रोबोटिक सर्जरी महंगी, इलाज के लिए ज्यादा ढ़ीली करनी होंगी जेबें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब मरीजों पर भी पड़ेगी महंगाई की मार, रोबोटिक सर्जरी करवाने की प्लानिंग कर रहे मरीजों को अब पहले से ज्यादा ढ़ीली करनी होंगी जेबें। दरअसल पीजीआई हास्पिटल्स चार्जर्स कमेटी ने रोबोटिक सर्जरी का रेट बढ़ा दिया हैं।
जनरल वार्ड के मरीजों के लिए पहले 20 हजार रुपये चार्ज था, लेकिन अब उन्हें इसके लिए 30 हजार रुपये देने होंगे। दस हजार रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इसी तरह से प्राइवेट वार्ड में दाखिल मरीजों को अब 60 हजार रुपये देने होंगे। पहले उन्हें 40 हजार रुपये देने पड़ते थे।
पीजीआई ने बीपीएल कार्ड धारक मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी की फीस तय कर दी है। अब उन्हें दस हजार रुपये देने होंगे। बाकी रुपया पुअर पेशेंट फंड्स व दूसरे विकल्प से जुटाने होंगे। ये तो सिर्फ सर्जरी की फीस। जो सामान लगेगा, उसका खर्च अलग से होगा। हालांकि प्राइवेट हासिपटल्स में इसका खर्च सवा लाख रुपये है।
पीजीआई का तर्क है कि रोबोटिक सर्जरी में संस्थान का काफी रुपया खर्च होता है। उस खर्च का पचास फीसदी से भी कम मरीजों से लिया जाता है। पीजीआई में रोबोटिक सर्जरी करीब सवा साल पहले शुरू हुई थी।
रोबोटिक सर्जरी का फायदा: यूरोलाजी डिपार्टमेंट के मुताबिक रोबोटिक का सबसे ज्यादा फायदा यह है कि मरीज को तीन से सात दिन के भीतर छुट्टी मिल जाती है। लेप्रोस्कोपिक व रूटीन सर्जरी में मरीज को ठीक होने में दो हफ्ते लग जाते हैं। कई बार ज्यादा दिन तक रुकने से मरीज को इंफेक्शन हो जाता है।
रोबोट की बाहें मानव हाथ की तुलना में ज्याद निपुण होती हैं। इसलिए ऊतकों (टिश्यू) को कम क्षति पहुंचती है। नतीजतन रक्त का बहुत कम नुकसान होता है। कम आघात पहुंचता है और मरीज जल्द सामान्य स्थिति में आ जाता है।
ऑपरेशन को और सटीक बनाता है रोबोटिक सर्जरी
यह भी है फायदा: पारंपरिक होल सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी का फायदा यह भी है कि डॉक्टर को थ्री डाइमेंशनल व्यू दिखाई देता है। इसलिए इसमें एक गहराई भी दिखती है जो कि होल सर्जरी में दिखाई नहीं देती। रोबोट के रिमोट कंट्रोल से चलने वाले तीन हाथ हैं, जो 360 डिग्री पर घूम सकते हैं।
ऑपरेशन को और सटीक बनाता है
इससे डॉक्टर अपने हाथ की तुलना में ज्यादा सूक्ष्मता से ऑपरेशन कर सकते हैं। रोबोट में एक चौथा हाथ भी होता है, जिसमें 3 डी हाई डेफिनेशन कैमरा लगा होता है। ऑपरेशन करते समय डॉक्टर थ्री डी कैमरे से पूरी तस्वीर देख सकते हैं, जो ऑपरेशन को और सटीक बनाता है। रोबोट से वो हल्का कंपन भी दूर किया जा सकता है।
रोबोट का उपयोग खास तौर पर प्रोस्टेट या ट्यूमर हटाने के लिए या फिर गैस्ट्रोइंटेस्टिनल (जठरांत्रिय) या न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका) ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाता है। पीजीआई में डॉक्टर ही तय करते हैं कि किस मरीज का आपरेशन रोबोट से होना है, क्योंकि हर मरीज के आपरेशन में रोबोट का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
सुभाष चंदर, चेयरमैन एंटी करप्शन फ्रंट पीजीआई ने बताया कि पीजीआई में पहले से ही इलाज महंगा है। रेट बढ़ाने से मरीजों की परेशानी बढ़ जाएगी। पीजीआई मुकदमों पर तो लाखों रुपया खर्च का देता है। उसका कुछ भी हिसाब-किताब नहीं होता। इस बारे में भी पीजीआई को सोचना चाहिए।