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400 करोड़ की ठगी मामले में केंद्र और पंजाब सरकार को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 29 Apr 2017 09:38 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
अमृतसर के एक अकाली नेता द्वारा छह रियल इस्टेट और इनवेस्टमेंट कंपनियां बनाकर आम लोगों से 400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी व ठगी करने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है। अमृतसर निवासी 16 लोगों ने संयुक्त याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि पंजाब में अकाली सरकार के रहते पुलिस ने भी धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने मामले में केंद्र और राज्य सरकार के नौ अधिकारियों को नौ अगस्त के लिए नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में पंजाब के गृह सचिव, इन्फोर्समेंट डायरेक्टर नार्दन रीजन, आयकर (इंवेस्टिगेशन) निदेशक पंजाब, राज्य के राजस्व सचिव, पूडा के मुख्य प्रशासक, केंद्रीय कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव, डीजीपी, अमृतसर सिटी के पुलिस कमिश्नर और छहरटा पुलिस स्टेशन के एसएचओ को प्रतिवादी बनाते हुए आरोप लगाया है कि इन लोगों ने पूरे मामले को रफादफा करने की कोशिश की।
इस मामले में केदार सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर जांच के बाद 10 जुलाई, 2016 को छहरटा पुलिस स्टेशन में पांच लोगों के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी व ठगी करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की गई। लेकिन मामले में हाई प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता के चलते किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही पुलिस ने ठगी गई रकम ही बरामद की। उलटे इस मामले को रफादफा करने की कोशिश की। इसके विरोध में प्रभावित लोगों ने शहर में धरना-प्रदर्शन भी किए।
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याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में पंजाब के गृह सचिव, इन्फोर्समेंट डायरेक्टर नार्दन रीजन, आयकर (इंवेस्टिगेशन) निदेशक पंजाब, राज्य के राजस्व सचिव, पूडा के मुख्य प्रशासक, केंद्रीय कारपोरेट मामलों के मंत्रालय के सचिव, डीजीपी, अमृतसर सिटी के पुलिस कमिश्नर और छहरटा पुलिस स्टेशन के एसएचओ को प्रतिवादी बनाते हुए आरोप लगाया है कि इन लोगों ने पूरे मामले को रफादफा करने की कोशिश की।
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इस मामले में केदार सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर जांच के बाद 10 जुलाई, 2016 को छहरटा पुलिस स्टेशन में पांच लोगों के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी व ठगी करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की गई। लेकिन मामले में हाई प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता के चलते किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही पुलिस ने ठगी गई रकम ही बरामद की। उलटे इस मामले को रफादफा करने की कोशिश की। इसके विरोध में प्रभावित लोगों ने शहर में धरना-प्रदर्शन भी किए।
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यह है मामला
अदालत
- फोटो : file
बैंकिंग फाइनेंशियल बिजनेस के लिए नहीं था लाइसेंस
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धोखाधड़ी करने वाली सभी कंपनियां अकाली नेता अमरबीर सिंह संधू द्वारा अपने साथियों की मदद से चलाई जा रही थीं। इन कंपनियों ने लोगों से इनवेस्टमेंट के नाम पर पैसा वसूला, जबकि इनके पास नान बैंकिंग फाइनेंशियल बिजनेस के लिए लाइसेंस भी नहीं था। याचिका में कहा गया है कि कंपनियों के जरिए लोगों से आ रहा सारा पैसा अकाली नेता तक पहुंच रहा था। उसने यह पैसा अपने रिश्तेदारों, कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम से प्रापर्टी में निवेश कर दिया। इसके अलावा अकाली नेता ने उस पैसे को कई फिल्मों में फाइनेंस किया।
यह है मामला
याचिका के अनुसार, छह रीयल इस्टेट कंपनियों- मैसर्स आरके इन्वेस्टमेंट, मैसर्स नवरत्न गोल्ड प्रा. लि., मैसर्स नवरत्न रियल इस्टेट प्रा. लि., मैसर्स गोबिंद फ्यूचर विजन लि., मैसर्स दारा फ्यूचर विजन लि. और मैसर्स दारा बिल्डर्स एंड कालोनाइजर्स प्रा. लि. के मालिकों ने हजारों लोगों को चेन मेंबरशिप, फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट जैसी स्कीमों और प्रापर्टी में इन्वेस्टमेंट का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और ठगी की। याचिका में बताया गया है कि पुलिस में सुनवाई न होने के बाद पीड़ित पंजाब मानवाधिकार संगठन नामक एनजीओ के पास गए।
संगठन ने मामले की जांच की तो उसमें शिअद के सीनियर नेता व अमृतसर नगर निगम के पार्षद अमरबीर सिंह संधू का नाम सामने आया। याचिका में बताया गया है कि एनजीओ ने 3579 पन्नों की जांच रिपोर्ट में बताया कि मामला 400 करोड़ रुपये की ठगी का है। उसके आधार पर पुलिस से जांच करने का आग्रह किया। स्थानीय पुलिस हरकत में नहीं आई तो संगठन ने राज्य के डीजीपी से मामले की जांच के लिए विशेष एसआईटी गठित करने की मांग की। इस पर डीजीपी द्वारा अमृतसर के डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन) के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। इसी दौरान 11 नवंबर 2016 को छहरटा पुलिस स्टेशन में चार और लोगों पर धोखाधड़ी व ठगी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई। इन पर बिना किसी अधिकृत अनुमति के लोगों को कृषि भूमि पर प्लाट काटकर बेचने का आरोप लगाया गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि धोखाधड़ी करने वाली सभी कंपनियां अकाली नेता अमरबीर सिंह संधू द्वारा अपने साथियों की मदद से चलाई जा रही थीं। इन कंपनियों ने लोगों से इनवेस्टमेंट के नाम पर पैसा वसूला, जबकि इनके पास नान बैंकिंग फाइनेंशियल बिजनेस के लिए लाइसेंस भी नहीं था। याचिका में कहा गया है कि कंपनियों के जरिए लोगों से आ रहा सारा पैसा अकाली नेता तक पहुंच रहा था। उसने यह पैसा अपने रिश्तेदारों, कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम से प्रापर्टी में निवेश कर दिया। इसके अलावा अकाली नेता ने उस पैसे को कई फिल्मों में फाइनेंस किया।
यह है मामला
याचिका के अनुसार, छह रीयल इस्टेट कंपनियों- मैसर्स आरके इन्वेस्टमेंट, मैसर्स नवरत्न गोल्ड प्रा. लि., मैसर्स नवरत्न रियल इस्टेट प्रा. लि., मैसर्स गोबिंद फ्यूचर विजन लि., मैसर्स दारा फ्यूचर विजन लि. और मैसर्स दारा बिल्डर्स एंड कालोनाइजर्स प्रा. लि. के मालिकों ने हजारों लोगों को चेन मेंबरशिप, फिक्स्ड डिपॉजिट, रेकरिंग डिपॉजिट जैसी स्कीमों और प्रापर्टी में इन्वेस्टमेंट का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और ठगी की। याचिका में बताया गया है कि पुलिस में सुनवाई न होने के बाद पीड़ित पंजाब मानवाधिकार संगठन नामक एनजीओ के पास गए।
संगठन ने मामले की जांच की तो उसमें शिअद के सीनियर नेता व अमृतसर नगर निगम के पार्षद अमरबीर सिंह संधू का नाम सामने आया। याचिका में बताया गया है कि एनजीओ ने 3579 पन्नों की जांच रिपोर्ट में बताया कि मामला 400 करोड़ रुपये की ठगी का है। उसके आधार पर पुलिस से जांच करने का आग्रह किया। स्थानीय पुलिस हरकत में नहीं आई तो संगठन ने राज्य के डीजीपी से मामले की जांच के लिए विशेष एसआईटी गठित करने की मांग की। इस पर डीजीपी द्वारा अमृतसर के डीसीपी (इन्वेस्टिगेशन) के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। इसी दौरान 11 नवंबर 2016 को छहरटा पुलिस स्टेशन में चार और लोगों पर धोखाधड़ी व ठगी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई। इन पर बिना किसी अधिकृत अनुमति के लोगों को कृषि भूमि पर प्लाट काटकर बेचने का आरोप लगाया गया।