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रुपये के मुकाबले डॉलर की मजबूती का बड़ा साइड इफेक्ट, देश में प्रॉपटी पर निवेश कर रहे हैं NRI
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Updated Thu, 11 Oct 2018 12:44 PM IST
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रियल एस्टेट कारोबार
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रुपये के मुकाबले डॉलर, पौंड की मजबूती से अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) की भारत में निवेश में दिलचस्पी एक बार फिर बढ़ गई है, जिससे रियल एस्टेट कारोबार को बढ़ावा मिला। इससे भारत में इस कारोबार के मंदी से निकलने के आसार बन गए हैं। देश का रियल एस्टेट उद्योग करीब 3,000 अरब रुपये का है, जिसमें 7-8 फीसदी मकानों को एनआरआई खरीदते हैं। इस क्षेत्र में वे हर साल करीब 21,000-30,000 करोड़ रुपये की खरीदारी करते हैं। पंजाब में वे जबरदस्त निवेश करते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से उनका रुझान वहां कम होने लगा, जिससे वहां प्रॉपर्टी बाजार बिलकुल निचले स्तर पर पहुंच गया।
रियल एस्टेट कारोबारी राकेश नयन ने कहा कि रियल एस्टेट कारोबार एक बार फिर तेजी पकड़ रहा है। रेरा से चीजें बेहतर हुई हैं। जहां परिसंपत्तियों के मूल्य पहले से ही 10-15 फीसदी तक नीचे हैं, वहीं रुपये के वर्तमान मूल्य से 10-15 फीसदी का और अंतर आया है। इस स्थिति में एनआरआई खरीदार लौट रहे हैं। वहीं, एनआरआई निवेशक बलजिंदर पप्पी ने कहा कि रुपये में गिरावट से भारत में निश्चित तौर पर संपत्तियों की मांग बढ़ेगी और एनआरआई अच्छे रिटर्न की उम्मीद में रियल एस्टेट बाजार में निवेश करना चाहते हैं। उन्हें भारत में प्रॉपर्टी अब सस्ती लगने लगी है, क्योंकि डॉलर काफी मजबूत हुआ है।
प्रॉपर्टी कारोबारी एसोसिएशन के प्रधान मेजर सिंह का कहना है कि पंजाब में कई सालों से प्रॉपर्टी कारोबारियों के लिए पॉलिसी सही नहीं रही और डॉलर कमजोर होने के कारण एनआरआई का निवेश में रुझान काफी कम हो गया था। वे अधिकतर निवेश कनाडा व ब्रिटेन के रियल एस्टेट में करने लगे। उन्होंने टोरंटो से लेकर वैनकुवर तक काफी पैसों का निवेश किया। अब डॉलर के मुकाबले रुपया 74 का स्तर पार कर चुका है। कनाडाई डॉलर 49 रुपये का था, जो अब 57 रुपये पार कर चुका है। ब्रिटेन का पौंड 80 रुपये का था, जो अब 97 रुपये तक आ गया है। इससे एनआरआई का निवेश में रुझान दोबारा बढ़ने लगा है। एनआरआई के लिए देश में 2012 जैसी ही स्थिति है, जब रुपये के मूल्य में गिरावट आई थी।
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रियल एस्टेट कारोबारी राकेश नयन ने कहा कि रियल एस्टेट कारोबार एक बार फिर तेजी पकड़ रहा है। रेरा से चीजें बेहतर हुई हैं। जहां परिसंपत्तियों के मूल्य पहले से ही 10-15 फीसदी तक नीचे हैं, वहीं रुपये के वर्तमान मूल्य से 10-15 फीसदी का और अंतर आया है। इस स्थिति में एनआरआई खरीदार लौट रहे हैं। वहीं, एनआरआई निवेशक बलजिंदर पप्पी ने कहा कि रुपये में गिरावट से भारत में निश्चित तौर पर संपत्तियों की मांग बढ़ेगी और एनआरआई अच्छे रिटर्न की उम्मीद में रियल एस्टेट बाजार में निवेश करना चाहते हैं। उन्हें भारत में प्रॉपर्टी अब सस्ती लगने लगी है, क्योंकि डॉलर काफी मजबूत हुआ है।
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प्रॉपर्टी कारोबारी एसोसिएशन के प्रधान मेजर सिंह का कहना है कि पंजाब में कई सालों से प्रॉपर्टी कारोबारियों के लिए पॉलिसी सही नहीं रही और डॉलर कमजोर होने के कारण एनआरआई का निवेश में रुझान काफी कम हो गया था। वे अधिकतर निवेश कनाडा व ब्रिटेन के रियल एस्टेट में करने लगे। उन्होंने टोरंटो से लेकर वैनकुवर तक काफी पैसों का निवेश किया। अब डॉलर के मुकाबले रुपया 74 का स्तर पार कर चुका है। कनाडाई डॉलर 49 रुपये का था, जो अब 57 रुपये पार कर चुका है। ब्रिटेन का पौंड 80 रुपये का था, जो अब 97 रुपये तक आ गया है। इससे एनआरआई का निवेश में रुझान दोबारा बढ़ने लगा है। एनआरआई के लिए देश में 2012 जैसी ही स्थिति है, जब रुपये के मूल्य में गिरावट आई थी।
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