट समुदाय से भावनात्मक लगाव की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान याची की ओर से दाखिल अर्जी में यह भी कहा गया कि बेंच के एक जज के रिश्तेदार हरियाणा सरकार के करीबी हैं, जो सुनवाई प्रभावित होने का कारण बन सकते हैं।
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इस पर बेंच ने सवाल किया कि इसका मतलब यह है कि मामले की सुनवाई गैर जाट जज को दी जानी चाहिए। बेंच लंबे समय से इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ऐसे में अब यह दलील समझ से परे है। बेंच आरक्षण के लाभ पर रोक हटाए जाने की हरियाणा सरकार की मांग पर सुनवाई कर रहा है।
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ऐसी परंपरा शुरू हुई तो कास्ट वार का अखाड़ा बन जाएगा हाईकोर्ट
हरियाणा जाट आरक्षण केस की सुनवाई
- फोटो : डेमो फोटो
बेंच ने टिप्पणी की कि अर्जी दाखिल होने के बाद जाट आरक्षण मामला अब बेंच के गले की हड्डी बन गई है, जिसे न तो निगला जा रहा है और न ही उगला। यदि अर्जी को स्वीकार कर बेंच केस से हटती है, तो ऐसी गंभीर परिस्थितियां पैदा होंगी जिसका याची अंदाजा भी नहीं लगा सकता। पूछा कि सुनवाई कर रहे दोनों जज जट सिख हैं तो क्या अब इस मामले पर सुनवाई न करें।
इस तरह तो एससी एसटी एक्ट के मामलों में भी यह मांग की जाएगी कि जाति विशेष से जुड़े जज उनसे जुड़े मामलों की सुनवाई न करें। अगर यह परंपरा आरंभ की गई तो हाईकोर्ट कास्ट वार का अखाड़ा बनकर रह जाएगा। ऐसा हुआ तो केस के लिए बेंच निर्धारित करते हुए याची और बेंच के जज की जाति को देखना पड़ेगा। जाति देखकर केस सुनने के लिए बेंच निर्धारित हो ऐसी व्यवस्था नहीं होने देंगे।
सरकार की दलील, जज को जाति विशेष से जोड़ना उचित नहीं
हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि जज संवैधानिक नियुक्ति से जुड़े हैं। ऐसे में जज को किसी जाति विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पद की शपथ लेते समय भी इस बात को कहा जाता है कि वे इन दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष तरीके से फैसला करेंगे। ऐसे में मामले पर जल्द ही सुनवाई पूरी कर कोर्ट इस तरफ या उस तरफ अपना फैसला दे।
इस तरह तो एससी एसटी एक्ट के मामलों में भी यह मांग की जाएगी कि जाति विशेष से जुड़े जज उनसे जुड़े मामलों की सुनवाई न करें। अगर यह परंपरा आरंभ की गई तो हाईकोर्ट कास्ट वार का अखाड़ा बनकर रह जाएगा। ऐसा हुआ तो केस के लिए बेंच निर्धारित करते हुए याची और बेंच के जज की जाति को देखना पड़ेगा। जाति देखकर केस सुनने के लिए बेंच निर्धारित हो ऐसी व्यवस्था नहीं होने देंगे।
सरकार की दलील, जज को जाति विशेष से जोड़ना उचित नहीं
हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि जज संवैधानिक नियुक्ति से जुड़े हैं। ऐसे में जज को किसी जाति विशेष से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। पद की शपथ लेते समय भी इस बात को कहा जाता है कि वे इन दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष तरीके से फैसला करेंगे। ऐसे में मामले पर जल्द ही सुनवाई पूरी कर कोर्ट इस तरफ या उस तरफ अपना फैसला दे।