अब 20 दिन राजनीति के लिए होंगे अहम, बंसल ने बिछाई लोकसभा की बिसात
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चंडीगढ़ में नगर निगम चुनाव की बिसात बिछ चुकी है। दोनों प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। मंगलवार को नामांकन की आखिरी दिन है। इसके पश्चात सभी प्रत्याशी और बड़े नेता चुनाव प्रचार में जी जान से जुट जाएंगे।
अगले 20 दिन शहर के विकास के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे। इन बीस दिनों में हर कोई मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर हथकंडे का उपयोग करेगा।
नामांकन के लिए उम्मीदवार ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने में लग गए हैं। ज्यादा से ज्यादा शक्ति प्रदर्शन करके वह अपनी जीत का मैसेज देने का प्रयास करेंगे। दोनों दलों के नेताओं ने अभी से हर वार्ड की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों और प्रतिष्ठित लोगों को संपर्क करना शुरू कर दिया है।
मतदान के दिन तक दोनों दलों के सीनियर नेता और स्टारक प्रचारक डोर टू डोर प्रचार करते दिखाई देंगे। शहर में जमकर पोस्टरबाजी की संभावना है। कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही सट्टा बाजार भी गर्म हो गया है।
इस बार चुनाव में नोटबंदी का असर भी देखने को मिलेगा। 18 दिसंबर को मतदान होगा जबकि 20 दिसंबर को रिजल्ट आएगा।
टिकट वितरण के सहारे लोकसभा की जमीन तैयार
कांग्रेस पार्टी में टिकट वितरण से पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल द्वारा आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए जमीन भी तैयार की गई है। बंसल ने अपने करीबियों को टिकट दिलाया है।
इससे बंसल ने यह भी मैसेज देने का प्रयास किया है कि शहर में कांग्रेस का कोई अन्य गुट नहीं है, इसलिए पहले चुनाव समिति में फिर उसके बाद एक भी टिकट तिवारी गुट को नहीं लेने दिया।
पिछले तीन चुनावों में तिवारी गुट के चंद्रमुखी शर्मा को टिकट मिली थी लेकिन इस बार उनका नाम काट दिया गया। एक भी टिकट न मिलने से तिवारी गुट नाराज है। बंसल सभी ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो कि पिछले लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं। सिर्फ वार्ड नंबर-2 से हाल ही में भाजपा से आई दीपा दूबे को टिकट दिया गया है।
मेहनत पति ने की, टिकट पत्नियों को मिला
कांग्रेस में तीन नेता ऐसे है जिन्होंने खुद पार्षद बनने के लिए पिछले 4 साल से अपने वार्ड में मेहनत की। लेकिन वार्ड रिजर्व होने से उनका खेल बिगड़ गया है। ऐसे में पार्टी ने इन नेताओं की पत्नियों को टिकट दी है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा, कांग्रेस सचिव आनंद सिंह की पत्नी जसप्रीत कौर और एएस गुजराल की पत्नी रविंदर कौर को टिकट दी गई है।
आवेदन न करने वालों को भी टिकट
125 ने टिकट के लिए आवेदन किया था। कांग्रेस की ओर से दावा किया था जिस नेता ने आवेदन किया है उसकी टिकट पर ही विचार किया जाएगा। लेकिन टिकट वितरण में ऐसा नहीं हुआ। आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार मैदान में उतारे गए हैं जिन्होंने आवेदन भी नहीं किया था।
4 वकील मैदान में उतारे
कांग्रेस ने 4 वकीलों को टिकट दिया है जिसमें एचएस लक्की, पूनम शर्मा, राजेश शर्मा और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष मीनाक्षी चौधरी का नाम शामिल है। वार्ड नंबर-8 और 1 से कांग्रेस और भाजपा के दोनों उम्मीदवार वकील हैं।
वार्ड नंबर-1 से भाजपा के उम्मीदवार महेश इंद्र सिद्धू और कांग्रेस के उम्मीदवार लक्की हैं जबकि वार्ड नंबर-8 से भाजपा के मेयर अरुण सूद पेशे से वकील है और उनका मुकाबला कांग्रेस से वकील राजेश शर्मा के साथ हैं। जबकि भाजपा ने 7 वकीलों को टिकट दिया है।
कश्मीरी देवी को नहीं मिला भाजपा से टिकट
लेकिन ढ़ाई साल पहले मां अपने बड़े बेटे पूर्व पार्षद विजय राणा के साथ भाजपा में शामिल हो गई थी लेकिन भाजपा ने मां को बार टिकट नहीं दी। जबकि भाजपा ने कंवर राणा को टिकट दी है।
विद्रोह का मिला फायदा
जबकि कांग्रेस महासचिव संदीप भारद्वाज को टिकट कटने के बाद विरोध का फायदा मिला है। भारद्वाज ने टिकट न मिलने पर पार्टी के सीनियर नेताओं को टारगेट पर ले लिया था। इसके बाद पार्टी को रविवार को फैसला पलटकर संदीप भारद्वाज को टिकट देना पड़ा। शनिवार रात तक पार्टी का निर्णय देवेंद्र गुप्ता को टिकट देने का था।